डॉक्टरों की घसीट राइटिंग : किसी की मौत और जीवन से जुड़ा विषय

Rohit Singh

Publish: Jan, 13 2017 02:20:00 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
डॉक्टरों की घसीट राइटिंग : किसी की मौत और जीवन से जुड़ा विषय

ये समस्या गंभीर नहीं दिखती। इसलिए न डॉक्टर और न ही लोग इस पर ध्यान देते हैं। लेकिन इस समस्या को गहराई से देखने पर पता चलता है कि ये किसी के जीवन और मौत का विषय बन सकती है।

लखनऊ। भारत ही नहीं अन्य देशों में लोग डॉक्टरों की घसीट राइटिंग से परेशान है। अभी बीती 11 जनवरी को बांग्ला देश की एक अदालत ने डॉक्टरों को पढ़ने लायक राइटिंग में पर्ची लिखने के आदेश दिए हैं और सरकार को इस सम्बन्ध में दिशा निर्देश जारी किये हैं। बीती नवम्बर 2014  में केंद्र सरकार की ओर से डॉक्टरों को निर्देश जारी किये गए थे कि मरीज के पर्चे में दवाइयों के नाम कैपिटल लेटर में लिखें। साथ ही राज्य सरकारों ने  इस सम्बन्ध में दिशा-निर्देश भी जारी किया था।  लेकिन इसके बावजूद भी स्थिति जस की तस है। डॉक्टरों की ओर से इसका पालन नहीं किया जा रहा है, जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।

सूबे के मातृ एवं शिशु कल्याण मंत्री रविदास मेहरोत्रा कई बार अस्पतालों के निरीक्षण के दौरान डॉक्टरों से दवाओं को कैपिटल लेटर में लिखने की बात कह चुके हैं लेकिन इसका पालन कम ही हो रहा है। इस बारे में स्वास्थ्य कार्यकर्ता आशुतोष कुमार का कहना है कि सामान्य तौर पर लोगों और डॉक्टरों के लिए ये समस्या गंभीर नहीं दिखती। इसलिए न डॉक्टर और न ही लोग इस पर ध्यान देते हैं। लेकिन इस समस्या को गहराई से देखने पर पता चलता है कि ये किसी के जीवन और मौत का विषय बन सकती है।

नवम्बर 2015 में लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल में डॉक्टर की घसीट राइटिंग से जुड़ा एक मामला सामने आया था। जिसमें फॉर्मसिस्ट ने कैन्ट रोड कैसरबाग़ निवासी आरिफ़ मुकीम को गलत दवाई दे दी थी और दवा खाने से मरीज की हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गयी थी।

इस विषय पर उत्तर प्रदेश फॉर्मेसी कॉउंसिल के सदस्य सुनील यादव का कहना है कि यूपी फॉर्मेसी कॉउंसिल की ओर से मरीजों के हितों का ध्यान रखते हुए सरकार की ओर से दो नियम कड़ाई से लागू करने की मांग हमेशा से की जाती रही है। चिकित्सकों की ओर से उक्त दवा का नाम न लिखकर केमिकल का नाम लिखा जाए , दूसरा मरीजों को लिखी जाने वाली दवाइयां घसीट राइटिंग में लिखने के बजाय कैपिटल लेटर में लिखी जाएं। इससे ये होगा कि मरीजों को सस्ती दवा उपलब्ध हो सकेगी। इसके अलावा कई दवाओं के नाम एक जैसे होते हैं, जिससे दवा काउंटर पर दवा विक्रेता को दवाई समझने में दिक्कत होती है और गलत दवा दे दी जाती है, इससे मरीज को फायदे के बदले नुकसान ही होता है।

बता दें कि केंद्र सरकार ने भारतीय चिकित्सा परिषद नियमन 2002 के नियमों में संशोधन किया था और चिकित्सकों को दवाओं का नाम स्पष्ट और कैपिटल लेटर में लिखने का निर्देश भी दिसम्बर 2014 में जारी कर दिया था। इसके बावजूद डॉक्टरों की ओर से मरीजों को घसीट लिपि में दवाई लिखी जाती है. जिससे फॉर्मासिस्ट को दवा के बारे में सही जानकारी नहीं हो पाती और मरीजों को दवाई फायदे के बजाय नुकसान कर जाती है।

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned