राहुल बनाम वरुण: मुद्दा एक लेकिन बड़े भाई पर भारी छोटा भाई !

Lucknow, Uttar Pradesh, India
राहुल बनाम वरुण: मुद्दा एक लेकिन बड़े भाई पर भारी छोटा भाई !

यूपी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राहुल गांधी और वरुण गांधी इन दिनों गरीब व किसानों की आवाज उठा रहे हैं लेकिन जनता से जुड़ने का तरीका दोनों का अलग है।

लखनऊ. परिवार एक, मुद्दा एक, पार्टी अलग-अलग। केवल यह पहचान नहीं है गांधी परिवार के दो युवा नेता राहुल गांधी व वरुण गांधी की, बल्कि दोनों का राजनीति करने का ढंग भी अलग है। यूपी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर दोनों इन दिनों गरीब व किसानों की आवाज उठा रहे हैं लेकिन जनता से जुड़ने का तरीका दोनों का अलग है। जानकारों का मानना है कि गरीब व किसान की आवाज उठाने में छोटे भाई (वरुण) राहुल पर भारी पड़ते दिखाई पड़ रहे हैं। वरुण सुल्तानपुर में गरीबों के लिए बनवाए गए मकानों चाबी सौंपकर चर्चा में आ गए हैं। सोशल मीडिया से लेकर कई पत्रकारों के ब्लॉग में उनके पक्ष में तमाम पोस्ट लिखे जा रहे हैं। वह अपनी इस पहल से खूब तारीफ बटोर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ राहुल  को किसान यात्रा करने के बावजूद ऐसी शाबाशी नहीं मिल रही है।



वरिष्ठ पत्रकार कनिका गहलोत ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि राहुल गांधी ने यूपी में किसान यात्रा के दौरान किसानों की तमाम दिक्कतों को उठाया तो दूसरी तरफ वरुण ने न केवल किसानों के कर्ज माफी के मुद्दों को उठाया बल्कि उसका समाधान भी ढूंढ़ निकाला। चंदा इक्ट्ठा कर वरुण ने 3600 से अधिक किसानों का कर्ज मुक्त करवाया। वहीं दूसरी तरफ सुल्तानपुर में गरीबों के लिए अपने पैसों से आवास बनवाए। यह सभी पहेलू वरुण के पक्ष में जा रहे हैं।

पॉलिटिकल साइंस के प्रोफेसर बृजेश मिश्र का कहना है कि राहुल गांधी अपने किसान यात्रा के दौरान किसानों के लिए समाधान ढूंढ़ने के बजाए पीएम मोदी पर अटैक करते दिखे। जबकि जनता हमेशा समाधान ढूंढ़ने वाले व्यक्ति की तरफ ज्यादा आकर्षित होती है। दूसरी तरफ वरुण ने गरीब व किसानों की समस्या सुलझाने के लिए समाधान निकाला है। यही कारण दोनों नेताओं की रणनीति का अंतर बताता है।

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लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कविराज का कहना है कि राहुल गांधी ने किसान यात्रा के जरिए किसानों के बीच अपनी पकड़ तो बनाई लेकिन जनता समाधान चाहती है, जो कि इस यात्रा से नहीं मिलने वाला क्योंकि उनकी पार्टी अभी विपक्ष में है। दूसरी तरफ वरुण सत्ताधारी पार्टी के सांसद है, यह भी उनके बढ़ते प्रभाव का कारण है।

यूपी में सीएम पद के उम्मीदवार का नाम बीजेपी ने फिलहाल घोषित नहीं किया है। ऐसे में वरुण ने गरीबों के लिए घर बनवाकर खुद को लाइमलाइट में ला दिया है। ऐसे में बीजेपी को यह तय करना है कि वह उन्हें यह अहम जिम्मेदारी सौंपेगी या नहीं जोकि फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है।

वरुण गांधी पिछले दिनों राजधानी लखनऊ की संगीत नाट्य एकेडमी में हुए एक कार्यक्रम में आए थे, जहां उन्होंने अपने भाषण के दौरान कई अहम पहेलु उठाए थे। उन्होंने असमानता को सबसे गंभीर समस्या बताया था। उनका कहना था कि अंतिम व्यक्ति तक सुविधाओं का पहुंचना बेहद जरूरी है। उनके भाषण में अब कट्टरता नहीं बल्कि सेक्यूलरिज्म की छाप दिखाई पड़ती है।

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