सूर्य नमस्कार और न्यूटन के सिद्धांत की अनूठी समानता की दिलचस्प स्टोरी

Alok Pandey

Publish: Jun, 20 2017 01:02:00 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
सूर्य नमस्कार और न्यूटन के सिद्धांत की अनूठी समानता की दिलचस्प स्टोरी

सूर्य नमस्कार और न्यूटन के सिद्धांतों में एक दिलचस्प समानता है।  न्यूटन के द्वारा गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत प्रतिपादित करने से पहले भी सेब पेड़ से जमीन पर ही गिरता था और आजतक गिरता है। 

लखनऊ. महान वैज्ञानिक आइजक न्यूटन को गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत और वर्ष 1687 में गति और ताकत के बारे में तीन नियमों के लिए पहचाना जाता है। न्यूटन ने अपनी किताब प्रिंसिपिया में गतिज ऊर्जा के तीनों नियमों की विस्तार से व्याख्या करते समय किसी भी पंक्ति में सूर्य नमस्कार का उदाहरण नहीं दिया है। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत के संदर्भ में भी सूर्य नमस्कार का उल्लेख नहीं किया, लेकिन सूर्य नमस्कार और न्यूटन के सिद्धांतों में एक दिलचस्प समानता है। हैरतअंगेज इस समानता को सामने रखा है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहसरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने। संघ के मुताबिक सूर्य नमस्कार तो प्रकृति का हिस्सा है, इस पद्धति को हिंदू पूर्वजों ने सबसे पहले समझा और दुनिया के सामने रखा, ऐसे में यह नहीं मानना चाहिए कि सूर्य नमस्कार हिंदू संस्कृति का हिस्सा है। 

न्यूटन के सिद्धांत से सूर्य नमस्कार को आरएसएस ने कुछ यूं जोड़ा

आरएसएस के अवध प्रांत में विश्व संवाद केंद्र की पाक्षिक पत्रिका अवध प्रहरी के विमोचन समारोह में आए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहसरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहाकि  न्यूटन के द्वारा गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत प्रतिपादित करने से पहले भी सेब पेड़ से जमीन पर ही गिरता था और आजतक गिरता है। उन्होंने कहाकि न्यूटन ने सेब को ऊपर से नीचे गिरते देखकर गुरुत्वाकर्षण बल के बारे में समझा और दुनिया को बताया कि पेड़ से टूटने के बाद सेब नीचे धरती पर ही क्यों गिरता है, आसमान में क्यों नहीं जाता है। इसी कारण गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत को न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत कहा जाने लगा, जबकि हकीकत यह है कि गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत को धरती का है, जिसे न्यूटन ने सिर्फ सबसे पहले समझा और दुनिया को समझाया। इसी प्रकार सूर्य नमस्कार भी प्रकृति का हिस्सा है। शरीर को निरोगी रहने का सबसे उम्दा तरीका है। इस तरीके को सबसे पहले हिंदू सभ्यता ने समझा और दुनिया के सामने रखा, ऐसे में सूर्य नमस्कार को सिर्फ हिंदू धर्म से जोडक़र देखना ठीक नहीं है।

सूर्य नमस्कार से परहेज करने वाले क्या सूरज से रोशनी नहीं लेते हैं

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहसरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने सूर्य नमस्कार से परहेज करने वालों से सख्त लहजे में सवाल किया कि सूर्य नमस्कार को धर्म विशेष से जोडक़र देखने वाले यह बताएं कि क्या सूर्य की रोशनी से परहेज करते हैं। दिन में घर से बाहर निकलने पर सूर्य की रोशनी से बचने के लिए कोई इंतजाम करते हैं। उन्होंने कहाकि सूर्य से रोशनी और ऊर्जा प्राप्त करने वाला प्रत्येक व्यक्ति सूर्य नमस्कार कर सकता है। संघ नेता दत्तात्रेय होसबोले ने कहाकि योग से निरोगी रहना मुमकिन है। दुनिया ने भारत के योग की ताकत को पहचाना है। ऐसे में साल के एक दिन योग दिवस मनाना तो ठीक है, लेकिन योगासन रोजाना करने की आदत डालनी होगी।

अमेरिका ने गोमूत्र को पेटेंट कराया, भारत में खिल्ली उड़ाते हैं

दत्तात्रेय ने कहाकि अमेरिका ने गोमूत्र की औषधीय ताकत को पहचान लिया है। अमेरिका में गोमूत्र को लेकर तीन पेटेंट हुए हैं, जबकि भारत में गोमूत्र की विशेषता बताने वालों की खिल्ली उड़ाई जाती है। उन्होंने कहाकि आयुर्वेद में दर्ज अच्छी चीजों पर अध्ययन के बाद शोध होने चाहिए, लेकिन भारत में 50 बरस से आयुर्वेद पर शोध लगभग बंद हैं। भारत में आयुर्वेद पढऩे वालों को प्रतिष्ठा नहीं मिलती है, उन्हें दोयम दर्जे का समझा जाता है। 




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