इन 5 वजहों से NDA के राष्ट्रपति उम्मीदवार बने रामनाथ कोबिंद

Lucknow, Uttar Pradesh, India
इन 5 वजहों से NDA के राष्ट्रपति उम्मीदवार बने रामनाथ कोबिंद

एनडीए की ओर से रामनाथ कोबिंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाना चौंकाने वाला फैसला है...

लखनऊ. एनडीए की ओर से रामनाथ कोबिंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाना चौंकाने वाला फैसला है। बीजेपी आलाकमान ने पिछले सभी नामों पर चल रहीं अटकलों को धता बताते हुए बिहार के राज्यपाल को अपना राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने रामनाथ कोबिंद के नाम पर यूं हीं नहीं मुहर लगाई है, बल्कि इसके कई कारण हैं। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, ये हैं  ऐसे 5 बड़े कारण जिनके चलते कोबिंद को उम्मीदवार बनाया गया।

1- जातीय संघर्ष को थामने की कोशिश : रामनाथ कोबिंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने में यूपी की राजनीति भी अहम है। योगी सरकार के बनने के बाद राज्य में जातीय संघर्ष शुरू हो गया है, जो राजपूत बनाम दलितों का है। सहारनपुर की घटना का असर पूरे प्रदेश में दिख रहा है। पूरा राज्य जातीय संघर्ष के मुहाने पर खड़ा है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी ने रामनाथ कोबिंद को सामने लाने की रणनीति अपनाई है।


2- दलितों की भावनाओं पर मरहम लगाने की कोशिश : भारतीय जनता पार्टी कोबिंद की उम्मीदवारी के जरिए दलितों की भावनाओं पर मरहम लगाना चाहती है। इसके अलावा भाजपा की कोशिश उन दलितों को भी साथ लाने की है जिन्होंने पिछले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को वोट किया था। रामनाथ कोबिंद को राष्ट्रपति बनाकर भाजपा दलितों के बीच कह तो सकेगी कि हमने दलित राष्ट्रपति बनाया है। 

3- कोबिंद को विपक्ष भी करेगा समर्थन : मौजूदा समय में एनडीए के पास राष्ट्रपति बनाने लायक बहुमत थोड़ा कम पड़ रहा था, जिसकी वजह से लोग कांटे की टक्कर की उम्मीद लगा रहे थे। लेकिन रामनाथ कोबिंद सामने आने से एनडीए का राष्ट्रपति बनना तय हो गया है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी कोबिंद की उम्मीदवारी पर सरकारात्मक रुख अपनाया है।


4- खासे अनुभवी हैं रामनाथ कोबिंद : रामनाथ कोबिंद के पास बिहार के राज्यपाल के रूप में खासा कामकाजी अनुभव है। उनकी उम्मीदवारी को जदयू के नीतीश कुमार का भी पूरा साथ मिलना तय है। क्योंकि बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोबिंद और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच अच्छी कैमेस्ट्री दिख रही है।

5- मिशन 2019 पर नजर : भाजपा ने लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे पार्टी के दिग्गज नेताओं को दरकिनार कर 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले रामनाथ कोबिंद के रूप में मजबूत चाल चली है। इससे कई फायदे होंगे। पहला राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के दलित प्रत्याशी का न तो मायावती विरोध कर पाएंगी और न ही समाजवादी पार्टी। वामदल भी कोबिंद का विरोध करने से बचेंगे। दूसरा लोकसभा चुनाव से कोबिंद के रूप में भाजपा दलितों के बीच संदेश देना चाहेगी कि भारतीय जनता पार्टी दलित हितैषी पार्टी है।

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