नवरात्रि के पहले दिन एक साथ होगी मां शैल पुत्री व ब्रह्मचारिणी की पूजा

vikram ahirwar

Publish: Mar, 21 2017 11:36:00 (IST)

Mandsaur, Madhya Pradesh, India
नवरात्रि के पहले दिन एक साथ होगी मां शैल पुत्री व ब्रह्मचारिणी की पूजा

- 9 की बजाय 8 दिन की रहेगी चैत्र नवरात्रि, पुष्य नक्षत्र में मनेगी रामनवमी, नववर्ष का राजा होगा बुध, मंत्री रहेगा बृहस्पति


मंदसौर/रतलाम.
देवी आस्था का पर्व चैत्र नवरात्रि इस बार 9 के बजाय 8 दिन की होगी। शुरुआत रेवती नक्षत्र में 29 मार्च को होगी और उस दिन प्रतिपदा के साथ द्वितीया की तिथि भी रहेगी। इस कारण नौ देवियों में प्रथम मां शैल पुत्री व द्वितीय ब्रह्मचारिणी की पूजा प्रथम दिवस एक साथ होगी। वहीं 5 अप्रैल को रामनवमी के साथ इसका समापन होगा। नवमी पर पुष्य नक्षत्र होने के कारण इसे अत्यधिक शुभ माना जा रहा है। 
एक ही दिन रहेगी प्रतिपदा और द्वितीया तिथि 
ज्योतिषाचार्य पंडित देवेंद्र शर्मा ने बताया कि इस नवरात्रि की प्रतिपदा और द्वितीया तिथि एक ही दिन रहेगी। इसमें 28 मार्च को अमावस्या की तिथि सुबह 8.33 बजे तक ही रहेगी, लेकिन अमावस्या तिथि सूर्योदय तिथि होने की वजह से 29 से ही नवरात्रि की शुरुआत मानी जाएगी। 29 मार्च को प्रतिपदा तिथि सुबह 7 बजे तक रहेगी। इसके बाद द्वितीया तिथि का आगमन हो जाएगा। इस वजह से प्रथमा (प्रतिपदा) और द्वितीया तिथि एक ही दिन रहेगी। घट स्थापना भी सूर्योदय से लेकर सुबह 7 बजे तक करना श्रेयस्कर रहेगा। 
नववर्ष का राजा होगा बुध, मंत्री रहेगा बृहस्पति
चैत्र नवरात्रि में नववर्ष की धूम रहेगी। हिन्दू नववर्ष के साथ ही सिंधी समाज और महाराष्ट्रीय समाज का भी नववर्ष रहेगा। सिंधी समाज की ओर से चेटीचंड पर्व तो महाराष्ट्रीयन समाज के लोग गुड़ी पड़वा का पर्व मनाएंगे। पंडित के अनुसार चैत्र नवरात्र के दिन गुड़ी पड़वा से विक्रम नवसंवत्सर 2074 भी प्रारंभ होगा। इस वर्ष का राजा बुध व मंत्री बृहस्पति होने से देश व दुनिया में कृषि विज्ञान, टेक्नालॉजी व आध्यात्म के क्षेत्र में विशेष उन्नति की होगी। 29 मार्च को नवरात्र के पहले दिन बुधवार को प्रतिपदा व द्वितीया दोनों तिथियां एक साथ रहेगी। 
सूर्य देव का राशियों में भ्रमण का चक्रकाल होगा पूर्ण
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 14 मार्च से खरमास शुरू हो चुका है। ऐसे में सभी मांगलिक कार्य भी वर्जित माने जाते हैं। वहीं नवरात्रि में शुभ कार्य किए जा सकते हैं। सूर्य देव का 12 राशियों में भ्रमण का चक्रकाल भी पूर्ण होगा। वे नवरात्रि से अपने दूसरे चक्रकाल के लिए पहली राशि मेष राशि में प्रवेश करते हैं। इस वजह से भी चैत्र नवरात्रि का महत्व बढ़ जाता है।
पुष्य नक्षत्र में मनेगी नवमी
रामनवमी की तिथि को भगवान राम का जन्मोत्सव पुष्य नक्षत्र में मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार भगवान राम का जन्मोत्सव पुष्य नक्षत्र में पडऩा शुभदायक रहेगा। उनके अनुसार भगवान के जन्म के समय भी पुष्य नक्षत्र का योग था। इससे सभी ओर शुभता का आगमन होगा। पुष्य नक्षत्र की शुरुआत भगवान के जन्मोत्सव के एक दिन पूर्व मंगलवार की रात 2.34 बजे होगी, जो बुधवार को रामनवमी की दोपहर 1.40 बजे तक रहेगी। रामनवमी को सूर्योदय भी पुष्य नक्षत्र के संयोग में होगा। जिससे पूरे दिन इसका प्रभाव रहेगा।
तीसरे साल भी 8 दिनों का पर्व
पिछले दो सालों से चैत्र नवरात्रि 8 दिनों की पड़ रही है। वर्ष 2015 में 21 से 28 मार्च तक और 2016 में 8 से 15 अप्रैल तक 8 दिनों की नवरात्रि थी। इस वर्ष भी एक तिथि के क्षय होने की वजह से एक बार फिर 8 दिनों की नवरात्रि रहेगी।
पांच दिन रहेंगे खास
चैत्र नवरात्रि में पांच तिथियां खास रहेंगी। इसमें 29 मार्च प्रथमा तिथि को नववर्ष, गुड़ी और चेटीचंड रहेगा। वहीं 30 मार्च तृतीया तिथि को गणगौर, 31 मार्च चतुर्थी तिथि को विनायकी चतुर्दशी, 1 अप्रैल को निषाद जयंती व पंचमी, 3 अप्रैल को सप्तमी, 4 अप्रेल को महाअष्टमी और 5 अप्रैल को रामनवमी रहेगी।

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