योग के ये 8 अंग आपके लिए हो सकते हैं बहुत उपयोगी

Miscellenous India
योग के ये 8 अंग आपके लिए हो सकते हैं बहुत उपयोगी

वैसे तो योग के कई अंक हैं, लेकिन इनमें से कुछ ऐसे अंग हैं जिनको रोजाना करने से आपको अद्भुत लाभ होगा। 

नई दिल्ली। 21 जून यानी बुधवार को पूरे देश में योग दिवस मनाया जाएगा। योग दिवस को मनाने के लिए सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लखनऊ में होने वाले योग दिवस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आज रवाना होंगे। वैसे तो योग के कई अंक हैं, लेकिन इनमें से कुछ ऐसे अंग हैं जिनको रोजाना करने से आपको अद्भुत लाभ होगा। यहां हम आपको योग के ऐसे ही आठ अंग बताने जा रहे हैं जो आपके लिए बहुत उपयोगी साबित होंगे। 

Image may contain: one or more people, people sitting and indoor
ये भी पढ़ें-
yoga-day-10-thousand-years-old-is-the-elixir-of-yoga-1604728/" target="_blank">विश्व योग दिवस: 10 हजार साल पुराना है योग का अमृत

ये हैं आठ उपयोगी अंग
1- यम: इसमें पांच क्रियाएं आती हैं- अहिंसा, झूठ न बोलना, किसी चीज का लोभ न करना, किसी भौतिक इच्छा का न होना और किसी चीज पर अधिकार न जताना। 
2- नियम: यह योग का एक प्रमुख अंग है। इसके करने से पवित्रता, संतुष्टि, तपस्या, अध्ययन और आराध्य के प्रति समर्पण प्राप्त होता है। 
3- धारणा: योग के इस अंग से एकाग्रता या अपने लक्ष्य पर ध्यान लगाना होता है। 
4- ध्यान: ध्यान योग का एक महत्वपूर्ण अंक है। इसके माध्यम से मनुष्य को गहन चिंतन करने में मदद मिलती है।
5- प्रत्यहार: यह अमूर्त अंग है, जिसमें बाहरी वस्तुओं से शरीर को अलग किया जाता है। 
6- प्राणायाम: सांसों को नियंत्रित करना और जीवन शक्ति को नियंत्रित करना।
7- आसन: योग का सबसे प्रचलित अंग। इसके अंतर्गत बैठने के आसन आते हैं। पतांजलि सूत्र में ध्यान में इनका वर्णन है। 
8- समाधि: इसके दो प्रकार हैं। पहला सविकल्प, इसमें कुछ समय तक समाधि में रहते हैं। दूसरा अविकल्प। इसमें दुनिया में वापस आने का कोई मार्ग नहीं होता।
Image may contain: 3 people, people sitting
ये भी पढ़ें-
narendra-modi-visit-lucknow-news-in-hindi-1604701/">InternationalYogaDay2017 : दो दिवसीय लखनऊ दौरे पर मोदी, जानिए रूट डायवर्जन प्लान

योग के प्रकार
1- ज्ञान योग: दर्शनशास्त्र की हर शाखा ज्ञान योग में आती है। इसमें जीवन की उत्पत्ति, व्यवहार और अन्य क्रियाओं की दार्शनिक व्याख्या की जाती है।
2- भक्ति योग: अपने आराध्य को याद करते हुए जीवन के आध्यत्मिक पहलू और मर्म को जानना। 
3- कर्म योग: भौतिक और आध्यात्मिक सुख-सुविधाओं के लिए किसी को नुकसान पहुंचाए बिना कर्म पथ पर चलना। 

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned