जल्लीकट्टू के सांड के पेट से निकली हैरान कर देने वाली ऐसी चीजें, जिन्हें जान कर सहम जाएंगे आप!

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जल्लीकट्टू के सांड के पेट से निकली हैरान कर देने वाली ऐसी चीजें, जिन्हें जान कर सहम जाएंगे आप!

खबर के मुताबिक सर्जरी के बाद सांड के पेट से चिकित्सकों ने 38.4 किलोग्राम प्लास्टिक की थैलियां, एक एलईडी बल्ब, सेफ्टी पिन, नाखून और रस्सी निकाली...

तमिलनाडु: हाल ही के दिनों में जल्लीकट्टू को लेकर तमिलनाडु से लेकर दिल्ली तक बवाल मचा था। फसल कटाई के मौके पर तमिलनाडु में चार दिन का पोंगल उत्सव मनाया जाता है जिसमें तीसरा दिन मवेशियों के लिए होता है। तमिल में जली का अर्थ है सिक्के की थैली और कट्टू का अर्थ है बैल का सिंग। जल्लीकट्टू को तमिलनाडु के गौरव तथा संस्कृति का प्रतीक माना जाता है। इस खेल की परंपरा 2500 साल पुरानी बताई जाती है।

लेकिन अब इस खेल के पैमाने या यूं कहें तो इस परंपरा के तरीके में बदलाव नजर आने लगा है. लोग अपनी आस्था और अपने आनंद के लिए जानवरों पर क्रूरता दिखाई जाने लगी है। यही कारण है कि पशु प्रेमी इसके खिलाफ आवाज उठाने लगे हैं। इस खेल में रोमांच लाने के लिए बैलों को भड़काया जाता है इसके लिए उन्हें शराब पिलाने, नुकीली चीजों से दागने, उनपर सट्टा लगाने से लेकर उनकी आंखों में मिर्च डाला जाता है और उनकी पूंछों को मरोड़ा तक जाता है, ताकि वे तेज दौड़ सकें। इन्हीं तरह की क्रूरता के बीच जल्लिकट्टु में इस्तेमाल होने वाले एक सांड की खबर आई है जिसके पेट से हैरान कर देने वाली वस्तुएं बरामद हुई हैं।

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दरअसल, तंजावुर के एक संस्थान के पशु चिकित्सकों ने एक सांड के पेट से 38.4 किलोग्राम प्लास्टिक की थैलियां और एक एलईडी बल्ब निकाला है।

एक अंग्रेजी अखबार की खबर के मुताबिक तिरूचिरापल्ली जिले का अय्यप्पन सांड को भूख न लगने और कमजोरी की शिकायत के बाद बुधवार को यहां वेटर्निटी कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के टीचिंग वेटरनली क्लीनिकल कंप्लेक्स (टीवीसीसी) लेकर आया था। इस सांड का इस्तेमाल जल्लीकट्टू में किया गया था।

जांच के बाद उसकी सर्जरी की गई। खबर के मुताबिक सर्जरी के बाद
सांड के पेट से चिकित्सकों ने 38.4 किलोग्राम प्लास्टिक की थैलियां, एक एलईडी बल्ब, सेफ्टी पिन, नाखून और रस्सी निकाली।

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