स्मार्ट सिटी के सामने सबसे बड़ी चुनैती, सरकारी विभागों में ताल मेल न होना

Dikshant Sharma

Publish: Nov, 30 2016 06:05:00 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
स्मार्ट सिटी के सामने सबसे बड़ी चुनैती, सरकारी विभागों में ताल मेल न होना

शहर स्मार्ट तब बनता है जब वह इको फ्रेंडली और कंप्यूटर स्मार्ट हो

लखनऊ। स्मार्ट सिटी की ओर अग्रसर लखनऊ में आयोजित स्मार्ट सिटी समिट में राज्य और केंद्र सरकार के एक्सपर्ट्स ने स्मार्ट सिटी के सामने चुनौतियों पर मंथन किया। समिट में लखनऊ स्मार्ट सिटी प्रतिनिधि और अपर नगर आयुक्त पी के श्रीवास्तव ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती स्मार्ट सिटी बनाने में आती है जब सरकारी विभागों में ताल मेल नहीं होता। इसी के कारण एक विभाग जब सड़क बनाता है तो डेवलपमेंट के नाम पर ही दूसरा उसे खोद देता है। साथ ही उन्होंने कहा कि हर राज्य में कैपिटल सिटी की ओर पलायन सबसे अधिक होता है। क्योंकि राजधानी में बीते तीन साल से निर्माण गतिविधिया तेज हुई है और गरीब तबके के लोगों का सबसे अधिक पलायन हुआ है। ऐसे में न इन्हें कोई ठोस छत नही मिल पाती और न ही शौचालय जैसी सुविधाएं। इसी लिए लखनऊ स्मार्ट सिटी में इन मुख्य और ज़रूरी बिंदुओं पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। सीवेज ट्रीटमेंट के लिए शहर भर के सभी सीवर लाइन को एशिया के सबसे बड़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों में से एक भावरा एसटीपी से जोड़ा जा रहा है। इसी के साथ जाम से जूझ रही राजधानी के लिए ज़रूरी है कि वह पब्लिक ट्रांसपोर्ट की ओर निर्भरता बढे। इसी के मद्देनज़र स्मार्ट बस शेल्टर बनाए जा रहे है और मेट्रो के निर्माण के बाद पब्लिक बसों का रुट प्रवर्तन भी किया जाएगा। भविष्य में पार्किंग के लिए एप, हॉस्पिटैलिटी और स्पेसलिस्ट डॉक्टरों की लिस्ट का भी विकल्प खुला है।

इनोवेशन एंड नॉलेज मैनेजमेंट के डायरेक्टर डॉ अरविन्द वार्ष्णेय ने कहा कि उनका नाता स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट से लगभग 20 साल पुराना है। ऑस्ट्रेलिया और चीन के कई शहरों को स्मार्ट बनाने के प्रोजेक्ट में वह शामिल रहे है। उनका कहना है कि LESS (लेस्स ) फार्मूला पर आधारित लोकल एरिया में डिकॉटन और ज़रूरतों और उनके विकल्प पर ध्यान दिया जाता है। इसके बाद इनके न होने पर और डेवलपमेंट के बाद की स्तिथि का आंकलन होता है। कोई शहर स्मार्ट तब बनता है जब वह इको फ्रेंडली और कंप्यूटर स्मार्ट हो। आज सब चाहते हैं कि उनको सभी जरूरी जानकारियां एक क्लिक पर मिलें। साथ ही ये भी सही है कि सभी विभागों के एक साथ हुए बिना शहर को स्मार्ट बनाना संभव नहीं है।

बताते चलें कि लखनऊ स्मार्ट सिटी के मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग साइन होने के दौरान के देखा गया था कि प्रदेश के अधिकतर सरकारी विभाग कछुए की चाल चल रहे थे। स्मार्ट सिटी समिट में ओडिसा के ट्रांसपोर्ट कमिश्नर डॉ सीएस कुमार,लखनऊ ट्रांसपोर्ट कमिश्नर रविन्द्र नाइक और विशाखा पटनम के हिमांशु चंद्र शामिल रहे।

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