नाके कमजोर, नो एंट्री भी फेल

Piyushkant Chaturvedi

Publish: Oct, 19 2016 11:34:00 (IST)

Korba, Chhattisgarh, India
नाके कमजोर, नो एंट्री भी फेल

टै्रफिक अमले की सक्रियता ऐसी है कि भारी वाहन नो एंट्री में आसानी से प्रवेश कर शहर की यातायात व्यवस्था को ध्वस्त कर रहे हैं।

कोरबा.  टै्रफिक अमले की सक्रियता ऐसी है कि भारी वाहन नो एंट्री में आसानी से प्रवेश कर शहर की यातायात व्यवस्था को ध्वस्त कर रहे हैं।
 ऐसे वाहनों पर नजर पडऩे के बाद भी एंट्री प्वाइंट पर टै्रफिक पुलिस के जवान ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। हालांकि संबंधित अफसरों का दावा यही है कि नो एंट्री टाइम पर एक भी वाहन को शहर में एंट्री करने नहीं दिया जा रहा है

पर शहर में बेरोकटोक प्रवेश कर रहे इन वाहनों को देखकर ही अफसरों के दावों का अंदाजा लगाया जा सकता है।
शहर की यातायात व्यवस्था पटरी पर लाने,दुर्घटनाएं रोकने  के लिए भारी वाहनों की एंट्री पर निर्धारित अवधि में रोक है लेकिन ट्रैफिक पुलिस त्योहारी सीजन में व्यवस्था सुधारने पर कम ध्यान दे रही है।

 हेलमेट की जांच के लिए बढ़ती दुर्घटनाओं का हवाला दिया जा रहा है। लेकिन दुर्घटनाओं कीा सबसे बड़ी वजह भारी वाहन, जिनके प्रवेश पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

 शहर के भीड़-भाड़ वाले इलाकों में ये वाहन आसानी से पहुंच जाते हैं। हैरानी तो तब होती है जब ये वाहन शहर में प्रवेश करते हैं तब वहां बकायदा टै्रफिक पुलिस के जवान तैनात रहते हैं।

 उनके बाजू से ही ये वाहन शहर में एंट्री करते हैं। लेकिन किसी पर कार्रवाई नहीं हो रही है। टै्रफिक प्रभारी एमबी पटेल एक तरफ दावा कर रहे हैं कि नो एंट्री पर एक भी वाहन को एंट्री नहीं करने दिया जा रहा है।
 लेकिन शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों से पार होती या फिर खड़ी वाहनों को देखे तो टै्रफिक प्रभारी के दावे उलट दिखाई पड़ते हैं।

ट्रैक्टरों के लिए कोई नियम-कायदा नहीं
 टै्रक्टरों के लिए शहर में कोई नियम कायदा ही नहीं है। न तो ये भारी वाहन की श्रेणी में आते हैं न ही हल्के वाहनां की श्रेणी में। शहर में प्रतिदिन ढाई सौ टै्रक्टर बेरोकटोक प्रवेश कर जाते हैं।

शहर में कई बार ट्रैक्टरों से बड़ी दुर्घटनाएं घट चुकी है। लेकिन इनके आने जाने के लिए अब तक कोई समय निर्धारित नहीं किया गया है। रेत, ईंट सहित निर्माण सामग्री लाने ले जाने के लिए 24 घंटे ये वाहन भीड़भाड़ वाले इलाके में भर्राटा भरते हैं। अन्य शहरों में टै्रक्टरों को सिटी में प्रवेश नहीं दिया जाता।

सिस्टम ही नहीं बना
सबसे अधिक परेशानी सीएसईबी चौक से बुधवारी चौक के बीच 24 घंटे आवागमन करते भारी वाहन बने हुए हैं। एक तरफ सिटी में भारी वाहनों पर प्रतिबंध है

 तो दूसरी ओर सिटी के बीच से ही ये वाहन गुजरते हैं। इस सड़क से होते हुए ये वाहन मुड़ापार बाइपास होकर सिटी से बाहर निकलते हैं। जबकि ये वाहन सीधे बालको होते हुए रिंगरोड से जा सकते हैं।

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