राममंदिर विवाद को सुलझाने के लिए बात करने को तैयार मुख्य मुद्दई, लेकिन

Alok Pandey

Publish: Mar, 21 2017 02:44:00 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
राममंदिर विवाद को सुलझाने के लिए बात करने को तैयार मुख्य मुद्दई, लेकिन

आपस में बातचीत से मामला सुलझाने के प्रस्ताव का दोनों पक्षों ने स्वागत तो किया, लेकिन एक-दूसरे पर सहयोग नहीं करने का आरोप भी लगाया है। 


अनूप कुमार 

अयोध्या . रामलला की जन्मभूमि के झगड़े को कोर्ट-कचेहरी के बाहर आपस में बातचीत से सुलझाने का सुझाव अच्छा तो है, लेकिन यह मुमकिन होना मुश्किल है। वजह यह कि विवाद से संबंधित दोनों पक्षों को एक-दूसरे की नीयत पर भरोसा नहीं है। दोनों पक्षों का कहना है कि कोशिश तो तमाम मर्तबा हुई, लेकिन दूसरा पक्ष टांग अड़ाने से बाज नहीं आता है। दोनों पक्षों से बातचीत हुई तो निचोड़ यह निकला कि सुप्रीमकोर्ट का सुझाव बेहतर है, एक बार फिर कोशिश करेंगे, लेकिन रास्ता निकालना मुश्किल है। 

दरअसल, अयोध्या के विवादित स्थल के झगड़े पर सुप्रीमकोर्ट में दाखिल भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने दोनों पक्षों को सुझाव दिया है कि यह आस्था का विषय है, बेहद संवेदनशील मामला है, ऐसे में अगर दोनों पक्ष आपस में समझौते के आधार पर मामले का हल निकालें तो बेहतर होगा। जस्टिस खेहर ने कहाकि यदि आवश्यकता पड़ी तो कोर्ट से बाहर भी सुप्रीमकोर्ट के जज इस मामले में मध्यस्थता कर सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी। बहरहाल, पढि़ए इस सुझाव पर विवाद से जुड़े पक्षकारों का क्या कहना है।

सुझाव का स्वागत है, प्रयास जरूर करेंगे : महंत रामदास 

श्री रामलला मंदिर मामले के पक्षकार और निर्मोही अखाड़े के उत्तराधिकारी महंत रामदास कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट का सुझाव बेहतर है। मामले का हल आपसी समझौते के आधार पर होता है तो इससे अच्छा क्या होगा? उन्होंने कहाकि अयोध्या में भगवान राम का जन्म हुआ था, बाबर तो बाहरी हमलावर था। इसके अलावा उक्त स्थान पर कभी भी-किसी मुस्लिम ने नमाज नहीं पढ़ी है, इसलिए हम तो यह अपील करेंगे कि मुस्लिम समाज के लोग अपना दावा वापस लेकर सौहाद्रर्् की मिसाल कायम करें। 


पहले भी हुई सुलह समझौते की कोशिश, लेकिन मुस्लिम पक्ष ने नहीं दिया साथ : त्रिलोकी नाथ पांडे 

श्री रामलला जन्मभूमि मामले के एक अन्य पक्षकार त्रिलोकीनाथ पाण्डेय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह प्रयास स्वागत योग्य है और बातचीत के लिए प्रयास करेंगे, लेकिन आशंका के तमाम बादल हैं। उन्होंने कहाकि पहले भी सुलह समझौते के जरिए मामले को हल करने का प्रयास हुआ है, लेकिन ऐन वक्त पर मुस्लिम पक्ष से लोग पीछे हट जाते हैं। ऐसे में बेहतर होगा कि समझौते के लिए स्वयं सुप्रीम कोर्ट दूसरे पक्ष को आमंत्रित करे। 


हम तैयार, लेकिन सुप्रीम कोर्ट खुद क्यूँ नही देता कोई फैसला : हाजी महबूब 

बाबरी मस्जिद के पैरोकार हाजी महबूब ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सिर-आँख पर है। हम पहले से चाहते हैं कि मामले का हल हो जाए। अयोध्या के  हिन्दू-मुसलमान कभी विवाद में उलझना नहीं चाहते है। अलबत्ता अदालत सक्षम है तो खुद फैसला क्यूँ नही करती। बावजूद कोर्ट चाहती है तो कोर्ट से बाहर बैठकर संतों-महंतो से बातचीत करेंगे। हाजी ने कहाकि बात भले करें, लेकिन मुकदमा नही वापस लेंगे। मुकदमा तो लड़ते ही रहेंगे और इस मामले में वक्फ बोर्ड के साथ बैठक करेंगे। वक्फ चाहेगा तो उलेमा और संत समाज बैठकर एक बड़े विवाद का हल खोज लेंगे। 

विहिप अड़ंगा लगाती है, बातचीत को तैयार हैं : इकबाल अंसारी  

बाबरी मस्जिद केस के मरहूम हाशिम अंसारी के बेटे इकबाल अंसारी ने कहा कि हम लोग तो यह चाहते हैं कि आपसी समझौते से हल हो जाए। महंत ज्ञान दास और मेरे पिता आपस में समझौते के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे, लेकिन विहिप ने हमेशा अडंगा डाल दिया जिसके कारण मामला हल नही हो सका है। इकबाल ने कहाकि कोर्ट के सुझाव का स्वागत करते हैं, इसके लिए बैठक कर अपने लोगों से राय लेंगे और साधु-संत भी इसके लिए आगे आयें।

कोई फायदा नहीं होगा, कानून बनाना ही होगा : विहिप

सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर विश्व हिंदू परिषद का कहना है कि सुलह-समझौते की बात पहले भी कई बार हो चुकी है, लेकिन दूसरा पक्ष हमेशा से पीछे हटता रहा है, इसलिए इस विवाद का एकमात्र हल संसद में कानून बनाकर मंदिर निर्माण ही है,  इसके अतिरिक्त कोई दूसरा रास्ता नहीं है। विश्व हिन्दू परिषद् के अवध प्रांत के प्रवक्ता शरद शर्मा कहते हैं कि सन् 1949 से यह मुकदमा चल रहा है और आज तक भगवान श्री रामलला टाट पट्टी के टेंट  में विराजमान हैं, यह देश का दुर्भाग्य है कि भगवान राम भव्य मंदिर में विराजमान नहीं हो सके। उन्होंने कहाकि इस विवाद का हल सिर्फ संसद में कानून बनाना ही एकमात्र रास्ता है। सुप्रीम कोर्ट ने आपसी समझौते की बात कही है हम इसका स्वागत करते हैं लेकिन सवाल यही है कि बातचीत पहले भी हुई है, लेकिन बातचीत का कोई हल नहीं निकला है।

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