मोदी सरकार का फैसला बहुत गलत, हमें अपनी मेहनत का वेतन भी मिल रहा!

Lucknow, Uttar Pradesh, India
 मोदी सरकार का फैसला बहुत गलत, हमें अपनी मेहनत का वेतन भी मिल रहा!

20 साल की नौकरी में कभी वेतन की दिक्कत नहीं हुई, लेकिन नोटबंदी के चलत पहली बार हमें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।

कानपुर. प्रधानमंत्री के 500 और 1000 नोटबंदी के 23वें दिन वेतनभोगी शहर के तमाम बैंकों के बाहर सुबह से लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे थे। लेकिन विष्णुपरी के स्टेटबैंक, आजादनगर के पीएनबी, पांडुनगर के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के बाहर पहली तारीख को सरकारी, प्राइवेट कर्मचारी वेतन निकालने के लिए पहुंचे। दोपहर एक बजे के बाद इन सभी बैंकों में कैश खत्म हो गया। जिसके चलते लोगों को बिना वेतन के अपने घर में वापस लौटना पड़ा।

चार हजार देकर टरकाया
SBI विष्णुपुरी में नगर निगम के कर्मचारियों का माह की पहली तारीख को वेतन आता है। नगर निगम के कर्मी सुबह से लाइन में खड़े रहे। नंबर आने के बाद जब उन्हें चार हजार रुपए मिले तो उनके चेहरे उतर गए। नगर निगम कर्मचारी राजीव शुक्ला ने बताया कि बच्चों की फीस जमा करनी है। इतने कम पैसे में बच्चों की फीस जमा करें या ली गई उधारी निपटाएं। नगर निगम की कर्मी साधना गुप्ता ने कहा कि मोदी सरकार का फैसला बहुत गलत है। हमें अपनी मेहनत का वेतन भी ठीक से नहीं मिल रहा है।


पहली बार नहीं मिली वेतन 
नगर निगम के कर्मचारी रमीज रजा ने बताया कि 20 साल की नौकरी पूरी कर चुका हैं। कभी वेतन की दिक्कत नहीं हुई, लेकिन नोटबंदी के चलत पहली बार हमें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। रजा के मुताबिक सरकार को नोटबंदी से पहले कैश सप्लाई की व्यवस्था करनी चाहिए। बैंक में तीन घंटे के अंदर ही सारा पैसा खत्म हो गया। रजा ने बताया कि नंबर आते-आते बैंक में कैश खत्म हो गया। बैंक के अधिकारियों ने शुक्रवार को आने के लिए कहा है।
 
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हर रोज चाहिए 300 करोड़
शहर में करेंसी की डिमांड के मुकाबले सिर्फ 15 से 20 फीसदी ही सप्लाई हो पा रही है। बैंक अधिकारियों के मुताबिक शहर में रोजाना करीब 300 करोड़ रुपये की जरूरत होती है लेकिन मिलते हैं 50 से 70 करोड़ रुपये ही। ऐसे में सैलरी एकाउंट का बोझ यदि एक हजार करोड़ रुपये बढ़ गया तो  हालात बेकाबू हो जाएंगे, यह डिमांड देश भर में होगी। ऐसे में रिजर्व बैंक का करेंसी सप्लाई सिस्टम फेल हो सकता है। बैंकों के सूत्र बताते हैं कि देश की करेंसी छपाई केंद्रों में दिन रात काम होने के बावजूद अचानक 20 गुना सप्लाई बढ़ाना असंभव है। जबकि डिमांड को देखते हुए अगले एक सप्ताह में इतनी ही करेंसी की हर जगह जरूरत है। सप्लाई कई गुना अधिक किए जाने के बाद भी करेंसी की किल्लत बनी रहेगी।

कानपुर में 1.78 लाख कर्मचारी और पेंशनर्स
मुख्य कोषाधिकारी शिव सिंह के मुताबिक जिले से वेतन लेने वाले करीब 75 हजार अफसर कर्मचारी और शिक्षक हैं। पेंशनर की संख्या 43 हजार है। कोषागार से हर माह की पहली तारीख को इनका वेतन खातों में रिलीज हो जाता है। जो विभाग समय से पे बिल नहीं दे पाते हैं उन्हीं का वेतन एक तारीख के बाद रिलीज होता है। कर्मचारी नेता भूपेश अवस्थी का कहना है कि जिले में करीब 60 हजार केंद्रीय कर्मचारी हैं। इस तरह देखा जाए तो जिले में सेंट्रलए राज्य कर्मचारी और पेंशनर की संख्या लगभग एक लाख 78 पहुंचती है।

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