Exclusive बदलेंगे 2007 का वो निर्णय जिससे बंद हो गया गरीबों को मिलना सस्ता और बेहतरीन इलाज!

Lucknow, Uttar Pradesh, India
Exclusive बदलेंगे 2007 का वो निर्णय जिससे बंद हो गया गरीबों को मिलना सस्ता और बेहतरीन इलाज!

प्रदेश का गरीब फिर सस्ता इलाज पाएगा, यूनानी दवा खाना लौटेगा!

लखनऊ। आम आदमी पार्टी एक ओर प्रदेश में निकाय चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी है और दूसरी ओर AAP की आपसी फूट जग जाहिर है। प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव पहले ही पार्टी का दामन छोड़ चुके हैं तो रह रह कर AAP के अपने ही नेता या तो बगावती तेवर अपना लेते हैं या उनके मतभेद खुल कर सामने आजाते हैं। ऐसे में प्रदेश में होने वाले नगर निकाय चुनाव में अपनी छाप छोड़ना AAP के लिए चुनौती पूर्ण होगा।

हालांकि AAP प्रदेश प्रभारी संजय सिंह इस मतभेद को सकारात्मक दृष्टि से देखते हैं। पढ़िए उनसे विशेष बातचीत के कुछ अंश।

क्या AAP के आपसी मतभेद को देखते हुए प्रदेश की जनता आप पर भरोसा कर सकती है ?

देखिये जहां डेमोक्रेसी होगी वहीं मतभेद होंगे वरना वो डिक्टेटरशिप कह लाएगी।  पार्टी का एजेंडा क्लियर है। हम भ्रष्टाचार के खिलाफ थे और आगे भी रहेंगे। जनता ने दिल्ली में भरोसा जताया है और हम उस पर खरे उतरे हैं।

AAP के कई नेताओं पर CBI की नज़र टेढ़ी है, ऐसा क्यों ?

पिछले 70 साल में CBI का सबसे दुरुपयोग भाजपा ने ही किया है। CBI को चौराह का हवलदार बना दिया गया है। व्यापम घोटाला, अडानी पर आरोप, डीडीसीए घोटाला जिसमें अरुण जटेली का नाम है और ऐसे कई केस है जिस पर कोई पैरवी नहीं। उन्हें सिर्फ अरविन्द केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य AAP नेता ही दिखते हैं क्योंकि जनता इनके काम को सरहाती है।

आप जनता के बीच जाते हैं, अब तक क्या मुख्य बिंदु आपकी नज़र में आये हैं ?

नगर निगम और नगर पालिकाओं में घोटाला चरम पर है। बड़ा मुद्दा है हाउस टैक्स और वाटर टैक्स के नाम पर हो रही लूट। हमने दिल्ली में पानी मुफ्त किया है। जीतने पर यहां भी मूलभूत सुविधाओं पर कम से कम टैक्स लगाया जाएगा। बाकी आप राजधानी का ही हाल देख लीजिये। आजादी के लगभग 70 साल बाद भी 70 प्रतिशत सीवर लाइन शहर में नहीं है। इसी के जलते चल निकासी समस्याएं होती हैं।

कोई नया निर्णय या नीति जो आप ला सकते हैं ?

मोहल्ला क्लिनिक के साथ मोहल्ला सभा के विकल्प खुले हैं। इसके अलावा यूनानी दवा खाना एक ऐसी जगह थी जहां गरीबों को सस्ता और अच्छा इलाज मिलता था। पिछली सरकारों ने बड़े उद्योगपतियों के हॉस्पिटल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए उसे भी बंद करा दिया। इन्हे पुनः जीवित करने का प्रयास रहेगा।

सस्ते दामों पर मिलती थी बीमारियों की दवाइयां और साथ ही होता था नालियों में छिड़काव!

आयुर्वेदिक और यूनानी डिस्पेन्सरी में तमाम लाइलाज बीमारियों का जड़ से इलाज होता था। लेकिन 2007 में शासन की ओर से नगर निगम के चिकित्सकों (वैद्य) का पद मृत घोषित कर दिया गया। इसके चलते विभाग द्वारा संचालित डिस्पेन्सरी व्यवस्था खात्में के कगार पर पहुंच गयी है।


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