कलेक्टर बोलीं : डर से लडऩे का एक ही तरीका है निर्भीक बनें

Khandwa, Madhya Pradesh, India
कलेक्टर बोलीं : डर से लडऩे का एक ही तरीका है निर्भीक बनें

खंडवा में 'पत्रिका' के अभियान निर्भीक बचपन में शुक्रवार को शा. मावि उर्दू स्कूल में कलेक्टर स्वाति मीणा नायक ने कहा, मैं लड़कियों से यही कहना चाहूंगी कि संसाधनों पर निर्भर रहना छोडि़ए, मुकाम को हासिल करने के लिए इमानदारी से कोशिश करें। चुनौतियां, मुश्किलें सामने आए तो रूकना नहीं है। डर से लडऩे का एक ही तरीका है, आप उससे आंखों में आंखें डालकर बात करो। 

खंडवा@पत्रिका. खंडवा में 'पत्रिका' के अभियान निर्भीक बचपन में शुक्रवार को शा. मावि उर्दू स्कूल में कलेक्टर स्वाति मीणा नायक ने कहा, मैं लड़कियों से यही कहना चाहूंगी कि संसाधनों पर निर्भर रहना छोडि़ए, मुकाम को हासिल करने के लिए इमानदारी से कोशिश करें। चुनौतियां, मुश्किलें सामने आए तो रूकना नहीं है। डर से लडऩे का एक ही तरीका है, आप उससे आंखों में आंखें डालकर बात करो।

पत्रिका के माध्यम से ये जो निर्भीक बचपन कैंपेन चलाया जा रहा है, मैं इसकी प्रशंसा करना चाहूंगी, क्योंकि ये एेसा कार्यक्रम है जो हमारे देश के विकास की नींव याने बचपन को संवारनें और उसे निर्भीक बनाने के लिए है। ये बात शुक्रवार को शहर के शा. मावि उर्दू स्कूल में कलेक्टर स्वाति मीणा नायक ने 'पत्रिका' के निर्भीक बचपन अभियान में कही। 
nirbheek bachpan
बच्चों से बात करतीं कलेक्टर स्वाति मीणा नायक


आंखों में आंखें डालकर बात करो
उन्होंने कहा, मैं लड़कियों से यही कहना चाहूंगी कि संसाधनों पर निर्भर रहना छोडि़ए, अपने मुकाम को हासिल करने के लिए इमानदारी से कोशिश करें। चुनौतियां, मुश्किलें सामने आए तो रूकना नहीं है। डर से लडऩे का एक ही तरीका है, आप उससे आंखों में आंखें डालकर बात करो। क्योंकि अगर डरकर रास्ता छोड़ दिया तो सफल नहीं हो पाएंगे। 


ये इरादा होना चाहिए कि अगर दबाने की कोशिश करोगे तो हम दोबारा उसी तरह से आंख में आंख डालकर देखेंगे। हम 'पंख' कार्यक्रम चला रहे हैं। कोई छेड़खानी करे तो 100 डायल कर शिकायत दर्ज कराएं। मेरे ऑफिस तक आएं। खुद आकर मुझ तक शिकायत पहुंचा सकती हैं। पत्र लिखकर दे सकती हैं। सीधे मेरे पास भी भिजवा सकते हैं।





ये है उद्देश्य
पत्रिका खंडवा संस्करण के संपादक राजीव जैन ने कहा कि अभियान के माध्यम से हम बताना चाहते हैं कि बच्चे जानंे, क्या अच्छा है, क्या बुरा है? वो तय कर पाएं। ये पता होना चाहिए कि समाज में क्या सही हो रहा है और क्या गलत हो रहा है। छात्राओं को गुड और बेड में फर्क पता होना तथा अच्छी व बुरी नीयत को पहचानना भी जरूरी है। कार्यकम में हाईस्कूल प्राचार्य उषा उग्रवाल, मिडिल स्कूल प्रधानपाठक शाहिद खान, प्राइमरी रूखसाना पठान, शाला प्रबंधन समिति अध्यक्ष अंजुम राहत, समाजसेवी रूआब पठान, मायुम्फर खान, शिक्षक व अभिभावक मौजूद थे।

 कार्यक्रम में ये पूछे गए सवाल
- लड़कियों के लिए बेहतर से बेहतर सुरक्षा के लिए आप क्या-क्या करेंगीं?, जो लोग नशा करके लड़कियों को परेशान करते हैं, उनका क्या करना चाहिए?

- बड़े मुकाम पर हैं तो क्या आपको भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?, लड़कियों की सुरक्षा के लिए जूडो-कराते के लिए टीचर रखे जाएंगे क्या?, शासन ने लड़कियों की सुरक्षा के लिए क्या-क्या उपाय किए हैं?

- अक्सर लड़कियों को डर लगता है कि टीचर या अभिभावक से कहेंगे, इज्जत वाली बात है, खौफ से लड़ें?, आप कलेक्टर बने तो क्या आपको भी इस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा?, अपनी आत्मरक्षा के लिए हम क्या करें?

कलेक्टर ने एेसे दिए जवाब
- खुद की सोच से सशक्त बनिए, निर्भरता की मानसिकता को खत्म कीजिए। बाल सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन नंबर है, बच्चे का नाम बगैर जाहिर किए संबंधित पर कार्रवाई होगी, सभी स्कूल में हेल्पलाइन नंबर लिखेंगे, 100 डायल करके भी तत्काल पुलिस की मदद ले सकते हो।

- 6वीं, 7वीं, 8वीं के बाद समाज की सच्चाई सामने आने लगी, तब सोचा कि एेसा कुछ करना है, जिससे खुद सशक्त बनूं, दूसरों को भी प्रोटेक्ट कर पाऊं। आप भी ये तय करें कि आप किसी पर बर्डन न बनें, आप क्यों निर्भर रहो किसी पर, किसी से प्रोटेक्श्न लेने के लिए निर्भर ना रहो।

- ये कौन-सा खौफ है कि लड़कियां सड़क पर निर्भीक होकर चल नहीं सकती। बेटी को असुरक्षित रखने में हमारी इज्जत बनी रही, ये खौफ का कैसा तमगा है, ये कैसी सोच परिवार व समाज की है। बेटियों को अच्छा व सुरक्षित जीवन जीने का हक है।

इन्होंने एेसे दिया पैगाम
- 10वीं की नाजमा ने 'बोल, बोल के लब आजाद हैं तेरे, बोल जुबां अब तक तेरी है.....पंक्तियां सुनाईं।
- समाजसेवी रुआब पठान ने कहा कि अब निर्भीक बचपन का ये प्रोग्राम अनूठा है, इसके लिए पत्रिका को धन्यवाद।

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