बीजेपी ने अचानक बदली रणनीति, मोदी संग अब सिर्फ ये नेता ही खिलाएंगे कमल

Madhukar Mishra

Publish: Jan, 14 2017 12:53:00 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
बीजेपी ने अचानक बदली रणनीति, मोदी संग अब सिर्फ ये नेता ही खिलाएंगे कमल

मोदीमय भाजपा यूपी के चुनावों में खेलेगी यह चुनावी दांव। बिहार से सबक लेकर अब इन नेताओं को देगी मोदी के मंच पर जगह।

— मधुकर मिश्र


लखनऊ। चुनावी चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए भाजना ने नई र​णनीति तैयार की है। दिल्ली और बिहार चुनाव से सबक लेते हुए भाजपा ने इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ताबड़तोडत्र रैलियां कराने से गुरेज किया है। आलाकमान ने दिल्ली और बिहार चुनाव गल्तियों को न दोहराते हुए अब प्रधानमंत्री मोदी की सीमित रैलियां कराने का निर्णय लिया है। चूंकि यूपी के चुनाव को 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है ऐसे में भाजपा कोई ऐसी चूक नहीं करना चाहती जिससे विरोधी खेमा लाभ उठा ले जाए।


कुछ ऐसे बहेगी मोदी बयार

भले ही भाजपा मोदी के चेहरे को आगे करके चुनावी जंग लड़ रही हो लेकिन उनकी रैलियों को वह सीमित संख्या में करेगी। सूत्रों के अनुसार सात चरणों मे होने वाले चुनाव को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 से 12 रैलियां ही करेंगे। पार्टी ने प्रत्येक चरण में मोदी की कम से कम एक रैली सुनिश्चित करने की कोशिश की है। गौरतलब है कि चुनाव के पहले चरण का मतदान 11 फरवरी को होगा।


स्थानीय नेताओं को मिलेगी तवज्जो


चुनाव प्रचार की रणनीति में सबसे अहम बदलाव करते हुए स्थानीय कार्यकर्ताओं और नेताओं को यूपी के चुनाव में ज्यादा अहमियत दी जा रही है। गौरतलब है कि बिहार और दिल्ली के चुनाव में बाहर से आई भाजपाई टीम का दबदबा था। जिनके चलते स्थानीय कार्यकर्ता और नेता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे थे। इसके बाद चुनाव के जो परिणाम सामने आए उसके लिए स्थानीय नेताओं की नाराजगी को बड़ा कारण माना गया था। गौरतलब है कि दिल्ली चुनाव में मुख्यमंत्री की प्रत्याशी किरण बेदी उस सीट से हार गई थीं, जहां से डा. हर्षवर्धन को हराने के लिए विरोधियों को नाके चने चबाने पड़ते थे।


प्रचार के तौर—तरीके में बड़ा बदलाव

— मोदी की ताबड़तोड़ रैलियां नहीं होंगी।
— दूसरे राज्यों से थोपी गई टीम की बजाय स्थानीय कार्यकर्ताओं पर जताया भरोसा।
— स्थानीय नेताओं को प्रचार—प्रसार में पूरी ताकत झोंक देने का दिया गया आदेश।
— प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंच पर स्थानीय नेताओं को मिलेगी जगह।
— नकारात्मक से ज्यादा सकारात्मक मुद्दों पर केंद्रित होगा चुनाव प्रचार।
— हिंदुत्व नहीं मोदी के विकास पर होगा ज्यादा फोकस। 

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