सीडीआरआई में बजट का संकट, कैसे होगा शोध

Ashish Pandey

Publish: Jun, 19 2017 10:35:00 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
सीडीआरआई में बजट का संकट, कैसे होगा शोध

संस्थान के वैज्ञानिकों की अपील बजट बढ़ाएं पीएम

संतोषी दास
लखनऊ. प्रदेश में डेंगू, दिमागी बुखार जैसी बीमारियों से हर साल हजारों लोग मर रहे हैं। इन बीमारियों से बचाव के लिए कोई कारगर वैक्सीन नहीं हैं। न ही इस तरफ राजधानी लखनऊ स्थित सीएसआईआर लैब और सीडीआरआई कोई खास प्रयास कर रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह संस्थान के पास बजट का ना होना है। धन के अभाव में सीडीआरआई एंटीवायरल बीमारियों का लैब तैयार करने और शोध का काम करने में खुद को अक्षम पा रहे हैं। अब जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सीडीआरआई में मंगलवार को आ रहे हैं तक संस्थान की निदेशक मधु दीक्षित और संस्थान के वैज्ञानिक प्रधानमंत्री से संस्थान के लिए मदद की गुहार करेंगे।

दरअसल, पिछले कई वर्षों से देश में सीएसआईआर की 38 प्रयोगशालाओं में आर्थिक समस्याएं चल रही हैं। उन्हीं में से एक है लखनऊ स्थित सीडीआरआई। सीडीआरआई दवा निर्माण के क्षेत्र में अद्वितीय कार्य कर रहा है। आज़ादी के बाद देश में 20 नई दवा बनी हैं उसमें से 13 दवाएं सीडीआरआई के वैज्ञानिकों ने ही बनाई हंै।

एंटीवायरल बीमारियों पर नहीं हो रहा काम
संस्थान निदेशक मधु दीक्षित ने बताया कि संस्थान में महिलाओं की बीमारियों से संबंधित दवाओं का निर्माण हुआ है। इसमें गर्भ निरोधक दवा सहेली, महिलाओं के जोड़ों के दर्द के लिए बनी दवा रीयूनियन जैसी प्रसिद्ध दवाएं हैं। संस्थान में लाइफ स्टाइल से जुड़ी बीमारियों पर और संक्रमण से संबंधित बीमारियों पर शोध काम चल रहा है। लेकिन, डेंगू, दिमागी बुखार जैसी एंटीवायरल बीमारियों की दवा पर शोध नहीं हो पा रहा है क्योंकि इसके लिए लैब नहीं है। सीएसआईआर ने लैब के बजट में कटौती कर दी थी जिसके बाद से समस्या आ रही है। दवा कंपनियां भी रॉयल्टी सही नहीं देतीं जिसकी वजह से सीडीआरआई आर्थिक रूप से मजबूत नहीं हो पा रही है।

पीएम देखेंगे कैसे बनती है दवा
पीएम मोदी सीडीआरआई की लैब में देखेंगे कि किस तरह वैज्ञानिक दवा बनाते हैं? कैसे क्लीनिकल ट्रायल होता है। निदेशक डॉ दीक्षित ने बताया कि पीएम मोदी 30 मिनट के लिए सीडीआरआई आएंगे। इस दौरान वह एक प्रदर्शनी देखेंगे जिसमें उनको बताया जाएगा कि वैज्ञानिकों ने आज़ादी के बाद कौन-कौन सी दवाएं बनाईं? इसके बाद वह आयुर्वेद गार्डन में चंदन का पौधा रोपेंगे।

सीडीआरआई आने वाले देश के दूसरे प्रधानमंत्री 
सीडीआरआई में 1951 में पं. जवाहरलाल नेहरू आये थे। वह देश के पहले पीएम थे जिन्होंने वैज्ञानिकों के काम को देखा था। तब सीडीआरआई पुरानी बिल्डिंग छतर मंजिल,लखनऊ में था। अब सीडीआरआई जानकीपुरम स्थित नई बिल्डिंग में शि ट हो चुका है तो पीएम मोदी आ रहे हैं। यह नया परिसर 61 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है।

ये है सीडीआरआई की खूबी
-आज़ाद भारत में 20 दवाएं बनीं जिसमें 13 सीडीआरआई ने बनाई
-10,000 शोध पत्र लिखे गए
-500 स्टूडेंट्स को पोस्ट ग्रेजुएट ट्रेनिंग दी गयी
-211 फ़ोर्स पेटेंट
-85 टेक्नोलॉजी का विकास
-4 पद्मश्री स मान 
-7 शांति स्वरूप भटनागर अवार्ड

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