46 साल बाद खुलेगा लखनऊ यूनिवर्सिटी का नौकायन क्लब, बाढ़ के कारण हुआ था बंद

Prashant Srivastava

Publish: Jun, 19 2017 06:11:00 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
46 साल बाद खुलेगा लखनऊ यूनिवर्सिटी का नौकायन क्लब, बाढ़ के कारण हुआ था बंद

लखनऊ यूनिवर्सिटी का नौकायन क्लब लगभग 46 साल बाद दोबारा शुरू होगा।  बाढ़ के कारण ये क्लब 46 साल बंद हो गया था।

लखनऊ. लखनऊ यूनिवर्सिटी का नौकायन क्लब लगभग 46 साल बाद दोबारा शुरू होगा।  बाढ़ के कारण ये क्लब 46 साल बंद हो गया था। भारत के पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा भी इसके सदस्य व अध्यक्ष रह चुके हैं। लखनऊ यूनिवर्सिटी एथलेटिक्स एसोसिएशन के महासचिव आरबी सिंह के मुताबिक नौकायान क्लब एलयू की पहचान रहा है।

लखनऊ यूनिवर्सिटी एथलेटिक्स एसोसिएशन के महासचिव आरबी सिंह का कहना है कि नौकायन क्लब के जरिए एलयू का खेलों के प्रति समर्पण दिखता था। अब इसे दोबारा शुरू किया जाएगा। छत्तर मंजिल के सामने दो नाव से इसकी शुरुआत होगी। ये दो नाव नौकायान क्लब की होंगी।

नौकायन फेडरेशन के उपाध्यक्ष प्रो. आईडी शर्मा के मुताबिक एक दौर में एलयू के नौकायन क्लब में दो सौ से अधिक मेंबर थे। इसमें लखनऊ यूनिवर्सिटी और किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज के छात्र शामिल थे। 1960 में बाढ़ के कारण यह क्लब पहली बार तबाह हुआ था। उस वक्त कुछ प्रोफेसर्स की मदद से इसे दोबारा शुरू किया गया लेकिन साल 1971 में दोबारा आई बाढ़ के कारण यह क्लब इतिहास बनकर रह गया। इसे बचाने की कोशिशें की गईं लेकिन सफल नहीं हो पाईं।

नौकायन क्लब का इतिहास

- साल 1925 में नौकायन क्लब की शुरुआत छत्तर मंजिल में 30 हजार स्कॉयर फिट के एरिया में हुई थी।

- साल 1927 में नौकायन क्लब को ब्रिटिशर्स यूनाइटेड सर्विसेज क्लब ने सभी नाव दी थीं।

- साल 1941 में इसका नाम बदलकर स्वीमिंग व नौकायन क्लब पड़ा

- साल 1946 क्लब की ओर से इंटर यूनिवर्सिटी कॉम्पिटिशन आयोजित किए गए

- साल 1960- बाढ़ के कारण कुछ दिनों के लिए क्लब बंद हुआ

-साल 1971 -बाढ़ के कारण क्लब बंद कर दिया गया

लखनऊ यूनिवर्सिटी एथलेटिक्स एसोसिएशन के महासचिव आरबी सिंह के मुताबिक उस दौर में क्लब के पास कोई कोच नहीं था लेकिन फिर भी बाहर के कई लोग खिलाड़ियों की मदद करते थे।  उनके मुताबिक जल्द ही वूशू और सर्किल स्टाइल कुश्ती भी एलयू में खेली जाएगी।

सर्किल स्टाइल कबड्डी को पंजाब स्टाइल भी कहा जाता है। इसमें मैदान में दोनों टीम की तरफ से केवल 4 स्टॉपर ही प्लेंइंग जोन में रहते है।  जबकि 6 रेडर मैदान के बाहर रहते हैं। जब रेडर दूसरी टीम के पाले में रेड करने जाता है तो विपक्षी टीम का एक ही स्टॉपर को पकड़ता है, यदि दो स्टॉपर ने रेडर को पकड़ने की कोशिश की तो प्वाइंट दूसरी टीम के पाले में चला जाता है। इसके साथ ही डिफेंसिव टीम गोलकार मैदान के एक ही हिस्से में जा सकती है।

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned