दान प्रबंधन में टीसीएस तिरुपति बालाजी मंदिर की मदद कर रही

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दान प्रबंधन में टीसीएस तिरुपति बालाजी मंदिर की मदद कर रही

टीसीएस ने ई-डोनेशन से लेकर ई- प्रसाद व ई-एकोमोडेशन की व्यवस्था को अपग्रेड किया।

हैदराबाद. दुनिया के सबसे अमीर तिरुपति बालाजी मंदिर में नोटबंदी के बाद ज्यादा दान आ रहा है। सही प्रबंधन और डोनरों का हिसाब रखने में देश की बड़ी आईटी कंपनी टीसीएस मंदिर प्रशासन का सहयोग कर रही है। इसके तहत टीसीएस ने ई-डोनेशन से लेकर ई- प्रसाद व ई-एकोमोडेशन की व्यवस्था को अपग्रेड किया है।

इससे इतर कंपनी मंदिर के लिए ऐसा अत्याधुनिक डिजिटल इंटीग्रेटेड सिस्टम तैयार कर रही है जिसकी मदद से पूजा, दर्शन, प्रसाद की खरीद से लेकर डोनेशन का सारे काम एक साथ हो सकें। इस सिस्टम से डोनर की सही जानकारी भी वैरिफाई हो पाएगी। हालांकि ई-दर्शन टोकन जैसी कुछ सुविधाएं नोटबंदी के फैसले से पहले ही ऑनलाइन थी मगर आठ नवंबर के बाद बेहतर प्रबंधन के बाद टीसीएस के साथ मिलकर व्यवस्था को पूरी तरीके से डिजिटल कर दिया गया है। ई-डोनेशन के जरिये हर डोनर की जानकारी दर्ज की जा रही है। ई-चालान, ई-दर्शन व ई-सेवा और ई-एकोमोडेशन से इस डिजिटल सर्विस का प्रयोग करने वाले श्रद्धालुओं का ब्योरा जुटाने में मदद मिल रही है। इससे कैश देने वाले लोगों की जानकारी मिलने में मदद मिलेगी।

रोजाना 4.2 करोड़ रुपये का दान

नोटबंदी के बाद तेजी से दान की राशि में बढ़ोतरी हुई। रोजाना 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन करने मंदिर पहुंच रहे हैं। पहले रोजाना लगभग तीन करोड़ रुपये कैश व चेक या ई-पेमेंट के जरिये दान आता था। अब यह आंकड़ा बढ़कर 4.2 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। कैश में 500 और 1000 के पुराने नोट ज्यादा हैं। बता दें कि यह मंदिर आंध्रप्रदेश की तिरुमाला पहाडिय़ों पर स्थित है। इसे दुनिया का सबसे अमीर मंदिर कहा जाता है। हर साल औसतन 1100 करोड़ रुपये का चढ़ावा चढ़ता है। टीसीएस के प्रवक्ता ने बताया कि कंपनी कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉनसिबिलिटी (सीएसआर) के तहत मंदिर प्रशासन के लिए काम कम रही है।

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