मुस्कुराइए, आप लखनऊ में हैं

Lucknow, Uttar Pradesh, India
मुस्कुराइए, आप लखनऊ में हैं

नवाबी शहर लखनऊ पूरी दुनिया में अपनी तहजीब और विरासत के कारण अलग पहचान रखता है।

लखनऊ. नवाबी शहर लखनऊ पूरी दुनिया में अपनी तहजीब और विरासत के कारण अलग पहचान रखता है। लखनऊ की शाम पूरी दुनिया में मशहूर है। लोग यहाँ नवाबों की विरासत को देखने दूर-दूर से आते हैं। उनकी रोमांचक कहानियों के जीवंत दस्तावेज देखकर एक अलग अनुभव संजोते हैं। बात सिर्फ यहीं नहीं रूकती। भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण की राजधानी रहा यह शहर  अपने आप में आज़ादी से जुडी कई स्मृतियों को समेटे हुए है। बेगम हजरत महल से लेकर लखनऊ के आखिरी नवाब वाजिद अली शाह तक के जीवन से जुड़े अवशेष पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। काकोरी काण्ड से लेकर रेसीडेंसी तक में क्रांति की कहानियां बिखरी पड़ी हैं तो दूसरी ओर नए उद्यानों और स्मृति स्थलों के रूप में घूमने-फिरने के नए केंद्र विकसित हुए हैं। लखनऊ के बारे में कई ऐसी खास बातें हैं, जिन्हें जानकर आप भी लखनऊ घूमने का मन बना लेंगे।

गोमती के तट पर बसा है शहर

गोमती नदी के तट पर बसा लखनऊ शहर यहाँ आने वाले हर व्यक्ति को नवाबी अहसास से सराबोर कर देता है। लखनऊ के पुराने भवन, स्मारक, नदी किनारे बसी पुरानी कालोनियां और नए विकसित होते इलाके पर्यटक को किसी परम्परागत और आधुनिक सभ्यता के मिलन के केंद्र का अहसास कराते हैं। नवाबी शहर के नाम से पूरी दुनिया में मशहूर लखनऊ के कई परिवार अभी भी खुद को नवावी परम्परा को अपने आप में समेटे दिखाई देते हैं। पुराने लखनऊ शहर के इमामबाड़े लखनऊ के नवाबों के स्थापत्य कला के प्रति प्रेम के गवाह हैं। खान पान से लेकर पहनने ओढ़ने तक की नवाबी समय की परम्पराओं को लखनऊ ने अपने आप में संजो कर रखा है।

नवाबी शहर के ऐतिहासिक विरासत

भूल भूलैया लखनऊ के बड़ा इमामबाड़ा में स्थित भूल भुलैया का नाम पूरी दुनिया में मशहूर है। लखनऊ की इस ऐतिहासिक धरोहर का निर्माण नवाब आसिफ उद्दौला ने साल 1784 में कराया था। इस ऐतिहासिक भवन के निर्माण की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। माना जाता है कि उस दौर में आये भयानक अकाल से परेशान जनता को रोजगार और मदद मुहैया कराने के मकसद से नवाब ने इस ऐतिहासिक इमारत का निर्माण कराया था। भूल भुलैया की ही तर्ज पर अकाल राहत प्रोजेक्ट के तहत रूमी गेट का निर्माण करवाया गया था। अवध की वास्तुकला के इस प्रतीक को तुर्किश गेटवे के नाम से भी जाना जाता है। साठ फ़ीट ऊंची यह इमारत अवध की वास्तुकला की भव्यता की कहानी बयान करती दिखती है।

क्रांति और कला से जुडी स्मृतियाँ

रेजीडेंसी का खंडहर अपने आप में कई कहानियां समेटे हुए है। इस भव्य इमारत का निर्माण नवाब सआदत अली खान के कार्यकाल में कराया गया। बाद में अंग्रेजों ने इस पर कब्ज़ा कर इसे अंग्रेज अफसरों का आवास बना दिया तब से इसे रेजीडेंसी के नाम से जाना जाने लगा। 1857 के ग़दर के दौरान भारतीय विद्रोहियों ने रेजीडेंसी पर कब्जा कर लिया था और अंग्रेजों को 86 दिनों तक बंदी बना कर रखा था। सआदत अली खान का मकबरा लखनऊ के नवाबों के स्थापत्य कला प्रेम को दर्शाता है। इस मकबरे का निर्माण उनके पुत्र बादशाह गाजीउद्दीन ने करवाया था। इस मकबरे का निर्माण लखौरी ईंटों से किया गया है। इसी के साथ नवाब के भाइयों और उनकी तीन बेगमों की भी कब्र है।

सफ़ेद बारादरी और लाल बारादरी

सफ़ेद बारादरी का निर्माण नवाब वाजिद अली शाह ने कराया था। इसका निर्माण इमामबाड़े के रूप में उपयोग के लिए बनाया गया था। लखनऊ पर ब्रिटिश सरकार का राज कायम होने के बाद इसका उपयोग कोर्ट के रूप में किया जाने लगा। सफ़ेद पत्थर से बना यह खूबसूरत भवन पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस बारादरी में मशहूर उमराव जान फिल्म का मशहूर गाना भी फिल्माया जा चुका है। लाल बारादरी में वर्तमान समय में राज्य ललित कला अकादमी का कार्यालय स्थित है। इसका निर्माण नवाब सआदत अली खान ने करवाया था। यह भवन नवाब के शाही दरबार के रूप में उपयोग में लाया जाता था।

संगीत संस्थान और घड़ियाल अभ्यारण भी


परीखाना को वर्तमान में भातखण्डे संगीत विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है। इसे अवध के अंतिम नवाब वाजिद अली शाह ने करवाया था। सन 1867 में जॉन लारेंस ने परीखाना को एक महलनुमा इमारत में परिवर्तित किया और इसमें कैनिंग कालेज व मैरिस म्यूजिक कालेज चलने लगा। इसी इमारत में बाद में भातखण्डे संगीत विश्वविद्यालय और राजकीय संग्रहालय की स्थापना हुई। हुसैनाबाद में स्थित सतखंडा ग्रीक और इस्लामिक स्थापत्य शैली के मिश्रण का अनूठा उदाहरण है जिसे देखने के लिए दुनिया भर से पर्यटक यहां आते हैं। इस चार मंजिला भवन का निर्माण मोहम्मद अली शाह ने करवाया था। इसमें सात मंजिलों का निर्माण करवाया जाना था लेकिन यह काम पूरा नहीं हो सका। कहा जाता है कि ईद के चाँद के दीदार के लिए नवाब ने इस इमारत का निर्माण करवाया था। इसी सतखंडा के पास प्रसिद्द हुसैनाबाद तालाब स्थित है। लखनऊ में पिकनिक स्पॉट के रूप में प्रसिद्द कुकरैल में घड़ियाल और कछुवे अभ्यारण करते हैं।

शिक्षण संस्थानों के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों की भरमार

लखनऊ की विरासत काफी समृद्ध है जिसका बखान और बयान करने में शायद समय और कागज के पन्ने कम पड़ जाएँ। लखनऊ की ये कहानियां तो बानगी भर हैं। आज के लखनऊ में शैक्षणिक संस्थानों से लेकर सरकारी, गैरसरकारी उपक्रमों के दफ्तरों, कला और संस्कृति से जुडी गतिविधियां, फिल्म और साहित्य की गतिविधियां सब मिलकर लखनऊ को एक वैश्विक पहचान देती है। लखनऊ के मलीहाबाद का आम, काकोरी के क्रांतिकारियों की कहानी, चिकनकारी, लखनऊ विश्वविद्यालय, अम्बेडकर विश्वविद्यालय, हाईकोर्ट, विधानसभा, राज्य ललितकला अकादमी, कथक संस्थान, भारतेन्दु नाट्य अकादमी, हिंदी संस्थान, किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, आईआईएम सहित कितने ही परंपरागत और समकालीन विविधताओं से भरा नजारा आपको इस शहर की ओर खींच ले आता है।

ट्रेन से लेकर एयरपोर्ट तक की है सुविधा

आप देश-दुनिया के किसी भी हिस्से में रहते हों, लखनऊ तक आने और जाने के लिए सभी तरह के साधन उपलब्ध हैं। उत्तर रेलवे और पूर्वोत्तर रेलवे के स्टेशनों से देश के किसी भी हिस्से के लिए हर रोज हर घंटे ट्रेनें उपलब्ध हैं। लखनऊ के चौधरी चरण सिंह इंटरनेशनल  एयरपोर्ट से नई दिल्ली, पटना, कोलकाता और मुंबई के लिए नियमित फ्लाइट उपलब्ध हैं। इसके अलावा लंदन, दुबई, शारजाह, सिंगापुर, हांगकांग जैसे देशों के लिए भी फ्लाइट उपलब्ध हैं।

और भी है बहुत कुछ

लखनऊ शहर के बारे में हमने जो कुछ भी बताया, यह तो एक बानगी भर है। इस शहर को देखने, समझने और घूमने पर आप एक अलग ही अनुभव और अंदाज के रंग में रंगे नजर आयेंगें। शायद इन्हीं खूबियों के कारण लखनऊ शहर अपने यहाँ आने वाले मेहमानों का यह कहकर स्वागत करता है - मुस्कुराइए, आप लखनऊ में हैं।

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