पुखरायां और भोगनीपुर से बहुत कुछ सीखा राम नाथ कोविन्द ने

Anil Ankur

Publish: Jun, 19 2017 07:26:00 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
पुखरायां और भोगनीपुर से बहुत कुछ सीखा राम नाथ कोविन्द ने

लखनऊ। भाजपा के उम्मीदवार के रूप में रामनाथ कोविन्द ने पुखरायां-भोगनीपुर से बहुत कुछ सीखा है। यहां की सीख उन्हें इस मुकाम तक ले गई। वे अक्सर अपनी बातों में इसका जिक्र करते हैं।

राम नाथ कोविन्द का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात की तहसील डेरापुर के एक छोटे से गांव परौंख में हुआ था। कोविन्द का सम्बन्ध कोरी जाति से है जो उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति में आता है। वकालत की उपाधि लेने के बाद वे सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली में वकालत करने लगे। वह 1977 से 1979 तक दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार के वकील रहे। वर्ष 1991 में भारतीय जनता पार्टी में सम्मिलित हो गये। वर्ष 1994 में उत्तर प्रदेश राज्य से राज्य सभा के निर्वाचित हुए। सन  2000 में पुन: उत्तरप्रदेश राज्य से राज्य सभा  के लिए निवाज़्चित हुए। इस प्रकार कोविन्द लगातार 12 साल तक राज्य सभा के सदस्य रहे। वह भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रहे। अब राज्यपाल के रूप में बिहार में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। 

श्री कोविन्द जब दिल्ली में सर्वोच्च न्यायालय में वकालत कर रहे थे तो उनकी मुलाकात वहां 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद वह तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के निजी सचिव बन गए थे। इसके बाद वे भाजपा के सम्पर्क में आए और  भाजपा की टिकट  से भोगनीपुर विधानसभा का चुनाव 1997 में लड़े लेकिन वे हार गए। इसके  बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और वे लोकसभा का चुनाव 2005 में लड़े लेकिन वह भी वे हार गए। अब वे देश का सबसे बड़ा चुनाव राष्ट्रपति के पद के लिए लडऩे जा रहे हैं। 

रामनाथ कोविन्द चुनाव भले न जीत पाए हों, लेकिन आईएएस की परीक्षा में सफलता जरूर हासिल कर ली थी। आईएएस के तीसरे प्रयास में वे सफल हुए थे।  वे विधानसभा चुनाव भोगनीपुर से लड़े। पुखरायां में वे राहुल अग्रिहोत्री के यहां भी अपना अस्थाई आवास बनाते थे। वहीं से उन्होंने सियासत के तमाम पहलुओं को हासिल किया। कई बार वे अपनी बातों में इस बात का जिक्र भी करते हैं।

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned