नवजात बच्ची का चेहरा देखते ही मां ने छोड़ा लावारिस, लेकिन बच्ची के दादा ने जो किया उसे जानकर आप भावुक हो जाएंगे!

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नवजात बच्ची का चेहरा देखते ही मां ने छोड़ा लावारिस, लेकिन बच्ची के दादा ने जो किया उसे जानकर आप भावुक हो जाएंगे!

कहा जाता है कि जब इंसानियत पर अपना रंग चढ़ता है तब बाकी सारे रंग फीके पड़ जाते हैं और बुराई हार जाती है।

एक मां द्वारा अपने नवजात बच्चे को त्यागने का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुन कर लोग हैरान हैं। इस मासूम नवजात बच्ची के साथ उसी की मां ने जो सुलूक किया वो समझ और इंसानियत से परे है. लेकिन इस मामले में एक ऐसा मोड़ भी है जानकर आप यह भी कहेंगे कि जब तक इंसान है तब तक इंसानियत भी है। मामला मुंबई से करीब 138 किलोमीटर दूर बसे एक छोटे से गांव का है।

यह था मामला-
इस महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया था। जन्म के बाद जैसे ही महिला ने अपनी इस नवजात बच्ची का मुंह देखा तो उससे अपने सारे रिश्ते तोड़ कर उसे त्याग दिया। 

श्रापित समझ मां ने लावारिस छोड़ दिया, फिर दादा ने किया रुलाने वाला काम
दरअसल इस बच्ची का जन्म समय से पहले ही हो गया था और उसे एक अलग तरह की अजीबो-गरीब बीमारी भी थी। इस बीमारी और समय से पहले पैदा होने के कारण ही इस बच्चे के शरीर की त्वचा कुछ अलग तरह की थी और सिकुड़ी हुई थी। उसका चेहरा भी कुछ अजीब प्रकार का था।लेकिन इसकी वजह सिर्फ और सिर्फ बीमारी और समय से पहले पैदा होना ही था। लेकिन उसकी मां और उसके गांव वाले इस बच्ची को श्रापित कहकर डरने लगे। जबकि डॉक्टर्स का भी यही कहना था कि बच्ची समय से पहले पैदा हुई है और मां के गर्भ में न्यूट्रीशन और ऑक्सीजन की कमी के कारण उसका ऐसा हाल हो गया था।

श्रापित समझ मां ने लावारिस छोड़ दिया, फिर दादा ने किया रुलाने वाला काम
हद तो तब हो गई जब इस बच्ची की मां ने ही उसे दूध पिलाने से मना कर दिया और उसे त्याग दिया। भले ही एक महिला ने एक मां होने के अपने कर्तव्य और फ़र्ज़ निर्वहन नहीं किया लेकिन यह सब देख कर वहां खड़े उसे बच्ची के दादा का दिल पिघल गया। उसके 50 साल के दादा दिलीप ने उसकी जिम्मेदारी उठाई। वो बच्ची को अपने साथ ले आए। उन्होंने अकेले ही बच्ची का का ख्याल रखा और उसके इलाज एक लिए लोगों से मदद मांगी।

श्रापित समझ मां ने लावारिस छोड़ दिया, फिर दादा ने किया रुलाने वाला काम
कहा जाता है कि जब इंसानियत पर अपना रंग चढ़ता है तब बाकी सारे रंग फीके पड़ जाते हैं और बुराई हार जाती है। इस बच्ची के मामले में भी ऐसा ही कुछ हुआ। पहले दादा ने उसकी जिम्मेदारी उठाई।
इसके बाद जब मुंबई के वाडिया अस्पताल को इस मामले की जानकारी मिली तब उसने उन्होंने उसका इलाज मुफ्त में करने का फैसला किया। बच्ची का इलाज करने वाले डॉक्टर्स का कहना था कि जब बच्ची को अस्पताल लाया गया था तब वो बहुत ज्यादा कमजोर थी। लेकिन धीरे-धीरे उसके स्वास्थ में सुधार आने लगा। अब बच्ची की हालत में काफी सुधार है और वो अपने दादा के साथ ही रह रही है।

इस बच्ची के इलाज़ के लिए करीब 5 लाख रूपये की जरूरत थी लेकिन अस्पताल द्वारा की गई मदद और बच्ची के दादा की कोशिशों के कारण वो बच्ची आज ज़िंदा है।

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