गायत्री के बाद अब कई और मंत्री, आईएएस, एआईपीएस के मकान होंगे ध्वस्त !

Dikshant Sharma

Publish: Jun, 20 2017 01:54:00 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
गायत्री के बाद अब कई और मंत्री, आईएएस, एआईपीएस के मकान होंगे ध्वस्त !

पूर्व मंत्री शिवाकांत ओझा, मौजूदा कैबिनेट मंत्री सतीश महानाका मकान भी शामिल

लखनऊ। गायत्री प्रजापति के अवैध निर्माण पर कार्यवाही के बाद कई और आईपीएस आईएएस और मंत्रियों की मुश्किलें बढ़ने वाली है। 32 और मकानों को ध्वस्त करने के आदेश दिए गए हैं। इसमें अधिकतर रसूखदारों के ही मकान शामिल हैं। मामला है गोमती नगर में अंबेडकर स्मारक के पीछे बनी वीआईपी कॉलोनी सृजन विहार का। इस कॉलोनी में 32 को ध्वस्त करने के आदेश दिए गए हैं। इन 32 लोगों ने कमिश्नर की अदालत में इस ध्वस्तीकरण के आदेश के खिलाफ अपील की है। इसकी सुनवाई बुधवार को होगी।

इनके है मकान
इसमें पूर्व मंत्री शिवाकांत ओझा, मौजूदा कैबिनेट मंत्री सतीश महाना, गन्ना आयुक्त विपिन द्विवेदी के भाई का मकान के साथ रिटायर्ड आईएएस और पीसीएस अधिकारियों के मकान हैं। ये सभी अवैध तरीके से बने हैं। इसमें खुद के पूर्व सीसी अष्टभुजा प्रसाद तिवारी का मकान भी है। सविता सिंह , बीना जैन , एनके अग्रवाल, जसबीर सिंह बग्गा, डा. एसके आरोरा, शोभाराम वर्मा, शैलेन्द्र कपूर , अविनाश चन्द्र, वसीम , राजेश कुमार त्रिपाठी , सुरेश चन्द्र शर्मा, शशिकान्त मिश्र, पी वर्की जैकब, विनयकुमार निगम, राजीव सिंह, संजीव कपूर, किरन कंचन, एमए फारुकी , देवीकान्त शुक्ल, माधुरी, अर्चना सिंह, अशोक कुमार, मुआल राम, अर्चना सिन्हा, संतोष शर्मा , निशा सचान, पीवी कुरियन, सीता मिश्र, कमल नयन , नीलेन्द्र पाण्डेय  तथा सुरेन्द्र शुक्ला का मकान ढहाया जाएगा।

क्यों है अवैध
इस कालोनी का लेआउट एलडीए से पास नहीं है। एलडीए से लेआउट पास नहीं होने की वजह से कालोनी अवैध की श्रेणी में आ गयी है। अवैध होने की वजह से एलडीए कालोनी में मकानों का नक्शा नहीं पास करता है। लेकिन कालोनी प्राधिकरण के सभी मानकों को पूरा करती है। यही नहीं इस कालोनी में भू-उपयोग के विपरीत भी कोई अवैध निर्माण नहीं है।  4 अप्रैल 2017 को एलडीए के विहित प्राधिकारी और संयुक्त सचिव सीएल मिश्र ने एक साथ इन सभी 32 मकानों को ध्वस्त करने का आदेश जारी कर दिया था। फिलहाल एलडीए ने इन मकानों को ध्वस्त करने की तैयारी शुरू कर दी है।

हालांकि वीआईपी कॉलोनी होने के चलते जानकारों का मानना है कि इसमें कोई बीच का रास्ता निकाला जा सकता है। तस्वीर बुधवार को होने वाली सुनवाई के बाद साफ़ होगी।

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