तीन शिफ्ट में 24 घंटे छप रहे नोट, आरबीआई ले रही है सेना की मदद

Rakesh Mishra

Publish: Nov, 30 2016 10:58:00 (IST)

Miscellenous India
तीन शिफ्ट में 24 घंटे छप रहे नोट, आरबीआई ले रही है सेना की मदद

मैसूर के प्रेस में 24 घंटे 500 और 2,000 रुपए के नए नोट छापे जा रहे हैं और करीब 200 जवान इन नोटों को देश भर में पहुंचाने के लिए दिन रात लगे हुए हैं

बेंगलुरु। नोटबंदी के बाद पहली सैलरी आ रही है और लोग अब भी कैश के लिए परेशान हैं। नोटबंदी का ऐलान हुए 3 हफ्ते से ज्यादा समय हो गए, लेकिन हालात जस के तस हैं। सरकार और आरबीआई नए नोटों की आपूर्ति के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। मैसूर के प्रेस में 24 घंटे 500 और 2,000 रुपए के नए नोट छापे जा रहे हैं और करीब 200 जवान इन नोटों को देश भर में पहुंचाने के लिए दिन रात लगे हुए हैं।

मैसूर प्रेस पर 200 जवान तैनात
कैश के संकट को दूर करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने सेना की मदद ले रही है। सेना के कम से कम 200 जवान मैसूर प्रेस पर तैनात हैं और नोटों की 24 घंटे छपाई में स्टाफ की मदद कर रहे हैं। मैसूर स्थित भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड आरबीआई का नए करंसी नोटों की छपाई और आपूर्ति का प्रमुख केंद्र है। नोट की छपाई के सभी 5 प्रेस में से आम तौर पर एक समय में 2 से 3 में छपाई का काम चलता है, लेकिन नोटबंदी के बाद के हालात से निपटने के लिए सभी पांचों प्रेस काम कर रहे हैं। मंगलवार को मैसूर प्रेस में 5.1 करोड़ रुपए की छपाई हुई। प्रेस के स्टाफ तीन शिफ्टों में 24 घंटे काम कर रहे हैं।

चप्पे-चप्पे पर निगरानी
सोमवार से यहां सेना के जवान छपाई के काम में मदद कर रहे हैं। वह खुद भी पेपर के मशीन तक पहुंचाने, उसे मशीन में लोड करने, पैकेजिंग, लोडिंग और अनलोडिंग जैसे तमाम काम कर रहे हैं। ये सभी काम सख्त प्रोटोकॉल और कड़ी सुरक्षा के बीच किए जा रहे हैं। सेना के जवान छपी हुई करंसी के वितरण के दौरान सुरक्षा भी सुनिश्चित कर रहे हैं।

कर्मचारी संघ के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व बीजेपी मंत्री एस.ए. रामदास ने बताया कि जब हमारे प्रधानमंत्री कड़ी मेहनत कर रहे हैं तो हम क्यों नहीं? यहां सभी कर्मचारी सप्ताह के सातों दिन काम कर रहे हैं, लेकिन बहुत ही ज्यादा मांग की वजह से हमें और लोगों की जरूरत हुई। इसलिए आरबीआई ने सेना की मदद ली है। वे मुख्य तौर पर श्रम वाले कामों में हमारी मदद कर रहे हैं और जल्द ही चीजें सामान्य हो जाएंगी। उनकी मौजूदगी से बहुत बड़ी मदद हुई है।

600 कर्मचारियों वाले मैसूर यूनिट से जुड़े सूत्रों के मुताबिक सेना के जवानों की मदद से उन्हें बहुत राहत मिली है। एक सूत्र ने बताया कि नोटबंदी की वजह से उनका काम कई गुना बढ़ गया है और मदद की जरूरत थी। सेना के जवानों के साथ वह कड़ी मेहनत कर रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि जैसे वे युद्ध के मैदान में हैं। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को 500 और 1,000 रुपए के नोटों को अमान्य घोषित करने का ऐलान किया। इसके बाद से ही देश में नोटों का अभूतपूर्व संकट खड़ा हो गया है। 500 और 2,000 रुपए के नए नोटों की आपूर्ति उतनी तेजी से नहीं हो पा रही है जितनी मांग हैं और 100 रुपये के नोटों से जबरदस्त मांग को पूरा करना संभव ही नहीं है।

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