किसान आंदोलन के उन दस दिनों की हकीकत जानेंगे कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक

vikram ahirwar

Publish: Jun, 20 2017 12:24:00 (IST)

Mandsaur, Madhya Pradesh, India
किसान आंदोलन के उन दस दिनों की हकीकत जानेंगे कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक

- पुलिस पूरे मामले की हर पहलु पर कर रही है जांच, प्रशासन के मुखिया भी संबंधित विभागों एवं अधिकारियों की भूमिका को लेकर करेगी जांच



मंदसौर.
जिले में किसान आंदोलन एवं उसके बाद की हुई घटनाओं से ना केवल जिला वरन् उसकी आंच से प्रदेश झुलसा है।इस आंदोलन में जहां सरकार, शासन और प्रशासन की चुले हिला दी। वहीं इस आंदोलन की वजह से सियासत भी तेज हो गई। कांग्रेस ने इसे बड़ा मुद्दा बना लिया। इन तमाम परिस्थितियों के चलते जिले में प्रशासन के मुखिया व पुलिस कप्तान आंदोलन के  पीछे की कहानी जानने में लगे हुए है।पुलिस आंदोलन की शुरुआती दौर से भड़की हिंसा, तोडफ़ोड़, आगजनी एवं गोलीचालन, पुलिस अधिकारियों की भूमिका, राजनीतिक लोगों की आंदोलन में प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से सहभागिता, अराजक तत्वों की आंदोलन में सक्रियता, प्रशसनिक अधिकारियों खास तौर पर राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के किसानों के प्रति उदासीनता जैसे अनेक मसलों पर जांच की जा  रही है।यही नहीं पुलिस विभाग ने तो अपने थानों व विभिन्न विभागों के आलाअधिकारियों से लेकर बेहद नीचले स्तर तक के कर्मचारियों को हटाने या इधर से उधर करने का काम शुरु कर दिया है।
जिला प्रशासन में भी होगी सर्जरी
प्रशासन के मुखिया इस माह बाद जिले के तमाम राजस्व विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों की कार्यप्रणाली, किसानों के प्रति खुद की जवाबदेही तथा कर्मचारियों के प्रति किसानों का रुख जानने के बाद ही जिले में राजस्व विभाग के टॉप से बॉटम तक के अधिकारियों और कर्मचारियों को हटाने या इधर से उधर करने की प्रक्रिया शुरु करेगा। जानकारी के अनुसार इसके  िलए कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव को फ्री हेंड भी कर दिया है। कमोबेश यही स्थिति पुलिस विभाग में भी है। पुलिस अधीक्षक मनोज ङ्क्षसह की अनुशंसा को पुलिस के आलाअधिकारी हाथों-हाथ ले रहे है। उन्ही के अनुसार नए सिरे से थानों एवं अन्य विभागोंं में अधिकारी एवं कर्मचारियों की जमावट की जा रही है।पुलिस ने विभाग की एक टीम के माध्यम से किसान आंदोलन के ए से जेड तक के कारणों व उनके निदान सहीत अन्य बिंदूओं पर जांच भी शुरु की है। प्रशासन किसान आंदोलन अधिकृत तौर पर कोई मजिस्ट्रियल जांच तो नहीं बिठाईहै। पर पूरे मामले में राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका को लेकर गहनता से जांच शुरु की।हांलाकि प्रशासन के मुखिया श्रीवास्तव पूरे जिले में 22 से 30 जून तक दौरा करने के बाद ही विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को लेकर निर्णय करेगें।
किसान आंदोलन उसमें भड़की हिंसा, पुलिस का बल प्रयोग, गोलीचालन से हुए मृत किसानों को लेकर भले ही प्रदेश सरकार ने न्यायिक जांच आयोग का गठन कर दिया हो। इस आंदोलन ने सरकार और शासन की नींद पूरी तरह उड़ा दी है। स्थिति जिले में शांत हो गईहै। पर पुलिस एवं जिला प्रशासन का काम कईमायने में अब शुरु हुआ है।प्रशासन को यह जांचना बाकी है कि किसान आंदोलन अचानक जिले में कैसे उठा और जिले में कैसे फैला। शायद पहली बार जिले में ऐसा हुआ कि कोई बड़े एवं प्रभावी किसान संगठन ने आंदोलन की शुरुआत ही नहीं की। इसके बाद भी आंदोलन जोर पकड़ते चला गया। इस आंदोलन में अराजक तत्व भी शामिल हुए। और उन्होंने मौके का फायदा उठाकर ना केवल अपने स्वार्थ पूर्णकिए वरन् लाखों की लूट भी कर डाली। ऐसे तत्वों ने शराब की दुकानों तक को लूट लिया। आंदोलन कब अराजक तत्वों के हाथों में चला गया। पुलिस एवं प्रशासन को पता ही नहीं चला। आंदोलन के उग्र होने तक पुलिस एवं प्रशासन अपेक्षाकृत निष्क्रिय ही बना रहा। व्यापक पैमाने पर आंदोलन बढऩे पर शुरुआती पांच छह दिनों में पुलिस एवं प्रशासन के हाथों में कोई नियंत्रण नहीं था।
यह होगें जांच के बिंदू
जानकारी के अनुसार जांच में यह बिंदू भी शामिल हैकि क्या किसान आंदोलन की शुरुआत में ही प्रशासन सजग होता और पुलिस सक्रिय रहती तो आंदोलन को शुरुआती दौर में ही क्या दबाया जा सकता था। या उसे खत्म किया जा सकता था। किसान जब संगठित नहीं था तो इतना बड़ा आंदोलन क्यों भड़का। किसान ङ्क्षहसा नहीं करता, पर आंदोलन में लगातार ङ्क्षहसा क्यों हुई। किन परिस्थितियों में गोलियां चलाई गई। क्या उन परिस्थितियों को समझ घटना को रोका जा सकता था। पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों की रसूखदार लोगों से या अराजकता फैलाने वाले लोगोंं से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से संबंध थे।क्या रिश्तों के चलते पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। प्रशासन के मुखिया सहित राजस्व विभाग के अनुविभागीय अधिकारियों का रोल आंदोलन को समाप्त करने में हो सकता था। आंदोलन क्यों, कैसे शुरु हुआ।क्या वास्तव में किसानों को उपज के सही दाम नहीं मिलने पर किसान इतना आक्रोशित था कि वह पुलिस के सामने खड़ा हो गया। क्या प्रशासन में भ्रष्टाचार को लेकर किसान आहत था। ऐसे कई बड़े विजन है जिनकी जांच अभी बाकी है।
पुलिस अधीक्षक का कहना
पुलिस अधीक्षक मनोज सिंह ने कहा कि किसान आंदोलन को लेकर पुलिस  विभाग हर पहलू पर जांच कर रहा है। विभाग की एक टीम जांच के प्रमुख बिंदू बनाकर हकीकत जानने में लगी है। आंदोलन उग्र रूप में कैसे पहुंचा और क्यों पहुंचा। पुलिस प्रशासन क्या भूमिका रही।पुलिस के खिलाफआक्रोश क्यों पनपा इन सब कारणों को लेकर विभागीय जांच की जा रही है।हंालाकि पुलिस विभाग की सर्जरी शुरु की है।शीघ्र ही मामले की हकीकत सबके सामने आएगी। हम निर्दोष को बिलकुल नहीं सताएंगे। उनके  िखलाफ कोई भी कार्रवाईकी जाएगी।जो ङ्क्षहसा, तोडफ़ोड़ एवं आगजनी जैसी घटनाओं में सीधे तौर पर शामिल हैउन्हें कतई नहीं बख्शा जाएगा। अभी मामले की जांच तेजी से की जा रही है। जिले स्थिति पूरी तरह शांतिपूर्णहै।
कलेक्टर ने कहा
कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव ने कहा कि किसान आंदोलन को लेकर न्यायिक जांच की जा रही है। प्रशासन की और इस मामले को अधिकृत तौर पर एक टीम गठित कोई जांच नहीं की जा रही। हांलाकि विभाग की आंतरिक जांच की जा रही है। और आंदोलन के वास्तविक कारणोंं का पता लगाने का भी प्रयास किया जा रहा है।   

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