Sawan 2017 के दूसरे Somvar को, कान्हा की नगरी गोपेश्वर में भक्तों का लगा ताता 

Mathura, Uttar Pradesh, India
 Sawan 2017 के दूसरे Somvar को, कान्हा की नगरी गोपेश्वर में भक्तों का लगा ताता 

सावन के दूसरे सोमवार को कृष्ण की नगरी Virndawan के प्रसिद्ध Gopeshwar Mahadev मंदिर पर सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा।

मथुरा। Sawan भगवान शिव को बेहद प्रिय है। श्रावण में भगवान भोलेनाथ की विशेष रुप से आराधना की जाती है। सावन के दूसरे सोमवार को Lord Krishna की नगरी वृंदावन के प्रसिद्ध गोपेश्वर महादेव मंदिर पर सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। दूर दराज से आए शिव भक्तों ने आस्था के साथ गोपेश्वर भगवान का जलाभिषेक कर पूजा अर्चना की ।
 
पांच सोमवार का महा संयोग

इस बार Sawan में करीब 27 साल बाद विशेष संयोग बन रहा है। खास यह कि सोमवार से इस माह की शुरुआत हो रही और समापन भी सोमवार को ही होगा। यह काफी शुभ फलदायक है। सावन का दूसरा सोमवार है और 7 अगस्त को Raksha Bandhan यानी Sawan Purnima है। कई वर्षों बाद इस बार सावन मास में पांच सोमवार पड़ रहे हैं। खास बात यह कि वैधृति योग के साथ सावन प्रारंभ हो रहा है। आयुष्मान योग के साथ इस मास की समाप्ति। 

मिलती है सभी कष्टों से मुक्ति 

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सोमवार, सावन मास, वैधृति योग व आयुष्मान योग सभी के मालिक स्वत: शिव ही हैं। इस लिए इस बार का सावन खास है। पुराणों के अनुसार सावन में भोले शंकर की पूजा, अभिषेक, शिव स्तुति, मंत्र जाप का खास महत्व है। खासकर सोमवार के दिन महादेव की आराधना से शिव और शक्ति दोनों प्रसन्न होते हैं। इस संयोग में ब्रज में गोपी रूप में विराजमान भोलेनाथ की पूजा कर ले तो फिर पुण्य और भी अधिक फलकारी होगा। भगवान आशुतोष की कृपा से दैविक, दैहिक और भौतिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। 

होती है मनोकामना पूर्ण 

ऐसी  मान्यता है कि निर्धन को धन और नि:संतान को संतान की प्राप्ति होती है। कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है बाबा भोले की पूजा से भाग्य पलट सकता है। सावन के पहले सोमवार को महामायाधारी भगवान शिव की आराधना की जाती है। इसी कामना से आज वृन्दावन के अति प्राचीन गोपेश्वर महादेव जी का सुबह से ही दूर दराज से आये भक्तों ने जल, दूध, शहद, घी, शर्करा व पंचामृत से अभिषेक कर वस्त्र, यज्ञोपवित्र, श्वेत और रक्त चंदन भस्म, श्वेत मदार, कनेर, बेला, गुलाब, बिल्वपत्र, धतुरा, बेल फल, भांग आदि से पूजा अर्चना की उसके बाद घी का दीपक से आरती कर क्षमा याचना की ।
 
बड़ी संख्या में आते हैं श्रद्धालु

वृन्दावन के Gopeshwar Mahadev की महिमा के बारे में मंदिर के महंत ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के महारास के दर्शन करने के लिए शिवजी ने गोपी रूप धारण किया था। लीलाधारी भगवान शंकर के ब्रज में स्थापित इस अनोखे शिवलिंग की पूजा अर्चना व दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु वृंदावन आते हैं और पूजा अर्चना कर एक अलग ही आनंद की अनुभूति प्राप्त करते हैं।

 

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