डेंगू-चिकनगुनिया से डरें नहीं, इन आसान तरीकों से करें बचाव!

Ruchi Sharma

Publish: Jul, 07 2017 11:46:00 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
डेंगू-चिकनगुनिया से डरें नहीं, इन आसान तरीकों से करें बचाव!

इन सरल तरीकों से आप बच सकते है डेंगू- चिकनगुनिया जैसी खतरनाक बीमारियों से

लखनऊ. बरसात का समय है एेसे में मच्छरों से बच कर रहना जरूरी है। मच्छरों की जरा से अनदेखी खतरनाक बिमारी का कारण बन सकती है। जैसे डेंगू, चिकनगुनिया व बुखार का कारण बन सकती है। मौसम बदलने के साथ मच्छर ताकतवर एवं हमलावार हो उठते हैं। वहीं डेंगू अौर चिकनगुनिया बीमारी महामारी की तरह फैलता है। जो पहले तो सामान्य बुखार की तरह लगता है मगर इसका प्रभाव शरीर पर बहुत खतरनाक तरीके से होता है। अगर इनका इलाज सही तरीके से नहीं कराया गया तो मौत भी हो सकती है।  चिकनगुनिया में अचानक से आ जाने वाले बुखार के साथ जोड़ों में दर्द महसूस होता है”। इसके अलावा उसे सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, सूखी उबकाई आना, थकान महसूस करना, त्वचा पर लाल रैशिज़ पड़ना जैसी समस्याएं होने लगती हैं। 

केजीएमयू के डॉक्टर विवेक सिंह बताते हैं कि चिकनगुनिया का पता ब्लड टेस्ट और कुछ ज़रूरी चिकित्सा परिक्षाओं से किया जा सकता है, जिसमें सेरोलॉजिकल और विरोलॉजिकल टेस्ट शामिल हैं। 


चिकनगुनिया से बचने के उपाय


डॉ. विवेक कहते हैं कि चिकनगुनिया एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को केवल मच्छरों के काटने से फ़ैल सकता है, इसलिए जहां तक हो सके मच्छरों  के काटने से बचें।

घर में या आस-पास जल-जमाव ना होने दें।

मच्छरदानी का प्रयोग करें, दिन के समय भी।

बाहर जाते समय ओडोमॉस का प्रयोग किया जा सकता है।

ऐसे कपड़े पहनें जो शरीर का अधिक से अधिक भाग ढक सकें।

कुछ दिनों तक बच्चों को बाहर खलने न भेजें।ट

चिकनगुनिया के लक्ष्ण

डॉ. विवेक बताते हैं कि इसके शुरुआती लक्षण डेंगू से मिलते-जुलते हैं और आम तौर पर ये जानलेवा नहीं होता। लेकिन इसकी वजह से होने वाला जॉइंट पेन महीनों तक परेशान कर सकता है। यदि एक बार आपको चिकनगुनिया हो गया तो शरीर इसकी प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेता है। चिकनगुनिया के लक्षण मच्छर के काटने के 3 से सात दिन बाद दिखाई देते हैं।  

अचानक से बुखार हो जाना  (आम तौर पे ये 2-3 दिन में ठीक हो जाता है, लेकिन बाकी सिम्पटम्स कई दिनों तक बने रह सकते हैं)
जोड़ों में बहुत अधिक दर्द होना। कभी-कभी ये दर्द लम्बे समय तक बना रह सकता है।
मांसपेशियों में दर्द।
थकान।
उल्टी।
सर दर्द।
शरीर पर छोटे-छोटे लाल धब्बे ।
नवजात बच्चे और 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए ये बीमारी घातक हो सकती है, साथ ही जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर, डायबीटीज या हृदय रोग है उनके लिए भी चिकनगुनिया खतरनाक हो सकता है।

बुखार में राहत देंगे ये आयुर्वेदिक उपाय

गोमती नगर निवासी आयुर्वेदिक डॉ. एस के भट्ट कहते हैं कि आयुर्वेद में चिकनगुनिया को संधि-ज्‍वर कहा जाता है। इसका शाब्दिक अर्थ होता है 'जोड़ों का बुखार।' स‍ंधि ज्‍वर और चिकनगुनिया के लक्षणों में काफी सामानता देखी जाती है। और इसलिए आयुर्वेदिक इलाज के जरिये इस बीमारी में राहत पायी जा सकती है। 

- आयुर्वेद में रोग की मुख्‍य वजह मानी जाती हैं। वात, कफ और पित्त। अब अगर आयुर्वेदिक नजरिये से देखें, तो चिकनगुनिया को 'वात दोष' कहा जाता है। वात रोग होने के कारण रोगी को ऐसा भोजन अपनाने की सलाह दी जाती है, जो वात बढ़ने से रोके।

-इसमें रोगी को अपने आहार में आवश्‍यक परिवर्तन करने की सलाह दी जाती है। रोगी को आहार में तरल पदार्थों की मात्रा बढ़ाने का परामर्श दिया जाता है। इसके साथ ही उसे कहा जाता है कि वह सब्जियों का सेवन भी अधिक करें। चिकनगुनिया के रोगी को चाहिए कि वह तैलीय भोजन, चाय व कॉफी का सेवन कम करें।
 

- आयुर्वेदिक मसाज को चिकनगुनिया के कारण जोड़ों में होने वाले दर्द में मददगार समझा जाता है। आयुर्वेदिक मसाज में कई औषधियों के अर्क को तेल में मिलाकर उससे रोगी के शरीर की मसाज की जाती है। इससे रोगी को दर्द में तो राहत मिलती ही है साथ ही पहले से अधिक ऊर्जावान महसूस करने लगता है।

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