RTI से हुआ बड़ा खुलासा: कांग्रेस के बनाए कानून से भ्रष्टाचार से निपट रही मोदी सरकार

Noida, Uttar Pradesh, India
RTI से हुआ बड़ा खुलासा: कांग्रेस के बनाए कानून से भ्रष्टाचार से निपट रही मोदी सरकार

मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार से निपटने के लिए नहीं बनाए कोई नियम

जय प्रकाश, मुरादाबाद। केंद्र की मोदी सरकार देश से भ्रष्टाचार और कालेधन से निपटने के लिए कितने ही दावे कर ले लेकिन बीते ढाई साल से अधिक समय में मोदी सरकार ने ऐसा कोई नया नियम या कानून नहीं पारित किया और न बनाया। जिससे इस पर लगाम कसी जा सके। भ्रष्टाचार रोकने के लिए पिछली कांग्रेस सरकार में बने कानूनों का ही उपयोग की जा रहा है। यही नहीं इसमें मोदी सरकार का नोटबंदी का कानून भी शामिल नहीं है। जिससे भाजपा के उन दावों की पोल खुल रही है कि वो इस पर कानून बनाकर ठोस कदम उठाएगी। जी हां! ये चौंकाने वाली जानकारी एक आरटीआई में मिली है। जिसमें कार्मिक, लोक शिकायत एवम पेंशन मंत्रालय ने दी है।

Image may contain: text

दरअसल मुरादाबाद के रहने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट पवन अग्रवाल ने प्रधानमंत्री कार्यालय से ये सूचना मांगी थी कि बीते ढाई वर्ष से अधिक समय में मोदी सरकार द्वारा जो भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए मुहिम चलाई जा रही है, उसमें कौन कौन सी योजनाएं अथवा आदेश पारित किए गए हैं। पवन के दावों के मुताबिक जवाब में भारत सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय विभाग जन सूचना अधिकारी व अपर सचिव सरिता नायर ने जो सूचना भेजी है। वो मोदी सरकार के दावों के विपरीत है। मोदी सरकार ने ऐसा कोई नया नियम या कानून नहीं बनाया, जो भ्रष्टचार पर अंकुश लगा सके। जवाब में जो जिक्र किया गया है वो इस प्रकार है...

Image may contain: text

-भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 का अधिनियम.
-सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 का अधिनियम
-लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम 2013
-विहिसिल ब्लोयेर प्रोटेक्शन एक्ट 2011 का अधिनियम
-निविदा और संविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता के सम्बन्ध में केंद्रीय सतर्कता आयोग द्वारा पारदर्शिता पर व्यापक अनुदेश जारी करना।
-संगठनों को मुख्य सरकारी प्रापण गतिविधियों में सत्यनिष्ठा समझौता अपनाने के निर्देश देते हुए केंद्रीय सतर्कता आयोग द्वारा अनुदेश जारी करना, मुख्य प्रापर्नो में सत्यनिष्ठा समझौता अपनाने के लिए राज्य सरकारों को सलाह दी गयी है।
-ई शासन का प्रारंभ और प्रक्रियाओं व प्रणालियों को सरल करना।
-नागरिक चार्टर जारी करना।
-वर्ष 2011 में भ्रष्टाचार के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र कन्वेशन का अनुसमर्थन करना।
-केंद्र सरकार के अखिल भारतीय सेवाओं के सभी सदस्यों तथा अन्य समूह क अधिकारियों की अचल  संपत्ति विवरण को सार्वजनिक अधिकार क्षेत्र में रखना।
-विभिन्न राज्यों में केवल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के मामलों की सुनवाई के लिए 92 अतिरिक्त विशेष न्यायालयों को गठित जारी करने का आदेश करना।

इसके आलावा जवाबी पत्र में सरकार को भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में प्रतिबद्ध बताया गया है। लेकिन क्या नियम या कानून नहीं बना है। इसका कोई जिक्र नहीं है।

Image may contain: text

आरटीआई एक्टिविस्ट पवन अग्रवाल कहते हैं कि इस जवाब से मेरे साथ तमाम देश के नागरिकों को निराशा हाथ लगी है। क्योंकि मोदी सरकार लगातार भ्रष्टाचार पर मुखर है। जबकि ऐसा कोई भी कानून उसके द्वारा पारित नहीं करना, उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। यही नहीं पवन कहते हैं कि नोटबंदी जैसा महत्वपूर्ण कदम भी इसमें शामिल नहीं है। फिलहाल अभी दो सूचनाओं की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गयी है। वहीं इस जवाब से यही लगता है कि मोदी सरकार की भ्रष्टाचार की लड़ाई मुखर ज्यादा है प्रभावी कम।

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned