बिना परमिट के बरसों से चल रही चंबल नदी में नावें, फिर भी मंदसौर प्रशासन मौन

vikram ahirwar

Publish: Apr, 21 2017 12:21:00 (IST)

Mandsaur, Madhya Pradesh, India
बिना परमिट के बरसों से चल रही चंबल नदी में नावें, फिर भी मंदसौर प्रशासन मौन

मंदसौर प्रशासन की अनदेखी फिर पड़ी भारी, चंबल नदी मेंं नाव पलटने का छटा बड़ा हादसा 

मंदसौर/रतलाम.
चंबल नदी में बरसों से बिना परमिट के नावों से यात्री परिवहन हो रहा है। इसके बाद भी प्रशासन लापरवाह है। वहीं क्षेत्र के जवाबदार अधिकारी एसडीएम अर्पित वर्मा खुद स्वीकार कर रहे है कि चंबल नदी में नावो से अवैध परिवहन हो रहा है। उल्लेखनीय है कि नौ साल में कई नाव दुर्घटनाएं हो चुकी है। करीब 9 साल में हुए 6 बड़े नाव हादसों में 34 लोगों की जान जा चुकी है। इसके बाद भी प्रशासन ने नदी में चल रहे अवैध परिवहन को रोकने के कभी कोई प्रयास नहीं किए। 
ओवरलोडिंग व बिना परमिट के चल रही कई नावें
चंबल नदी में बरसों से ओवरलोडिंग कर बिना परमिट के नावों व स्टीमरों से यात्री परिवहन हो रहा है, इसके बाद भी प्रशासन लापरवाह है। जब हादसा होता है तो प्रशासन  जाग जाता है। वर्तमान में भी एक स्टीमर में 10 से अधिक सवारियां व 6 से अधिक बाइक लोड की जा रही है। वहीं चप्पू वाली नावों में अवैध तरीके से सवारियां व वाहन लोड किए जा रहे है। उल्लेखनीय है कि जिले में पिछले सालों में हुए कई बड़े नाव हादसों में कई लोगों की जान जा चुकी है। इसके बाद भी इन्हें देखने या रोकने वाला कोई नहीं है। शायद प्रशासन एक बार फिर किसी बड़े हादसे की प्रतीक्षा कर रहा है।  
नौसिखिए करा रहे नौका विहार
कम कीमत व समय की बचत के चलते यात्रा के लिए लोग जल मार्ग का सहारा ले रहे हैं। बिना किसी झिझक नौसिखिए नाव चालक बेपरवाह होकर नौका विहार करा रहे है। जिले के गरोठ, शामगढ़ व गांधीसागर क्षेत्र में भी यही स्थिति है, यहांभी लोग बिना किसी झिझक के नाव चला रहे है। गांधीसागर बांध के डूब क्षेत्र संजीत के पास हिंगोरिया बड़ा गांव से खड़ावदा, रामपुरा व आसपास के इलाकों मे अपने गंतव्य तक जाने का सीधा मार्ग होने से लोग अपनी जिंदगी को दांव पर लगा कई किलोमीटर दूर तक का सफर तय कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार इन नाव चालकों के पास न तो लाइसेंस है और नहीं ये प्रशिक्षित है और नहीं इनके पास कोई परमिट। यहीं नहीं इनके पास सुरक्षा के भी कोई संसाधन मौजूद नहीं है। 
सवारियों के साथ ढो रहे वाहन
यहीं नहीं सवारियों के साथ ही ये नौसिखिया नाव चालक दर्जनों वाहनों को भी अपनी नावों में लोड कर नदी के इस पार से उस पार पहुंचा रहे हैं। इन्हें सिर्फ कमाई से मतलब है। इस क्षेत्र से 10 से 25 प्रति सवारी तथा वाहनों के 30 से 50 रुपए लेकर चालक कोसो दूर का सफर लोगों को तय करा रहे है। 'पत्रिकाÓ ने इस बात की पड़ताल कि तो पाया कि प्रतिदिन ये नाव चालक सुबह 6 से शाम 6 बजे तक हर आधे घंटे के अंतराल में करीब 25 से अधिक बार इस किनारे से उस किनारे पर जाते है। इनमें 10 से अधिक सवारियों के साथ ही 6 से अधिक मोटरसाइकिलें भी लोड की जा रही है। यह बात अधिकारियों की जानकारी में होते हुए भी सभी चुप्पी साधे बैठे है। 
कब-कब कहां हुए हादसे
- जनवरी-2015 में गांधीसागर जलाशय में कंवला गांव में तीन युवको की मौत हो गई थी। यह युवक जलाशय में चप्पू वाली नाव से मछली पकडऩे गए थे। 
- मई-2014 को नाहरगढ़ क्षेत्र के ग्राम निरधारी से बगैर परमिट की चप्पू वाली जर्जर नाव से नाविक सहित 8 यात्रियों का अवैध परिवहन कर शामगढ़ क्षेत्र के ग्राम आवरा ले जाया जा रहा था। यही कारण है कि नाव में हुए छेद से उसमें पानी भराया ओर नाव डूब गई।इसमें एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। इसमें दंपती के साथ एक बालिका भी थी। इस दुर्घटना को भी हर बार की तरह सामान्य लिया गया। 
- अप्रेल-2014 में चंदवासा (शामगढ़) के ग्राम आवरा के समीप हुईनाव दुर्घटना में 3 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी थी। यहां बिना परमिट की चप्पू वाली नाव में ओवरलोडिंग कर नदी से यात्री परिवहन किया जा रहा था। 
- नवंबर-2012 में बापच्या से बोरखेड़ी जागीर के बीच चंबल नदी में नाव पलटने से 13 लोगों की मौत होने की घटना हो चुकी है। 
- फरवरी-2006 में भी चंबल नदी में नाव पलटने का हादसा हो चुका है। उस वक्त भी संजीत से बालोदा जा रही नाव पलटने से 13 लोगों की मौत हुई थी। उस समय भी नाव में 19 लोग ही सवार थे। 
- 90 के दशक में भी यहां नाव पलटने का बड़ा हादसा हुआ था। इसमें 6 लोगों की जानें गई थी। 
इनका कहना...
चंबल नदी में परिवहन के लिए कुछ स्टीमर संचालको को अनुमति दी गई है। जलाशय में बगैर परमिट के चलने वाली नावों व स्टीमर की जांच कराई जाएगी। अवैध पाए जाने पर संबंधितो पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। 
- अर्जुनसिंह डाबर, प्रभारी कलेक्टर

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned