वाह रे LDA! 500 एकड़ ज़मीन का मुआवज़ा तो दे दिया लेकिन कब्ज़ा नहीं लिया

Dikshant Sharma

Publish: Jul, 18 2017 02:37:00 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
वाह रे LDA! 500 एकड़ ज़मीन का मुआवज़ा तो दे दिया लेकिन कब्ज़ा नहीं लिया

अर्जन की कार्रवाई के बाद काश्तकारों को मुआवजा भी बांट दिया लेकिन एलडीए कब्जा लेना भूल गया।

लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अलग अलग योजनाओं में करीब 500 एकड़ भूमि अर्जित की। अर्जन की कार्रवाई के बाद काश्तकारों को मुआवजा भी बांट दिया लेकिन एलडीए कब्जा लेना भूल गया। करीब पंद्रह सालों से अर्जित भूमि पर लोगों ने अनाधिकृत रूप से कब्जा जमा रखा है। एलडीए के अफसरों और इंजीनियरों ने कब्जा लेने की दिलचस्पी ही नहीं दिखायी। अब लैंड आडिट से कब्जे में फंसी करीब पांच सौ एकड़ जमीन मिली है। प्राधिकरण इन जमीनों का संयुक्त सर्वे कराकर कब्जों से मुक्त कराएगा।

लैंड आडिट से योजनाओं में रिक्त पड़े भूखंड तथा फर्जी आवंटनों की परत दर परत खुल कर सामने आ रही है। जीएसआई के जरिए एक-एक भूखंड का सिजरा का आडिट किया जा रहा है। अभी तक की पड़ताल में जो आंकड़े सामने आए हैं वह काफी चौंकाने वाले हैं। एलडीए ने उजरियांव, जुगौली, हुसडिय़ां, वरदान खंड, मकदूमपुर, जानकीपुरम, खरगापुर, जागीर, मुहीउद्दीनपुर, सालेह नगर व हैवतमऊ मवैया समेत अन्य योजनाओं में भूमि अर्जन की कार्रवाई की। करीब 15 साल पहले की इस कार्रवाई में काश्तकारों को प्रतिकर का भुगतान भी किया जा चुका है। प्रतिकर भुगतान करने के बाद एलडीए अर्जित भूमि पर कब्जा लेना भूल गया। इससे बाद में एलडीए की अर्जित जमीनों पर अनाधिकृत रूप से कब्जा जमा लिया है।

नदी, तालाब की जमीन का 10.50 करोड़ प्रतिकर वापस मांगेगा 
कानपुर रोड योजना में एलडीए ने 79.820 हेक्टेअर भूमि नदी व तालाब आदि ग्राम समाज की भूमि भी अर्जित दिखा दी। इस भूमि के बदले प्रतिकर भुगतान के लिए  10 करोड़ 50 लाख 72 हजार रुपए अपर जिलाधिकारी भूमि अध्याप्ति के पास जमा भी कर दिए। बीते कई सालों से किसी को भुगतान न होने पर यह पैसा बेकार पड़ा है। अब लैंड आडिट से सच सामने आने के बाद एलडीए यह पैसा प्रशासन से वापस मांगेेगा। इसी प्रकार कई योजनाओं में भूमि अर्जित ही नहीं की और मुआवजे की राशि प्रशासन के पास जमा कर दी। 

लैंड आडिट रिपोर्ट के मुताबिक जनेश्वर मिश्र पार्क के पास उजरियांव में 2.506 हेक्टेअर भूमि विवादित है। इस जमीन को लेकर सेना से विवाद चल रहा है। प्राधिकरण ने कभी भी इस विवाद को समाप्त करने का प्रयास नहीं किया। जुगौली के पास 0.760 हेक्टेअर भूमि पर स्थानीय लोगों ने कब्जा जमा रखा है। वहीं 10 हेक्टेअर भूमि अनियोजित रूप से बेकार पड़ी है। 

वरदान खंड व रेलवे लाइन के बीच तीन गांवों में 7.936 हेक्टेअर भूमि एलडीए अर्जित की थी। उजरियांव, मकदूमपुर व हुसडिय़ां में भूमि अर्जन के बाद प्राधिकरण यहां कब्जा नहीं ले सका। कब्जा न लेने पर यहां के लोगों ने अवैध तरीके से आवासीय भवन बना लिए। किसी ने छप्पर व चहारदीवारी बनाकर कब्जा कर रखा है। अब एलडीए ने अपनी जमीन पर कब्जा लेने के लिए सर्वे कर कार्ययोजना तैयार करेगा। 

जानकीपुरम योजना में सेकटर 1,4,5,6 व 11 में प्राधिकरण ने 19.864 हेक्टेअर भूमि अर्जित की थी। यहां के खरगापुर, जागीर व मुहीउद्दीनपुर गांव की जमीन अर्जित करने के बाद कब्जा नहीं लिया। अनियोजित तरीके से पड़ी इस जमीन पर लोगों ने भवन बनाकर कब्जा जमा लिया है। 

कानपुर रोड विस्तार योजना में सालेह नगर, हैवत मऊ मवैया व किला मोहम्मदी नगर में 80 हेक्टेअर भूमि अर्जित की है। योजना 4 व 7 में अर्जित की गई भूमि अनियोजित है। एलडीए को लैंड आडिट में अपनी काफी जमीन मिली है। प्राधिकरण ने एक निजी एजेन्सी को लैण्ड आडिट की जिम्मेदारी दी थी। जिसने एलडीए की काफी जमीनों को खोज निकाला है। एजेंसी ने एलडीए की जमीनों का पूरा डेटाबेस तैयार किया है। इनमें से कुछ जमीनें खाली तो कुछ पर कब्जे पाए गए हैं।

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