क्लीन पॉलिटिक्स के लिए लोकतंत्र मुक्ति आंदोलन ने की चुनाव आयोग से ये मांगें

Rohit Singh

Publish: Jan, 13 2017 07:16:00 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
क्लीन पॉलिटिक्स के लिए लोकतंत्र मुक्ति आंदोलन ने की चुनाव आयोग से ये मांगें

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को अंतिम प्रार्थना के रूप में ज्ञापन सौप दिया गया और कहा गया कि यदि 18 जनवरी तक मांगे न मानी गईं तो आन्दोलन तेज होगा

लखनऊ। लोकतंत्र मुक्ति आन्दोलन के सतत संघर्ष से ईवीएम वोटिंग मशीन पर प्रत्याशियों की फोटो तो लगने का आदेश हो गया लेकिन प्रत्याशियों की लगने वाली फोटो रंगीन लगाए जाने की मांग पर चुनाव आयोग की ओर से कोई निर्देश अभी तक जारी नहीं किया गया। जिसको लेकर लोकतंत्र मुक्ति आंदोलन के संयोजक प्रताप चंद्रा सहित आजाद भारत के कार्यकर्ताओं ने राज्य चुनाव आयोग के कार्यालय जाकर अपनी मांगें गिनाई और प्रार्थनापत्र सौंपा। इसके अलावा लोक तंत्र मुक्ति आंदोलन की ओर से फ्री एंड फेयर इलेक्शन के सिद्धांत पर चुनाव आयोग बसपा के चुनाव-चिन्ह हाथी की मूर्तियों को शहर और पार्कों में तत्काल ढकने की मांग की।

इसके अलावा मीडिया डिबेट में बैठकर राजनीतिक पार्टियों के प्रवक्ता बैकड्राप लगाकर लगातार पार्टियों के चुनाव चिन्ह का प्रचार करने वाले तरीके पर रोक लगाने की मांग की। इस बारे में लोकतंत्र मुक्ति आंदोलन के संयोजक प्रताप चंद्रा ने कहा कि अगर 18 जनवरी तक उनकी ओर से की गयी मांगें नहीं मानी गयी तो आंदोलन तेज किया जाएगा।

प्रताप चंद्रा ने कहा कि 15 जनवरी को मायावती का जन्मदिन है। हाथी की मूर्तियां बनवाने वाली मायावती के समर्थकों की ओर से मूर्तियों को लेकर प्रोपोगेन्डा का लाभ उठाया जाता रहा है। जिससे प्रत्याशियों को बढ़त मिलेगी जो निष्पक्ष नहीं है।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को अंतिम प्रार्थना के रूप में ज्ञापन सौप दिया गया और कहा गया कि यदि 18 जनवरी तक मांगे न मानी गईं तो आन्दोलन तेज होगा जिसकी जिम्मेदारी चुनाव आयोग की होगी। आयोग जैसी संस्था पर भेदभाव का प्रश्न खड़ा होना न सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण होगा बल्कि अफसोसजनक भी होगा।

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