इस साल जैसे-तैसे हुई खेती, अगले साल पानी मिल पाएगा की नहीं लटक रही तलवार

Piyushkant Chaturvedi

Publish: Nov, 29 2016 03:41:00 (IST)

Korba, Chhattisgarh, India
इस साल जैसे-तैसे हुई खेती, अगले साल पानी मिल पाएगा की नहीं लटक रही तलवार

सिंचाई विभाग द्वारा जिले मेें तीन बड़ी प्रोजेक्ट खारून व्यपवर्तन योजना, कटघोरा व्यपवर्तन योजना व रामपुर जलाशय योजना का निर्माण होना है।

कोरबा. किसानों ने इस बार जैसे-तैसे खेती किसानी कर ली, पर अगले साल सिंचाई परियोजनाओं से पानी मिल पाएगा की नहीं इस पर अब तक संशय की स्थिति बनी हुई है।  हालांकि धीमी गति से चल रहे काम को देखते हुए इसकी उम्मीद कम ही लगाई जा रही है। लगभग छह हजार हेक्टेयर इन परियोजनाओं से सिंचित होना है।
  
सिंचाई विभाग द्वारा जिले मेें तीन बड़ी प्रोजेक्ट खारून व्यपवर्तन योजना, कटघोरा व्यपवर्तन योजना व रामपुर जलाशय योजना का निर्माण होना है। इनमें क्रमश: 1992 हेेक्टयेर, 1991 हेक्टेयर व 2004 हेक्टयेर खेतों की सिचाईं होनी है। सिचांई विभाग द्वारा अपने कार्ययोजना में इन तीन बड़े प्रोजेक्ट को शामिल किया गया था। जलाशय, नहर के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया के बाद अब जाकर काम शुरू हुआ है। तीनों ही प्रोजेक्ट से सिचाईं क्षमता लगभग बराबर है।

तीनों मेें सबसे पहला काम खारून व्यपवर्तन योजना का काम शुरू हुआ। जबकि दो प्रक्रियाधीन है। रामपुर जलाशय की सैद्धाङ्क्षतक स्वीकृति 2008 में ही मिल चुका है। आठ साल बीतने के बाद भी यह कागजों से बढ़कर जमीन हकीकत में लौट नहीं सका है। इन योजनाओं से किसान लंबे समय से पानी की उम्मीद लगाकर बैठे हैं। लेकिन इस साल भी किसानों को पानी ही नहीं मिल सका, और अब आने वाले वर्ष के लिए काम की चाल धीमी है। ऐसे में अगले साल के लिए भी संशय बनी हुई है।

150 करोड़ से अधिक का प्रोजेक्ट

इन तीनों की प्रोजेक्ट में लगभ डेढ़ सौ करोड़ रूपए की लागत आएगी। खारून व कटघोरा व्यपवर्तन योजना क्रमश: 2217.47 व 5607.66 लाख की लागत आएगी। व्यपवर्तन योजना में लंबी नहर से पानी तक खेतों तक पहुंचाना है। तो वहीं रामपुर जलाशय योजना इनमें सबसे बड़ी योजना है। माना जा रहा है कि यह जिले का सबसे बड़ा जलाशय होगा। इसमेें लगभग 85 करोड़ रूपए खर्च आएगा।

203 करोड़ रूपए की योजनाएं अब तक निर्माणाधीन

वर्तमान में जिले में 12 जलाशय की इसकी लागत लगभग 111 करोड़ रूपए व सात व्यपवर्तन योजना इसकी लागत 91 करोड़ रूपए है, कुल 19 लघु सिंचाई योजनाओं  निर्माणाधीन है। इनमें कुछ को इस साल तक पूरा हो जाना चाहिए था। इनमें से खरीफ फसल हेतू 9516 हेक्टेयर एवं रबी फसल के लिए 379 हेक्टेयर खेत सिंचित होंगे। हालांकि विभाग द्वारा अब तक 10  एनीकट व दो स्टॉपडेम का निर्माण पूरा करा लिया गया है। लेकिन इससे उद्योगों को जल आपूर्ति व 239 हेक्टेयर खेतों को पानी दिया जा रहा है। इसके आलावा 67.72 करोड़ के नौ के एनीकट व नौ करोड़ के स्टॉपडेम निर्माणाधीन है।

वन विभाग के क्लीयरेंस अब तक नहीं मिला
जिले में रामपुर जलाशय, भलपहरी योजना, उतरदा जलाशय को सैद्धांतिक स्वीकृति 2008 में ही मिल चुकी है। वर्तमान में रामपुर जलाशय योजना, उतरदा जलाशय की सभी औपचारिकता पूर्ण कर 12 मई को ही मुख्य वन संरक्षक बिलासपुर को भेजा गया है। वन  क्षेत्र में आने के कारण मामला लंबित है। इसी तरह सिमकेदा जलाशय योजना प्रभावित वन क्षेत्र 24.180 हेक्टयेर के लिए प्रभम चरण की स्वीकृति के लिए भी अनुमति के लिए पत्र भेजा गया है। इसकी तरह करूमौहा जलाशय योजना प्रभावित वन क्षेत्र 17.28 हेक्टयेर के क्लीयरेंस के लिए अभी सिर्फ ऑनलाइन एंट्री ही की जा सकी है।

  फैक्ट फाइल

      संचालित परियोजना
           कुल जलाशय    38
    व्यपवर्तन योजना    10
      खरीफ फसल    11799 हेक्टयेर
    रबी फसल        738 हेक्टयेर
    कुल        12537 हेक्टयेर
 
   ये प्रोजेक्ट अब तक पूरे नहीं
     खारून व्यपवर्तन योजना
    कटघोरा व्यपवर्तन योजना
    रामपुर जलाशय योजना
    मानिकपुर जलाशय
    चिताखोल जलाशय
    केहरानाला जलाशय
    चुहिया व्यपवर्तन
    सलिहाभाठा एनीकट
    मुकुंदपुर एनीकट

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