युवा अवस्था में किडनियां खराब, जीने की तमन्ना में रोजाना सांसो की मशक्कत

Editorial Khandwa

Publish: Jan, 13 2017 12:19:00 (IST)

Khandwa, Madhya Pradesh, India
युवा अवस्था में किडनियां खराब, जीने की तमन्ना में रोजाना सांसो की मशक्कत

'जिंदगी तुझसे हर कदम पर समझौता क्यों किया जाए, शौक जीने का है मगर इतना भी नहीं कि मर मर कर जिया जाए। कदम थक गए है दूर निकलना छोड़ दिया, पर ऐसा नहीं की मैंने चलना छोड़ दिया

संजय दुबे खंडवा.
'जिंदगी तुझसे हर कदम पर समझौता क्यों किया जाए, शौक जीने का है मगर इतना भी नहीं कि मर मर कर जिया जाए। कदम थक गए है दूर निकलना छोड़ दिया, पर ऐसा नहीं की मैंने चलना छोड़ दियाÓ इन पंक्तियों को असल जिंदगी में सच साबित करते हुए दो युवा किडनियां खराब होने के बाद भी हौंसले से जिंदगी जी रहे हैं।
देशभर सहित शहर में युवा दिवस पर उत्साह का माहौल है। वहीं जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में युवा अवस्था में किडनी खराब होने पर युवक-युवतियां भर्ती है। एेसे एक या दो नहीं बल्कि यहां डायलिसिस कराने वाले मरीजों में 40 फीसदी युवा शामिल है। गुरुवार दोपहर 28 साल का युवक व 29 साल की युवती की दोनों किडनियां खराब है। उन्हें इसकी जानकारी नौ महीने पहले ही पता चला। लेकिन हौंसले व मजबूत इरादों से परिवार की बागड़ोर निभा रहे हैं।
ठहर गई जिंदगी, हिम्मत नहीं हारी
सनावद के बांसवा की कीर्तीबाला पति शैलेंद्रसिंह पवार उम्र महज 29 साल। शादी के आठ साल बाद यानी नौ महीने पहले पता चला किडनियां खराब है। कीर्तीबाला ने कहा एेसा लगा मानों जिंदगी ठहर सी गई है लेकिन पति ने हिम्मत दी और फिर हिम्मत नहीं हारी। बेटा गजराज 10 और बेटी खुशी 6 साल की है। महीने में चार बार डायलिसिस कराने आ रहे है। डॉक्टर ने कहा किडनिया बदलने में रिस्क ज्यादा है लेकिन डायलिसिस से जीना आसान है।
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मुझसे है परिवार, खुशी से बिताएंगे हरपल
मूंदी के माखनी के राकेश नरवरे की उम्र महज 28 साल है। शादी के पांच साल बाद पता चला दोनों किडनियां खराब है। पत्नी मधु ने हिम्मत बांधी। बेटी संख्या 5 साल तो बेटा साहिल 2 साल का है। पति-पत्नी खेत में मजदूरी करते हैं। जैसे तैसे परिवार चल रहा था। लेकिन अचानक आठ महीने पहले रिपोर्ट में किडनियां खराब निकली। मुझसे है परिवार तो कैसे मैं हिम्मत हारता। खुशी से हरपल को हम बिता रहे हैं।
कैसे और क्या काम करती है किडनियां
शरीर के सिस्टम में सभी चीज़ों से निकलने वाले टॉक्सिन, एक जोड़ी बीन आकार का अंग जो एब्डोमिन कैविटी के एक-एक किनारे पर होता है, उसे किडनी कहते हैं। ये दिन-रात काम करती हैं, चौबीसों घंटे इन हानिकारक टॉक्सिन को फि़ल्टर करती है। लोड बढऩे पर किडनी की क्षमता कम हो जाती है। इससे किडनी स्टोन, संक्रमण, सिस्ट, ट्यूमर होने की सम्भावना बढ़ जाती है और किडनी काम करना बंद कर देती है।
40 फीसदी युवा शामिल
- डायलिसिस यूनिट में दर्ज किडनी मरीजों में 40 फीसदी युवा शामिल है। डायबिटिज, ब्लड पे्रशर व दर्द निवारक दवा के अधिक सेवन से किडनियां खराब हो रही है। छह महीने में चेकअप कराना जरुरी है। - संतोष श्रीवास्तव, डायलिसिस यूनिट प्रभारी खंडवा

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