रबी फसलों पर भी मौसम बन सकता है आफत

Widush Mishra

Publish: Oct, 17 2015 06:10:00 (IST)

Chhatarpur, Madhya Pradesh, India
रबी फसलों पर भी मौसम बन सकता है आफत

किसानों को सलाह एक वर्षा होने पर ही करें गेंहू, चना की बोवनी, बिना नमी के बोवनी की तो अंकुरण हो सकता है प्रभावित- 28 अक्टूबर से मौसम में बदलाव आने का अनुमान।

छतरपुर.खरीफ के बाद अब रबी की फसलों के लिए भी मौसम आफत बन सकता है। मौसम की मार झेल रहे किसानों को इससे बचने के लिए तब तक चना, गेंहू सहित अन्य फसलों की बोवनी नहीं करनी चाहिए जब तक कि एक बार बारिश (पलेवा) न हो जाए। कृषि विभाग के अनुसार यदि खेत में नमी आने के पहले बीज बो दिया तो अंकुरण प्रभावित होगा। मौसम विभाग ने 28 अक्टूबर तक मौसम में बदलवा आने का अनुमान  जताया है।

16 लाख हेक्टेयर में बोवनी का लक्ष्य
खरीफ की बर्बाद हुई फसल व आने वाले रबी सीजन के संदर्भ में कृषि विभाग के संयुक्त संचालक डीएल कोरी का कहना है कि अल्प व समय पर वर्षा नहीं होने से सोयाबीन व उड़द की फसलें प्रभावित हुईं हैं। साथ ही उत्पादकता में भी कमी आई है। आने वाले रबी सीजन के कार्यक्रम का निर्धारण कर लिया गया है। संभाग में चना व गेंहू सहित अन्य फसलों की बोवनी करीब 16 लाख के रकबे में करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने आशंका जताई की यदि मौसम एेसा ही रहा तो यह आंकड़ा घटकर 10 लाख पर आ सकता है।

सबसे ज्यादा नुकसान सागर में
इधर, कृषि विभाग ने मौसम की मार से संभाग में करीब सवा तीन लाख हेक्टेयर में बोई गई सोयाबीन व उड़द की फसल बर्बाद होने का अनुमान लगाया है। सर्वाधिक एक लाख हेक्टेयर से ज्यादा नुकसान सागर जिले में हुआ है, जबकी सबसे कम 28 हजार हेक्टेयर पन्ना में बताया जा रहा है। गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष सोयाबीन व उड़द की उत्पादकता में भी क्रमश: 57 व 25 प्रतिशत की कमी आई है।

संभाग में बोई थी साढ़े 8 लाख हे. फसलें
सागर संभाग के सागर, दमोह, पन्ना, टीकमगढ़ व छतरपुर जिले में इस दफा 8 लाख 59 हजार हेक्टेयर  में सोयाबीन व उड़द की फसल बोई गई थी। जिसमें सोयाबीन 5 लाख 43 हेक्टेयर  रकबे में व 3 लाख 15 हजार हेक्टेयर रकबे में उड़द बोई गई थी। इसमें से 2 लाख 5 हजार हेक्टेयर का रकबा सोयाबीन व 1 लाख 9 हजार हेक्टेयर रकबे की उड़द फसल प्रभावित हुई है।

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