जानिए देश के अगले संभावित राष्ट्रपति के बारे में ये अनसुनी कहानी 

Akanksha Singh

Publish: Jun, 20 2017 10:43:00 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
जानिए देश के अगले संभावित राष्ट्रपति के बारे में ये अनसुनी कहानी 

भाजपा ने देश के अगले राष्ट्रपति की मुहर कानपुर देहात निवासी रामनाथ कोविन्द के नाम पर लगा दी है।

कानपुर। भाजपा ने देश के अगले राष्ट्रपति की मुहर कानपुर देहात निवासी रामनाथ कोविन्द के नाम पर लगा दी है। कोविंद काफी लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं। मौजूदा समय में वे बिहार में राज्यपाल हैं और सबसे बड़ी बात वह एक दलित चेहरा हैं। अपनी सादगी के लिए मशहूर रामनाथ कोविंद ने अपने कानपुर वाले मकान को दान कर दिया था। 

होंगे यूपी में जन्में पहले राष्ट्रपति 

भाजपा की अगुआई वाले एनडीए से राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपना प्रत्याशी चुना है। अगर कोविंद जीतते हैं तो उत्तर प्रदेश में जन्में पहले राष्ट्रपति होंगे। आइये जानते हैं अभी तक के राष्ट्रपति कहा से हैं -

1) राजेंद्र प्रसाद - सीवान जिला - बिहार 
2) सर्वपल्ली राधाकृष्णन - तिरुतन्नी - तमिलनाडु 
3) जाकिर हुसैन - हैदराबाद - तेलंगाना 
4) विवि गिरी - बरहामपुर - ओडिशा 
5) फखरुद्दीन ए. अहमद - पुरानी दिल्ली 
6) नीलम संजीव रेड्डी - अनंतपुर - आंध्र प्रदेश 
7) ज्ञानी जैल सिंह - फरीदकोट - पंजाब 
8) आर वेंकटरमण - तंजौर - तमिलनाडु 
9) शंकर दयाल शर्मा - भोपाल - मध्य प्रदेश 
10) केआर नारायणन - उजावुर - केरल 
11) एपीजे अब्दुल कलाम - रामेश्वरम - तमिलनाडु 
12) प्रतिभा पाटिल - जलगांव - महाराष्ट्र 
13) प्रणब मुखर्जी - मिराती, बीरभूम जिला, पश्चिम बंगाल   

दूसरे दलित राष्ट्रपति हो सकते हैं 

के. आर. नारायणन भारत के दसवें और पहले दलित राष्ट्रपति थे जो कि अत्यंत निर्धन परिवार से थे। वो ऐसी जाति से ताल्लुक रखते थे जो नारियल तोड़ कर भरण-पोषण करती है। 1997 में उन्होंने पूर्व चुनाव आयुक्त श्री टी. एन. शेषन को बड़े अंतर से हरा कर राष्ट्रपति चुनाव में विजय प्राप्त की थी। कोविंद देश के दूसरे दलित राष्ट्रपति हो सकते है मगर नारायणन दलित थे ये लोग काफी दिनों तक नहीं जान पाए थे और कोविंद दलित है ये सारा मुल्क कल ही जान गया। 

कानपुर से की एलएलबी 

कानपुर देहात परौख गांव में रामनाथ कोविंद का जन्मः एक अक्टूबर, 1945 को हुआ था। इन्होंने प्रारंभिक शिक्षा संदलपुर ब्लाक के ग्राम खानपुर परिषदीय प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय से की और आगे की पढ़ाई के लिए कानपुर आ गए । कल्याणपुर स्थित इंद्रा नगर में एक डॉक्टर के मकान में पांच साल तक रहे। कानपुर नगर के बीएनएसडी से इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद डीएवी कॉलेज से बी कॉम व डीएवी लॉ कालेज से विधि स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद दिल्ली में रहकर आईएएस की परीक्षा तीसरे प्रयास में पास की। मुख्य सेवा के बजाय एलायड सेवा में चयन होने पर नौकरी ठुकरा दी। बड़े भाई प्यारेलाल व स्वर्गीय शिवबालक राम हैं। शिवबालक के बड़े बेअे पंकज झींझक कस्बे में परिवार के साथ रहते हैं और कपड़े की दुकान चलाते हैं। वे बीजेपी दलित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अखिल भारतीय कोली समाज अध्यक्ष भी रहे। वर्ष 1986 में दलित वर्ग के कानूनी सहायता ब्यूरो के महामंत्री भी रह चुके हैं। 

समस्या देख घर को कर दिया दान
 
पंकज बताते हैं कि चाचा जी 1998 में गांव एक मित्र की बेटी की शादी में शामिल होने के लिए आते थे, लेकिन गांव में बाराततशाला न होने के चलते बरातियों को खुले में रूकवाया गया। चाचा ने तत्कालीन सरंपच को बुलाया और अपने पृतैक घर को बरातशाला के लिए दान कर दिया। साथ ही गंगा के तट पर स्थित कुष्ठ रोगियों की सेवा के लिए समर्पित संस्था दिव्य प्रेम सेवा मिशन के आजीवन संरक्षक हैं। पंकज बताते हैं कि वर्ष 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद वह तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरार जी देसाई के निजी सचिव बने थे, इसके बाद भाजपा नेतृत्व के संपर्क में आए।  राम नाथ कोविंद पेशे से वकील भी रहे हैं। इन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट मे 16 साल प्रेक्टिस की है। 

आईएएस में हुआ था चयन 

रामनाथ कोविंद ने स्नातक डिग्री हासिल करने के बाद सिविल सर्विसेस परीक्षा दी। पहले और दूसरे प्रयास में नाकाम रहने के बाद तीसरी बार में उन्होंने कामयाबी हासिल की। कोविंद ने आईएएस जॉब इसलिए ठुकरा दिया क्योंकि मुख्य सेवा के बजाय उनका एलाइड सेवा में चयन हुआ था। वे बीजेपी के टिकट से वे दो बार चुनाव भी लड़ चुके हैं लेकिन दुर्भाग्य से दोनों ही बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। कोविंद वर्ष 1991 में बीजेपी में शामिल हुए। उच्च सदन राज्यसभा में 12 वर्ष तक कोविंद बीजेपी का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वे वर्ष 1994 में पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए थे। पार्टी के प्रवक्ता का पद भी उन्होंने संभाला है।  कोविंद बीजेपी के दलित मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद भी संभाल चुके हैं। 



          

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