इस तेंदुए ने मासूम को बनाया था निवाला, घर के बाहर मिले थे हाथ-पैर के टुकड़े

Mahasamund, Chhattisgarh, India
इस तेंदुए ने मासूम को बनाया था निवाला, घर के बाहर मिले थे हाथ-पैर के टुकड़े

पिछले डेढ़ माह से आंतक मचा रखे तेंदुआ को वन विभाग की टीम में लंबे मशक्कत के बाद पिंजरे में कैद कर लिया। इस तेंदुआ ने हल्दी गांव में एक बच्चे को मार डाला था।

खरियार रोड़. पिछले डेढ़ माह से क्षेत्र में आंतक मचा रखे तेंदुआ को वन विभाग की टीम में लंबे मशक्कत के बाद पिंजरे में कैद कर लिया। इस तेंदुआ ने हल्दी गांव में एक बच्चे को मार डाला था।

तेंदुए के पकड़े जाने की खबर लगते ही गांव में मेले जैसा माहौल हो गया। तेंदुआ को देखने के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग रात को हल्दी गांव पहुंचने लगे। गांव वालों ने तेंदुआ को ले जाने से रोक दिया। गाड़ी को रोककर देर रात तक खड़े रहे, जब तक वन विभाग के अधिकारियों ने पीडि़त परिवार को पन्द्रह दिन में मुआवजा देने का लिखित आश्वासन नहीं दे दिया।

ज्ञात हो कि 26 मई शुक्रवार की रात को हल्दी गांव में रहने वाले हीरालाल पाण्डे अपनी पत्नी केतकी एवं चार बच्चों के साथ घर के बाहर सो रहे थे। उनका घर संरक्षित जंगल से लगा हुआ है। चार साल के बेटे छगनलाल को सोते समय देर रात को तेंदुआ उठाकर ले गया और उसे अपना शिकार बना लिया। देर रात जब हीरालाल की आंख खुली तो उसने अपनी पत्नी से छगन के नहीं होने की बात कही, दोनों ने बहुत देर तक इधर उधर खोजबीन की।

सुबह घर के पास से खून के धब्बे दिखे, जो जंगल तक गए थे। गांव वालों के साथ हीरा और उसके परिवार वाले खून की दिशा में गए तो चट्टान पर छगन का कटा हुआ सिर मिला और हाथ-पैर के कुछ अंश पाए गए। वहां पर मिले कपड़े के आधार पर छगन की शिनाख्त की गई।

नंदन कानन भुवनेश्वर भेजा गया तेंदुआ
इस घटना के बाद से जंगल विभाग के अधिकारी तेंदुए को पकडऩे के लिए प्रयास कर रहे थे, लेकिन सफल नहीं हो पा रहे थे। 9 जुलाई को तेंदुआ फिर से एक बार गांव में बरातू पाण्डे के घर पहुंच गया, जहां कमरे का दरवाजा खुला छोड़कर सो रही बरातू की पत्नी धान बाई एवं उसकी पोती चांदनी के पैर पर हमला कर दिया। घर वालों के शोर मचाने के कारण वह भाग खड़ा हुआ। इसके बाद वन विभाग ने सेंसर वाले आठ कैमरे भी लगाए और पिंजरे में बकरी को बांध कर तेंदुए को पकडऩे की योजना पर काम करते रहे। 15 जुलाई की रात तेंदुआ पकड़ में आया।

इसके बाद लोगों का आक्रोश फूट पड़ा और मृतक बच्चे के परिवार को मुआवजा नहीं मिलते तक तेंदुए को नहीं ले जाने देने पर अड़े रहे। इस दौरान गांव में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात करना पड़ा था। लिखित आश्वासन के बाद देर रात को जंगल विभाग के अधिकारी पिंजरे में कैद तेंदुए को लेकर खरियार रोड़ कार्यालय पहुंचे। यहां से भुवनेश्वर स्थित नंदन कानन के लिए उसे रवाना कर दिया गया।

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