राष्ट्रपति चुनाव चुनाव के बाद माया अखिलेश की दोस्ती का असली इम्तिहान 

Anil Ankur

Publish: Jul, 17 2017 01:11:00 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
राष्ट्रपति चुनाव चुनाव के बाद माया अखिलेश की दोस्ती का असली इम्तिहान 

विपक्ष में दिखा विपक्ष बिखराव


अनिल के अंकुर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सोमवार को राष्ट्रपति पद के लिए मतदान शुरू हुआ। मतदान के दौरान जहां सत्ता पक्ष भाजपा उत्साही दिखा वहीं विपक्ष में बिखराव साफ नजर आ रहा था। इस बिखराव के परिणाम अगले कुछ महीने बाद होने वाले राज्यसभा चुनाव में दिखेंगे। क्या सपा बसपा राज्यसभा में  इसी तरह एक जुट रह पाएगी। तो क्या अखिलेश अपने विधायकों को क्रास वोटिंग से फिर बचा पाएंगे। राष्ट्रपति चुनाव के मतदान ने इन तमाम सवालों को जन्म दे दिया है। अब देखना है कि आगे ऊंट किस करवट बैठेगा।

विधानसभा में मात खाने के बाद कांग्रेस, सपा बसपा के पास विपक्ष को घेरने का यह अहम मौका था। सपा बसपा और कांग्रेस  में विपक्ष एकता के नाम पर घनिष्टता जरूर दिखी पर अखिलेश यादव अपनी ही पार्टी के वोटों को नहीं सभाल पाए। सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव से लेकर शिवपाल सिंह यादव ने विपक्षी एकता को धता बताते हुए वोट डाले। 

हम बताते चलें कि यूपी में किसके पास कितने वोट हैं। यूपी में भाजपा के पास 325 विधायकों की ताकत है और 73 लोकसभा सदस्य हैं। कांग्रेस के पास 7 विधायक हैं दो सांसद हैं, बसपा 18 विधायकों की ताकत है जबकि सपा के पास 47 विधायकों के वोट हैं और पांच लोकसभा सदस्य हैं।  इसके अलावा राज्यसभा सदस्यों में यूपी में बसपा और सपा सबसे ज्यादा मजबूत स्थिति में है। 

मौजूदा विधायकों और सांसदों की संख्या को देखते हुए भाजपा उम्मीदवार राम नाथ कोविंद बेहद मजबूत स्थिति में दिख रहे हैं, वहीं यूपीए उम्मीदवार मीरा कुमार की स्थिति उतनी अच्छी नहीं है। लेकिन यह चुनाव यहीं पर अपना असर नहीं छोड़ रहा है। अगले कुछ महीने बाद यूपी में राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं। 

सपा के विधायकों की संख्या 47 है तो बसपा के विधायकों की संख्या सिर्फ 18 है। कांग्रेस के छह विधायक हैं। राज्यसभा में जाने के लिए कम से कम 37 विधायकों के वोट हासिल होना चाहिए।  इस तरह दो सदस्यों के चुनने के लिए 74 वोटों की जरूरत होगी। अगर कांग्रेस सपा और बसपा के वोट मिला दिए जाएं तो भी वोटों की संख्या पूरी नहीं हो रही है। यह मान लिया जाए कि अगर निर्दल विधायकों के वोट मिल गए तो क्या अखिलेश केवल एक सीट लेकर दूसरी सीट मायावती को दे देंगे। क्या गारंटी है कि राज्यसभा चुनाव में शिवपाल और मुलायम गुट के विधायक क्रास वोटिंग नहीं करेंगे।

इस तरह राष्ट्रपति का चुनाव भले ही सीधा और सिम्पल सा दिखता हो, लेकिन इसके दूरगामी परिणाम दिखेंगे। राज्य सभा चुनाव माया और अखिलेश का नया इम्तिहान होगा। अब देखना है कि दोस्ती के इस इक्जाम में कौन जीतेगा और कौन हारेगा।

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