बंद होंगी एसी-2 बोगियां, वापस होगी फ्लैक्सी किराया प्रणाली

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बंद होंगी एसी-2 बोगियां, वापस होगी फ्लैक्सी किराया प्रणाली

यात्रियों के विरोध के कारण फ्लैक्सी किराया प्रणाली को वापस लेकर सभी गाडिय़ों के मूल किराए में एक समान बढ़ोत्तरी की जाएगी

नई दिल्ली। रेलवे ने वातानुकूलित द्वितीय श्रेणी की बोगियों को चरणबद्ध ढंग से हटाने और उनकी जगह वातानुकूलित थ्री टियर (एसी-3) कोचों को बढ़ाने का फैसला किया है और संकेत दिए हैं कि यात्रियों के विरोध के कारण फ्लैक्सी किराया प्रणाली को वापस लेकर सभी गाडिय़ों के मूल किराए में एक समान बढ़ोत्तरी की जाएगी। रेलवे बोर्ड के आधिकारिक सूत्रों ने
बताया कि रेलवे की 13 हजार यात्री गाडिय़ों में धीरे-धीरे एसी-2 कोचों को कम करते हुए बंद किया जाएगा और उनकी जगह एसी-थ्री कोचों की संख्या को बढ़ाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जिन यात्री गाड़यिों में 20 या 22 कोच लगते हैं और उन्हें 24 कोच की गाड़ी बनाने का जो निर्णय हुआ है उनमें एसी-3 कोच ही बढ़ाये जायेंगे । सूत्रों ने कहा कि एसी-3 कोचों से परिचालन लागत निकल रही है और पूरी तरह से एसी-3 कोच वाली गाडिय़ों से कुछ मुनाफा भी हो रहा है। उन्होंने कहा कि रेलवे की कोशिश है कि गैर वातानुकूलित शयनयान श्रेणी के कोचों को भी कम करके एसी-3 कोचों को बढ़ाया जाए।

राजधानी, शताब्दी, दूरंतो गाडिय़ों में फ्लैक्सी किराया प्रणाली की समीक्षा से जुड़े सवालों पर आधिकारिक सूत्रों ने संकेत दिया कि इस प्रणाली को वापस लेने की दशा में वैकल्पिक उपायों पर विचार किया जा रहा है। यह भी सोचा जा रहा है कि सभी गाडिय़ों के मूल किराए में 10 से 15 फीसदी की वृद्धि की जाए। उन्होंने कहा कि मासिक सीजन टिकट के किरायों को
बढ़ाने के बारे में भी विचार किया जा रहा है।

जल्द निकालेंगे समाधान
गाडिय़ों की प्रतीक्षा सूची वाले टिकटों को रद्द कराने के कड़े नियमों के कारण आमजन को होने वाली परेशानी का उल्लेख करने पर उन्होंने आश्वासन दिया कि इसका समाधान भी जल्द निकाला जाएगा। गाडिय़ों की लेटलतीफी को लेकर हो रही आलोचना के बारे में उन्होंने कहा कि जल्द ही यात्रियों को एसएमएस पर उनकी गाड़ी के विलंब की स्थिति की जानकारी दी
जाएगी।

सूत्रों के अनुसार वर्ष 2015-16 में गाडिय़ों की समयबद्धता 75.28 प्रतिशत थी जो 2016-17 में 76.53 प्रतिशत हो गई, पर मेल/एक्सप्रेस गाडिय़ों के मामले में 2015-16 में समयबद्धता 77.51 प्रतिशत थी जो 2016-17 में घटकर 76.69 प्रतिशत पर आ गई। विलंब के लिए कोहरे को बड़ा कारण बताते हुए सूत्रों ने कहा कि देश के सात जोन में समयबद्धता 90 प्रतिशत से अधिक और पांच जोन में 80 -90 प्रतिशत के दायरे में रही।

उच्च गति वाली गाडिय़ों पर पड़ रहा है असर
विलंब के कारणों पर के बारे में सूत्रों ने बताया कि समूचे रेल तंत्र में इस समय ट्रैक नवीकरण, अनुरक्षण कार्य एवं सरंक्षा कार्य चल रहे हैं। देश के सात मुख्य मार्गों पर 63 प्रतिशत यातायात का भीषण दबाव है। देश में कुल 1219 सेक्शनों में से 492 सेक्शनों पर शत-प्रतिशत से बहुत अधिक यातायात है। इन पटरियों पर माल गाड़ी, पैसेंजर, मेल एक्सप्रेस, राजधानी, शताब्दी आदि सभी प्रकार की गाडिय़ां चलती हैं और उनकी गति में अंतर होने के कारण एक सेक्शन में गाडिय़ों के आवागमन में निश्चित अंतर रखना जरूरी है। इससे उच्च गति वाली गाडिय़ों पर अधिक असर पड़ रहा है।

कोचों को लेकर हो रही है कठिनाई
सूत्रों के अनुसार इस समय दिक्कत कोचों के निर्माण की गति को लेकर है। वर्तमान में रेलवे की कुल क्षमता चार हजार कोचों के निर्माण की है। करीब 1200 कोच पुराने कोचों की जगह लेते हैं और बाकी कोचों को स्पेशल ट्रेनों एवं नई गाडिय़ों के लिए दे दिया जाता है। इसलिए मौजूदा गाडिय़ों की लेटलतीफी को दूर करने के लिए अतिरिक्त रैक उपलब्ध कराने में भी कठिनाई हो रही है।

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