निर्दलीय बन गये 'दलीय', राजा भैया का जलवा रहा कायम

Rohit Singh

Publish: Jan, 13 2017 01:41:00 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
निर्दलीय बन गये 'दलीय', राजा भैया का जलवा रहा कायम

तमाम निर्दलीय विधायक चुनाव लड़े, जीते भी। लेकिन बाद में उन्होंने किसी न किसी राजनीतिक पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ना पसंद किया।

लखनऊ। एक वक्त था जब अपने चेहरे और शख्सियत के दम पर विधानसभा में 74 विधायक निदर्लीय हुआ करते थे लेकिन अब जनता किसी राजनीतिक पार्टी से लड़ रहे प्रत्याशी को ही अपना मत देना पसंद करती है। राजा भैया 1993 से अब तक लगातार निर्दलीय विधायक बनते आ रहे हैं लेकिन इसके अलावा तमाम निर्दलीय विधायक चुनाव लड़े, जीते भी। लेकिन बाद में उन्होंने किसी न किसी राजनीतिक पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ना पसंद किया।

साल 2007 विधानसभा चुनाव में 9 निर्दलीय विधायक
साल 2012 में प्रतापगढ़ के कुंडा से राजा भैया और सोनभद्र की दुद्वी विधानसभा से रूबी प्रसाद ही निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में विधानसभा पहुँच पायी।  वही साल 2007 के विधानसभा चुनाव में कुल 2582 निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे थे। जिनमें से केवल 9 लोग चुनाव जीते थे। जिसमें रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, अखिलेश सिंह, इमरान मसूद, अजय राय, राम प्रकाश यादव, विनोद कुमार, अशोक यादव, यशपाल सिंह रावत और मुख्तार अंसारी ने जीत दर्ज की थी।

साल 2007 के विधानसभा चुनाव में जीते इन 9 विधायकों ने 2012 के विधानसभा चुनाव में किसी न किसी दल का दामन थाम लिया। बस राजा भैया और रूबी प्रसाद निदर्लीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लाडे और जीत दर्ज की।

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों की कामयाबी के लिहाज से 1957,1962, 1967, 1985 और 1989 के चुनाव काफी अहम रहे। इन चुनावों में क्रमश: 74, 31, 37, 30 और 40 निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी। जानकारों का कहना है कि 1989 के बाद राजनीतिक दलों के प्रति जनता की प्रतिबद्धता बढ़ी, जिस कारण निर्दलीयों के लिए विधानसभा पहुंचना मुश्किल होने लगा।

1993 से लगातार हैं निर्दलीय विधायक

राजा भैया वर्तमान में प्रतापगढ़ की कुंडा विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक हैं। वह 1993 से अब तक लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं। साल 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने एक लाख से ज्यादा वोटों से विपक्षी को हराया था। वह 1993 में 12 वीं विधानसभा में पहली बार विधायक और 13 वीं विधानसभा 1996 में दूसरी बार विधायक चुने गये।

वह 1997 में कल्याण सिंह मंत्रिमंडल में मंत्री, 1999 में राम प्रकाश मंत्रिमंडल में मंत्री रहे। साल 2002 में 14 वीं विधानसभा में वह फिर विधायक चुने गए। 2004 में मुलायम सिंह मंत्रिमण्डल में खाद्य एवं रसद विभाग में मंत्री रहे। 2007 के विधानसभा चुनाव में एक बार वह विधायक चुने गए। इस बीच मायावती सरकार के दौरान उन पर तमाम मुकदमे हुए और उन्हें जेल भी जाना पड़ा। साल 2012 चुनाव में फिर से वह विधायक बने और अखिलेश यादव मंत्रिमण्डल में मंत्री बनाये गए।

2007 में जीते निर्दलीय चुनाव

रायबरेली सदर से दबंग विधायक अखिलेश सिंह वर्तमान में पीस पार्टी से विधायक हैं लेकिन इससे पहले 2007 विधानसभा चुनाव में वह निर्दलीय विधायक चुने गए। वह 1993 से अब तक लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं। 1993 में अखिलेश सिंह कांग्रेस से 12 वीं विधानसभा में पहली बार विधायक चुने गए। इसके बाद वह 1996 में दूसरी बार और 2002 में वह तीसरी बार कांग्रेस से विधायक चुने गए। अपनी आपराधिक छवि के कारण साल 2003 में कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसके बाद अखिलेश सिंह ने कांग्रेस और गांधी परिवार के खिलाफ जमकर जहर उगला था। कांग्रेस से बाहर का रास्ता दिखाए जाने के बाद जनता में अपनी मजबूत पकड़ के चलते 2007 के विधानसभा चुनाव में वह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चौथी बार रायबरेली सदर से विधायक चुने गए। इसके बाद साल 2012 के विधानसभा चुनाव में वह पांचवीं बार फिर से विधायक चुने गए। इस चुनाव में वह पीस पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर खड़े हुए लेकिन बाद में उन्होंने पीस पार्टी को छोड़ दिया। बीते सितंबर 2016 में अखिलेश सिंह की बेटी अदिति सिंह ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली।करीब 13 साल बाद बेटी के रूप में अखिलेश सिंह की वापसी कांग्रेस में हुई है।

1985 में बने थे निर्दलीय विधायक
अम्बेडकरनगर की जलालपुर विधानसभा क्षेत्र से वर्तमान में विधायक शेर बहादुर समाजवादी पार्टी के विधायक हैं। लेकिन इनकी राजनीतिक यात्रा लगभग सभी पार्टियों से गुजरी है। इसी सीट पर 1980 में कांग्रेस, 1985 में निर्दलीय, 1996 में भाजपा और 2007 में बसपा से विधायक रह चुके हैं। बताया जाता है कि 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए अब उनकी आस्‍था कमल के फूल के साथ जुड़ गई है।

2002 में थे निर्दलीय विधायक

मुख्तार अंसारी वर्तमान में मऊ से कौमी एकता दल से विधायक हैं। वह बसपा से 1996 में चुनाव लड़े और विधायक चुने गए। वर्ष 2007 और 2002 में वह निर्दलीय विधायक चुने गए। 2017 के चुनाव के लिए वह मुलायम सिंह यानी साइकिल के साथ हैं।

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