परिजनों का दावा- जिंदा है रामवृक्ष यादव,  कानून की मदद लेंगे 

Mathura, Uttar Pradesh, India
  परिजनों का दावा- जिंदा है रामवृक्ष यादव,  कानून की मदद लेंगे 

जवाहर बाग कांड के मुख्य आरोपी रामवृक्ष यादव की मौत का रहस्य और भी गहराता जा रहा है। पुलिस के दावों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

मथुरा। जवाहर बाग कांड मामले में पुलिस की मुश्किलें काम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रामवृक्ष यादव का दूसरा बेटा राजनारायण अब अपने पिता को ढूढ़ने के लिए कानून की मदद लेने का मन बना रहा है। 2 जून 2016 को जमीन कब्जाने के मामले में भड़की हिंसा के मुख्य आरोपी रामवृक्ष यादव की मौत की बात भले ही पुलिस कहती रही हो लेकिन उसके जिंदा होने की बात आज भी उठ रही है। पुलिस का कहना है कि रामवृक्ष यादव के शव की शिनाख्त जेल में बंद उनके साथी हरनाथ ने की थी। जिसके आधार पर उसको मृत घोषित किया।

रामवृक्ष के दूसरे बेटे का डीएनए नहीं हुआ मैच

रामवृक्ष यादव के दूसरे बेटे राज नारायण ने बताया कि हमें डीएनए के लिए लाया गया था। मेरे बाल और ब्लड का सैंपल लिया गया। वो भी यही चाहता था कि उसके पिता हैं या नहीं। इसकी पुष्टि हो जाए लेकिन डीएनए मैच नहीं हुआ। राज नारायण का कहना है कि पुलिस उन्हें पकड़ कर ले गई थी। इसका मतलब यही है कि वो पुलिस की कस्टडी में आज भी हैं। उनको छिपा कर रखा गया है या अंदर ही अंदर मार दिया हो। इसकी जांच होनी चाहिए। उसने कहा कि वो इस मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग करेगा।
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'पुलिस की गोली से लगी थी एसपी सिटी और एसओ को'  
जवाहर बाग कांड की प्रत्यक्षदर्शी ममता का दावा है कि दो जून को पुलिस ने ही जवाहर बाग में आग लगाई थी। बोलेरो सवार पुलिसकर्मी रामवृक्ष यादव को अपने साथ बोलेरो में ले गए थे। उन्हें पीछे की सीट पर बिठाया गया था। ममता का यह भी दावा है कि एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ संतोष यादव को जो गोली लगी है वो पुलिस के द्वारा ही चलाई गई थी। हम लोगों के पास तो सिर्फ डंडा और झंडा था। उसका भी दावा है कि रामवृक्ष यादव आज भी जिंदा है, क्योंकि उसे जिंदा ही पकड़ा गया था।
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रामवृक्ष की मौत के सबूत नहीं दे पाई पुलिस
रामवृक्ष पक्ष के अधिवक्ता एलके गौतम ने बताया कि पक्षकारों ने रामवृक्ष यादव को जिंदा बताया है। क्योंकि अब तक कोई भी सबूत उसके मरने के पक्ष में नहीं है। हरनाथ सिंह जिनके बारे में पुलिस कहती है कि उसने घटना के बाद रामवृक्ष यादव के शव को देखकर पुष्टि की थी। उसने भी मना कर दिया। उसके मुताबिक ये जबरन लिखवाया गया था। उसने ऐसा कोई बयान नहीं दिया। एलके गौतम का कहना है कि पक्षकारों की ओर से रामवृक्ष यादव को सामने लाने के लिए कानूनी कार्रवाई करेंगे।

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2 जून 2016 को भड़की थी हिंसा

गौरतलब है कि लगभग एक साल पहले 2 जून 2016 को मथुरा के जवाहर बाग पर कब्जा जमाए बैठे रामवृक्ष यादव और उसके साथियों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया था। जिसमें एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ संतोष यादव समेत कई लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस का दावा है कि इस हिंसा में रामवृक्ष यादव भी मारा गया था। लेकिन समय समय पर उसके जिंदा होने की खबरें आती रही हैं।



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