योगी के घर मोदी के साथ डिनर में न अखिलेश गए न माया, पहुंचे मुलायम

Lucknow, Uttar Pradesh, India
योगी के घर मोदी के साथ डिनर में न अखिलेश गए न माया, पहुंचे मुलायम

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लखनऊ आने पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने आवास पर एक रात्रि भोज का आयोजन किया.

अनिल के अंकुर
लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लखनऊ आने पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने आवास पर एक रात्रि भोज का आयोजन किया। यूं तो यह रात्रि भोज पूरी तौर से राष्ट्रपति पद के चुनाव की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, पर इस डिनर डिप्लोमेसी में पूर्व सीएम अखिलेश यादव और मायावती नहीं पहुंची। सपा के संस्थापक पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव जरूर पीएम मोदी के साथ रात्रिभोज करने गए। 

100 लोगों के साथ पीएम का रात्रि भोज
सीएम योगी के पांच कालिदास मार्ग स्थित आवास पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ रात्रि भोज में विपक्षी नेताओं के रूप में पूर्व मुख्यमंत्रियों को बुलाया गया। करीब आठ बजे से डिनर पार्टी शुरू होगी। इसमें इन नेताओ के अलावा हिन्दू धर्म गुरुओं और मुस्लिम धर्म गुरुओं समेत करीब 100 लोगों को बुलाया गया है। इसमें योगी सरकार के चार दर्जन मंत्री और कुछ विधायक भी शामिल हैं। 

केवल पूर्व सीएम को बुलाया गया इस रात्रि भोज
यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में राजनाथ सिंह, कल्याण सिंह, एनडी तिवारी, मायावती, अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव इस दावत में आना चाहिए था। राजनाथ सिंह केन्द्रीय गृह मंत्री पद पर तैनात हैं और उनका पैर भी टूट गया है इसलिए उनका आना मुश्किल है। कल्याण सिंह राजस्थान के राज्यपाल हैं। एनडी तिवारी बीमार होने के बाद भी इस कार्र्यक्रम में पहुच सकते हैं। पूर्व सीएम बसपा सुप्रीमो मायावती आम तौर पर किसी भोज कार्यक्रम में शामिल नहीं होतीं इसलिए वे आज भी मोदी के साथ डिनर कार्यक्रम में नहीं आईं। अखिलेश और मुलायम सिंह यादव का इस रात्रि भोज में आना पहले से ही तय हो गया था। यही कारण था कि आज शाम के सभी एप्वाइंटमेंट निरस्त कर दिए गए थे, लेकिन ऐन वक्त पर अखिलेश भी इस रात्रि भोज कार्यक्रम में नहीं आए। 

क्यों है ये डिनर महत्वपूर्ण
मोदी के साथ विपक्षियों का डिनर इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अगले महीने राष्ट्रपति का चुनाव होना है। भाजपा ने अपना उम्मीदवार बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविन्द को बनाया है। कोविन्द मूलत: यूपी के रहने वाले हैं और दलित वर्ग से हैं। ऐसे में भाजपा ने जो अपना मास्टर स्ट्रोक खेला है, उसमे किसी प्रकार का अड़ंगा न लगे, यह डिनर इसकी एक कवायद के रूप में देखी जा रही है। ऐसा समझा जा रहा है कि सपा मे भले ही मुलायम सिंह यादव अब कोई पद पर न हो, लेकिन उनकी बात सपा के नेता काट नहीं सकते हैं। मायावती पहले से ही अपना रुख साफ कर चुकी हैं। उन्होंने दलित होने के नाते रामनाथ कोविन्द को समर्थन देने की बात पहले की कह रखी है। 

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