सड़कें साबित हो रहीं यमलोक के द्वार : छह माह में 369 सड़क दुर्घटनाएं, 382 घायल, 111 की मौत

Piyushkant Chaturvedi

Publish: Jul, 18 2017 10:38:00 (IST)

Korba, Chhattisgarh, India
सड़कें साबित हो रहीं यमलोक के द्वार : छह माह में 369 सड़क दुर्घटनाएं, 382 घायल, 111 की मौत

बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।  छोटी चूक जान पर भारी पड़ रही है। सड़क पर प्राण निकल रही है।

कोरबा. बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।  छोटी चूक जान पर भारी पड़ रही है। सड़क पर प्राण निकल रही है।

अब तो अफसर भी मान रहे है कि जिले में सड़क दुर्घटना रोकना उनके बस में नहीं है। यानी लोगों को अपनी जान की रक्षा खुद करनी होगी।

जनवरी से जून तक छह माह की अवधि राहगिरों पर भारी पड़ी है। इस अवधि में अलग अलग रास्तों पर 369 सड़क दुर्घटनाएं हुई है। इसमें 382 लोग जख्मी हुए हैं।

111 लोग मारे गए हैं। माह को दिन में बदलकर आकड़ों का विश्लेषण करें तो इस अवधि में 181 दिन होते हैं। यानी हर दिन में दो सड़क दुर्घटनाएं हुई है। इसमें दो से तीन व्यक्ति घायल हुए हैं।  

हर दूसरे दिन सड़क दुर्घटना में एक राहगीर मारा गया है। उनके खून से सड़कें लाल हुईं हैं। किसी ने पिता ने खोया है तो किसी ने पुत्र। माथे से सिंदूर उजड़ा है।

इतनी सड़क दुर्घटनाएं होने के बावजूद लोग जान की कीमत नहीं समझ पाए हैं। सड़क पर तेजी रफ्तार, डंकन ड्राइव और यातायात नियमों की अनदेखी जान पर भारी पड़ रही है। अब तो सरकारी एजेंसियां भी मान रही हैं कि इस जिले में दुर्घटना रोकना  मुश्किल है।

क्या कहते पीडि़त परिवार- पिछले साल सड़क दुर्घटना में पुत्र को खो चुके 65 साल के बुजुर्ग पिता बुधवार आज भी  उस दिन याद कर सिहर जाते हैं। जब पुत्र के हादसे में मारे जाने की खबर मिली थी।

बुधवार सिंह कहते हैं कि हादसे ने मेरी जिंदगी बदल दी। बुढ़ापे का सहारा छीन लिया। उन्होंने लोगों से कहा कि सड़क पर कभी हड़बड़ी न करें। यह सोचकर गाड़ी चलाएं कि उनके साथ पूरा परिवार जुड़ा है। कुछ होने का असर पूरे परिवार पर पड़ता है।

भारी गाडिय़ां बड़ा कारण- सड़क दुर्घटना का बड़ा कारण सड़क पर चलने वाली भारी गाडिय़ां हैं। उनकी माल परिवहन क्षमता 18 से 30 टन हैं। अब तो परिवहन पुलिस के आलाअधिकारी भी मान रहे हैं कि कोरबा जिले सड़क भारी गाडिय़ों के लायक नहीं हैंं।

20 वाहन ट्रक टेलर और हाइवा- एक अनुमान के अनुसार कोरबा जिले से प्रतिदिन 20 हजार माल वाहक गाडिय़ां चलती हैं। इसमें सबसे अधिक कोयले का परिवहन होता है। ये गाडिय़ां कोरबा- चांपा, कोरबा- कटघोरा, कटघोरा- पाली- बांगो और दीपका- हरदीबजार बलौदा मार्ग पर होती है।

डीएमएफ के फंड का किया जा सकता है उपयोग- सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में हादसे के कारण और रोकने के उपाए पर ढेरों बैठकें हो चुकी है। बैठक में अफसर पर हर निर्र्णय को अमलीजामा पहचाने का वादा कलेक्टर से करते हैं। यहां से लौटकर फंड का रोना होते हैं।

ऐसे में खनिज न्यास के पैसे का उपयोग हादसे रोकने पर किया जा सकता है। संकेतक और अन्य जरूरी कार्य किए जा सकते हैं। अभीतक खनिज न्यास कोई फंड ट्रैफिक दुरुस्थ करने के लिए नहींं मिला है।

सड़क दुर्घटना का कारण
- कोयला परिवहन के लायक सड़कें नहीं
- शराब के नशे में ड्राइविंग
- भारी वाहनों चालकों पर काम का दबाव
- अनाड़ी ड्राइवरों के हाथ गाडिय़ों की स्टीयरिंग
- सड़कों पर संकेतक का अभाव
- हेलमेट की अनदेखी
- गाडिय़ों की बेकाबू रफ्तार
- जांच एजेंसियों का गैर जिम्मेदाराना रवैया

दुर्घटना रोकने की पूरी कोशिश- छह माह में सड़क दुर्घटना में 111 लोगों की मौत हुई है। पुलिस अपनी तरफ से दुर्घटना रोकने की पूरी कोशिश कर रही है। ड्राइवर ट्रैफिक नियम का पालन करें तो हादसे में कमी लाई जा सकती है।
-तारकेश्वर पटेल, एएसपी, कोरबा

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