कल सबसे लंबा दिन, सबसे छोटी रात, जानिए कैसे?

prashant jha

Publish: Jun, 20 2017 10:08:00 (IST)

Miscellenous India
कल सबसे लंबा दिन, सबसे छोटी रात, जानिए कैसे?

 कहा जाता है कि इंसान का साया कभी उसका साथ नहीं छोड़ता। लेकिन बुधवार को अगर आप कर्क रेखा के पास हों तो यह कहावत झूठी साबित हो जाएगी। 

बेंगलुरु: कहा जाता है कि इंसान का साया कभी उसका साथ नहीं छोड़ता। लेकिन बुधवार को अगर आप कर्क रेखा के पास हों तो यह कहावत झूठी साबित हो जाएगी। दरअसल, 21 जून को साल का सबसे बड़ा दिन होता है और इस दिन सूर्य देर तक
चमक बिखेरता है। वहीं अगर आप कर्क रेखा के करीब (उज्जैन के आसपास) हैं तो दोपहर के समय आपकी परछाईं भी आपका साथ छोड़ देगी क्योंकि यहां सूर्य लंबवत होगा।

छायाएं छोटी बनती हैं
भारतीय ताराभौतिकी संस्थान के प्रोफेसर (से.नि.) रमेश कपूर ने बताया कि 21 जून की दोपहर में सूर्य पृथ्वी से आकाश में सर्वाधिक ऊंचाई पर होता है। तब परछाइयां साथ छोडऩे लगती हैं यानी छायाएं छोटी बनती हैं। कर्क रेखा पर इस दिन दोपहर के समय छाया नहीं बनती। देश की प्राचीनतम कालगणना की नगरी उज्जैन कर्क रेखा के पास है और यहां सूर्य लंबवत होता है। यहां दोपहर में परछाइयां नहीं बनती। प्रोफेसर कपूर ने बताया कि पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाती है और अपने अक्ष पर भी घूमती है। अपनी कक्षा के प्रति इसका अक्ष 23.5 डिग्री झुका हुआ है। यह अक्ष एक ही दिशा की ओर रहता है। अक्ष के झुकाव के कारण सूर्य का प्रकाश पृथ्वी के गोलाद्र्धों पर सदैव एक समान नहीं पड़ता। इसलिए दिन-रात की अवधि भी एक समान नहीं रहती। 

               longest day of the year in india के लिए चित्र परिणाम


21 जून को सबसे लंबा दिन, छोटी रात
गर्मियों में उत्तरी गोलाद्र्ध में सूर्य का प्रकाश ज्यादा और दक्षिणी गोलाद्र्ध में सूर्य का प्रकाश कम अवधि के लिए पड़ता है। इससे उत्तरी गोलाद्र्ध में दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती हैं। 21 जून को साल का सबसे लंबा दिन और सबसे छोटी रात होती है। इस दिन को ग्रीष्म अयनांत भी कहते हैं। इस खगोलीय घटना के अंतर्गत 21 जून के बाद सूर्य दक्षिणायन हो
जाता है और दिन छोटे तथा रातें लंबी होने लगती हैं। 21 सितम्बर को रात और दिन की अवधि बराबर हो जाती है। इसके बाद दिन रातों के मुकाबले छोटे होते जाते हैं। 21 दिसम्बर को साल का सबसे छोटा दिन और सबसे लंबी रात होती है। यह दिन शीत अयनांत कहलाता है। यह चक्र वार्षिक है और दक्षिणी गोलाद्र्ध में ठीक इसके उलटा होता है।

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कुतुब मीनार की छाया भी पड़ेगी छोटी
प्रोफेसर कपूर ने बताया कि 21 जून को कई बार दिल्ली में स्थित कुतुबमीनार की छाया मापने के कार्यक्रम हुए। दरअसल, कुतुबमीनार की ऊंचाई 72.5 मीटर है और इसका आधार 14.3 मीटर है। शीर्ष पर इसकी चौड़ाई 2.75 मीटर है। 21 जून के दिन दोपहर में इसकी परछाई महज 0.9 मीटर होगी। दिलचस्पी की बात है कि 2300 साल पहले इसी पद्धति से यूनानी वैज्ञानिक एराटोस्थेनीज ने पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयास किया था। विषुव दिन जो 21 मार्च, 21 सितम्बर को पड़ते हैं उस दिन भी ऐसी छाया मापन की गणना की जा सकती है।

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आज बेंगलूरु में लगभग 13 घंटे का दिन
21 जून को श्रीनगर में 14 घंटे 25 मिनट का दिन और 9 घंटे 35 मिनट की रात होगी। वहीं राजधानी दिल्ली में 13 घंटे 58 मिनट का दिन और 10 घंटे 2 मिनट की रात जबकि बेंगलूरु में 12 घंटे 54 मिनट का दिन और 11 घंटे 7 मिनट की रात होगी।

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