ढालखेड़ा के पिंजरे में कैद हुआ तेंदुआ

Editorial Khandwa

Publish: Dec, 02 2016 02:50:00 (IST)

khargone
ढालखेड़ा के पिंजरे में कैद हुआ तेंदुआ

कई बार छकाया तब जाकर पकड़ में आया, ग्रामीणों में थी दहशत

बालसमुद. कसरावद क्षेत्र में नर्मदा किनारे के गांवों में तेंदुए की हलचल से ग्रामीणों में दशहत बनी हुई थी। करीब दो सालों से ग्रामीणों और वन विभाग अधिकारियों के नाक में दम करने वाले तेंदुआ को पकडऩे में सफलता मिली है। मंगलवार शाम को बालसमुद से करीब एक किमी दूर ग्राम ढालखेड़ा के पास जंगल में तेंदुआ पिंजरे में कैद हुआ। बुधवार सुबह 7 बजे कृषक दादू तंवर खेत की ओर जा रहे थे, जिन्हें पिंजरे में तेंदुआ दिखाई दिया। इसके बाद उन्होंने पुलिस और वन विभाग अधिकारियों को सूचना दी। पिंजरे में कैद होने के बाद तेंदुआ गुस्से में था और उसने बाहर निकलने के लिए कई बार पंजे और नाखूनों से पिंजरे को तोडऩे का प्रयास किया। इसके चलते पिंजरे के निचले हिस्से में लगे लकड़ी के पट्एि टूट गए थे। इंदौर से रेस्क्यू टीम को बुलाया गया, जो साथ में एक अन्य पिंजरा लेकर पहुंची। बाद में तेंदुए को उसमें शिफ्ट कर वन विभाग के अधिकारी अपने साथ लेकर रवाना हुए।

जंगल से गांव में पहुंचा था

जंगल छोड़कर तेंदुआ गांव में जा पहुंचा था, जिसके चलते ग्रामीणों में दहशत का माहौल था। जिसे पकडऩे के लिए वन विभाग द्वारा माकरखेड़ा, बोथू और ढालखेड़ा में पिंजरे लगाए थे। इसके अलावा पांच स्थानों पर नाइट विजन कैमरे से तेंदूए की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। कई बार तेंदुआ वन अमले को चकमा देखकर भागने में सफल रहा। तेंदुए के पिंजरे में कैद होने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में आसपास के गांवों से लोग देखने पहुंचे थे। हालांकि सुरक्षा को देखते हुए वन अमले ने किसी को पिंजरे के पास नहीं जाने दिया।

150 कर्मचारियों ने किया रेस्क्यू
तेंदुए को पकडऩे के लिए वन विभाग के अधिकारियों ने कई दिनों तक जंगलों की खाक छानी। मंगलवार शाम को ढालखेड़ा के पास होने की सूचना मिली थी। कसरावद रेंज के डिप्टी रेंजर प्रदीप पंचोलिया ने बताया कि तेंदुए को पकडऩे के लिए पिंजरे में बकरे का मांस रखा गया था। यह कोशिश रंग लाई और तेंदुआ पिंजरे में कैद हो गया। इसके बाद वन विभाग के करीब 150 कर्मचारियों ने मिलकर रेस्क्यू किया।

तेंदुएं का पूरा कूनबा
क्षेत्र में तेंदुएं के पूरे कुनबे के होने की बात ग्रामीणों द्वारा कही जा रही है। ढालखेड़ा में वनकर्मियों को तेंदुएं का शवक भी दिखाई दिया था। हालांकि अंधेरा होने से यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि वह शवक था या फिर मादा तेंदुआ। वन विभाग ने सालभर पहले बोथू से मादा तेंदुओं को रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर पकड़ा था। इससे यह संभावना जताई जा रही है कि क्षेत्र में ओर भी तेंदुएं हो सकते हैं।

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned