एक्स-रे संक्रमण रोकने के लिए नहीं उठाया स्वास्थ्य विभाग ने कदम

vikram ahirwar

Publish: Jun, 19 2017 05:16:00 (IST)

Mandsaur, Madhya Pradesh, India
एक्स-रे संक्रमण रोकने के लिए नहीं उठाया स्वास्थ्य विभाग ने कदम

- एईआरबी की गाइडलाइन की अनदेखी कर हो रहा एक्स-रे- रेडिएशन से हो सकती है कई घातक बीमारियां


मंदसौर.
जिला अस्पताल में संचालित एक्स-रे यूनिट में एटोमिक एनर्जी रेग्यूलेटरी बोर्ड (एईआरबी) की गाइडलाइन को ताक पर रख एक्स-रे किया जा रहे हैं। इससे ना केवल रोगी के परिजनों वरन् एक्स-रे में कार्यरत कर्मचारियों को भी नुकसान होने का खतरा हर समय मंडराता रहता है। हद तो यह है कि रेडिएशन को रुम से बाहर नहीं निकलने देने के लिए दरवाजे खिड़कियों पर लेड शीड तक नहीं लगाई गई है। जरुरत से ज्यादा रेडिएशन नष्ट करने के लिए एक्स-रे मशीन का मुंह अमूमन दिवार की ओर रखा जाता है। इस नियम का भी पालन अस्पताल में नहीं हो रहा है। यही वजह है कि एक्स-रे रुम क्षेत्र घातक बीमारियां होने का अंदेशा बना हुआ है।  
गाइडलाइन के अनुरुप होनी चाहिए लेड शीट
जानकारी के अनुसार एटोमिक एनर्जी रेग्यूलेटरी बोर्डने एक्स-रे यूनिट के लिए मापदंड तय किए है। जिसके अनुसार ही यूनिट का संचालन होना चाहिए।इसमें सबसे प्रमुख एक्स-रे यूनिट के दरवाजे और खिड़कियों पर लेडशीट का होना अनिवार्य है। लेकिन एक्स-रे मशीन में लेडशीट ना तो  िखड़की पर लगी हुईहैऔर ना ही दरवाजे पर लगी है। इसके साथ ही मापदंड के अनुसार एक्स-रे का मुंह दिवार की होना चाहिए जहां पर खिड़की ना हो, लेकिन दिवार की जगह खिड़की है।
रेडिएशन से हो सकती खतरनाक बीमारी
डाक्टरों के अनुसार रेडिएशन से कई खतरनाक बीमारी होने की संभावना रहती है। इसमें कैंसर, किडनी का खराब होना, लीवर खराब होना, ह्दय घात सहित अन्य घातक बीमारियां शामिल है। यह रेडिएशन करीब दस से पंद्रह साल के बाद असर दिखाते है। और बीमारी का रूप लेते है।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                    
यह हैप्रमुख नियम
-एक्स-रे यूनिट की दरवाजे पर लेड शीट होना अनिवार्य।
-एक्स-रे मशीन का मुंह दिवार की ओर होना चाहिए।
-एक्स-रे के समय यूनिट के अंदर अन्य कोई व्यक्ति नहीं होना चाहिए।
-एक्स-रे यूनिट की दिवार की मोटाईनौ इंच की होना चाहिए।
-सभी उपकरण का रखरखाव होना चाहिए।
रोजाना होते है 70 एक्स-रे
एक्स-रे यूनिट से मिली जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में हर माह में करीब 2100 से दो हजार एक्स-रे होते है। इनका प्रतिदिन औसत देखे तो 60 से 70 एक्स-रे हो रहे है। इनमें बच्चे, युवा और बुजुर्ग शामिल है। जिला अस्पताल में तीन एक्स-रे मशीन हैजिसमें दो मशीन चालू अवस्था में है। एक करीब नौ माह से खराब पड़ी है।
मंहगी है इसलिए अभी तक नहीं लगवाई
अस्पताल सुत्रों की माने तो लेड शीट बहुत मंहगी होती है। इसकी दो बाय तीन की एक एमएम की लेडशीट करीब पांच हजार रुपए में आती है। वहीं एक्स-रे यूनिट में लगाने के लिए करीब जिला अस्पताल के अधिकारियोंं को डेढ़ से दो लाख रुपए खर्च करना पड़ेगें। जब यह लेडशीट लगेगी। लेकिन मंहगी कॉस्ट होने के चलते अभी तक किसी अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया।
इनका कहना...
लेड शीट का का होना अनिवार्यहै। इसको लेकर सिविल सर्जन को सूचित कर दिया गया है। लेड शीड रेडिएशन को रोकती है। रेडिएशन से गंभीर बीमारियां हो सकती है। इसके साथ ही एक्स-रे मशीन में जगह को लेकर भी जानकारी दे दी गईहै।लेड शीट काफी मंहगी आती है।  
- डॉ दीपक अग्रवाल, रेडियोलाजिस्ट जिला अस्पताल।
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