माला गूंथकर पतियों का जीवन संवार रही महिलाएं, 1.5 Cr का टर्नओवर  

Anuj Shukla

Publish: Feb, 16 2017 04:01:00 (IST)

Miscellenous India
माला गूंथकर पतियों का जीवन संवार रही महिलाएं, 1.5 Cr का टर्नओवर  

ये महिलाएं तुलसी के पौधे की सूखी टहनियों से मालाएं बनाती हैं और अपने घर-परिवार को चलाने में सहयोग कर रही हैं। 

- दिनेश मिश्र

भरतपुर। राजस्थान के भरतपुर जिले के गांव तुलसी के पौधों से लहलहा रहे हैं। जाटों के राजा सूरजमल का कभी गढ़ रहे कुम्हेर के गांवों में महिलाओं की उम्मीदें भी लहलहा रही हैं। ये महिलाएं तुलसी के पौधे की सूखी टहनियों से मालाएं बनाती हैं और अपने घर-परिवार को चलाने में सहयोग कर रही हैं। तुलसी की ये माला इन महिलाओं के लिए कुटीर उद्योग का रूप ले चुका है। महिलाओं के इस काम की वजह से गांव का सालाना टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपए पहुंच गया है।  

गांव खेरिया पुरोहित के मानसिंह का परिवार की महिलाएं स्वयंसहायता समूह बनाकर सशक्तिकरण के नए आयाम गढ़ रही हैं। मानसिंह की बहू प्रीति जैसी यहां कई ऐसी महिलाएं हैं, जो माला बनाने से होने वाली आय से अपने पतियों को पढ़ा भी रही हैं। शादी के बाद प्रीति ने न सिर्फ खुद एमए किया, बल्कि अपने पति को भी एमए करवाया। उसके जैसी यहां कई बहुएं मिसाल कायम कर रही हैं। मानसिंह की बेटी रजनी भी अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठा रही है। माला गूंथने वाली ये महिलाएं खुद तो शिक्षित हो रही हैं, साथ में पुरुषों को भी शिक्षा के लिए प्रेरित कर रही हैं। पुरुष यहां खेतों में तुलसी की खेती करते हैं और महिलाएं माला गूंथती हैं।

गांव में राधा और मीरा जैसे 8 समूह
हरेक गांव में महिलाओं के 8 स्वयंसहायता समूह हैं। हरेक समूह में कम से कम 12 महिलाएं हैं। इन्हें राधा समूह, महिला जागृति समूह और मीरा समूह जैसे नाम दिए गए हैं। यानी पूरे गांव में तकरीबन 100 महिलाएं इस काम में जुड़ी हुई हैं।

लुपिन फाउंडेशन कर रहा मदद
महिलाओं को सशक्त बनाने में लुपिन फाउंडेशन का अहम योगदान है। लुपिन फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक सीताराम गुप्ता ने बताया कि संस्था पूरे जिले में महिलाओं को सशक्त बनाने के काम में जुटी है। संस्था ने भरतपुर जिले में करीब 3500 स्वयं सहायता समूह गठित कर 1700 समूहों को आसान शर्तों पर कर्ज मुहैया कराया है। समूह की महिलाएं छोटी और बड़ी खूबसूरत मालाएं बनाती हैं। 20 छोटी मालाओं का गट्ठर करीब 150 रुपए में बनता है। हालांकि, बाजारों में इनकी कीमत 300 से 400 तक पहुंच जाती है। 

बनारस, हरिद्वार और उज्जैन तक पहुंचती हैं इनकी मालाएं
इन महिलाओं की गूंथी मालाएं हरिद्वार, इलाहाबाद, द्वारिका, उज्जैन समेत देश के कई धार्मिक स्थलों तक पहुंचती हैं। तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल धूपबत्ती बनाने में होता है। इसकी पत्तियों घरेलू दवाइयां भी बनाने में किया जा रहा है। यानी तुलसी के पौधे का पूरा इस्तेमाल किया जाता है।

गांव का टर्न ओवर 1.5 करोड़ रुपए
गांव की तस्वीर इतनी बदल चुकी है कि गांव खेरिया पुरोहित के 120 परिवारों के लोग तुलसी की खेती करते हैं और उसकी माला और धूपबत्ती भी बनाते हैं। इससे पूरे गांव का टर्न ओवर 1.5 करोड़ रुपए सालाना है।

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