भारत खरीदेगा 145 हॉवित्सर तोप, चीन सीमा पर तैनात होंगी

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भारत खरीदेगा 145 हॉवित्सर तोप, चीन सीमा पर तैनात होंगी

भारत ने 145 M 777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्सर तोप खरीदने के लिए अमरीका के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं

नई दिल्ली। भारत ने 145 M 777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्सर तोप खरीदने के लिए अमरीका के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस समझौते के तहत भारत 737 मिलियन डॉलर (लगभग 5000 करोड़ रुपए) में ये तोपें खरीदेगा। गौरतलब है कि भारत ने नब्बे के दशक में बोफोर्स तोप खरीदने के बाद से अब तक कोई नया तोप सौदा नहीं किया था। हॉवित्सर तोपों को भारतीय सेना की नई 17 माउंटेन स्ट्राइक कोर्प्स को दिया जाएगा ताकि चीन के विरूद्ध आक्रामक क्षमता में बढ़ोतरी हो सके। इन तोपों को भारत-चीन सीमा पर तैनात किया जाएगा।

दोनों देशों के मिलिटरी को-ऑपरेशन ग्रुप की मीटिंग बुधवार को देश का राजधानी में शुरु हुई थी। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार पीएम नरेंद्र मोदी अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने इस डील को मंजूरी दे दी है। समझौते के तहत 145 में से 120 तोपों को भारत में असेंबल किया जाएगा जबकि 25 तोपें पूरी तरह बनाकर भारतीय सेना को उपलब्ध करवाई जाएंगी।

इस डील के बाद अमरीका भारत को सबसे ज्यादा हथियार निर्यात करने वाला देश बन जाएगा। आपको बता दें कि 2014 के पीएम मोदी ने सत्ता में आने के बाद सेना के आधुनिकीकरण के लिए एक के बाद एक कई देशों से हजारों करोड़ के हथियार खरीदने के समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें इजरायल, रूस, फ्रांस, अमरीका सहित जापान भी शामिल हैं। वर्ष 2007 के बाद से भारत और अमेरिका के बीच 15 बिलियन डॉलर के रक्षा सौदे हो चुके हैं।

इसलिए खास है हॉवित्सर तोप
हॉवित्सर तोपों की खासियत उन्हें सबसे अलग बनाती हैं। इनका वजन 4 टन से कुछ अधिक हैं। इन्हें बनाने में टाइटेनियम धातु का इस्तेमाल किया गया है जिसके कारण ये काफी मजबूत है और एस्ट्रीम कंडीशंस में भी काम करती हैं। इन तोपों को ऊंचे सामरिक ठिकानों पर आसानी से ले जाया जा सकता है। इन्हें  16,000 फीट की ऊंचाई तक स्थापित किया जा सकता है।

भारत में महिन्द्रा के साथ मिलकर एसेंबल की जाएंगी हॉवित्सर तोप
इन तोपों को बनाने वाली कंपनी बीएई सिस्टम्स की अमरीकी सबसिडियरी भारत को इन तोपों की सप्लाई करने के लिए अग्रणी भारतीय कंपनी महिंद्रा के साथ मिलकर काम करेगी। शुरुआती दो तोपों की सप्लाई छह महीने में की जाएगी, उसके बाद हर महीने दो तोपों की सप्लाई होगी।

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