Movie Review:  रॉ एजेंट्स की हकीकत से रूबरू कराती 'फोर्स 2'

Dilip chaturvedi

Publish: Nov, 18 2016 02:05:00 (IST)

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Movie Review:  रॉ एजेंट्स की हकीकत से रूबरू कराती 'फोर्स 2'

स्टारकास्ट : जॉन अब्राहम, सोनाक्षी सिन्हा, ताहिर राज भसीन, जेनेलिया डीसूजा, पारस अरोड़ा, नरेंद्र झा, रेटिंग : 3/5

बैनर : सनशाइन पिक्चर्स प्रा. लि., जेए एंटरटेनमेंट
निर्माता : विपुल अमरुतलाल शाह, वायकॉम मोशन पिक्चर्स, जॉन अब्राहम
निर्देशक : अभिनय देव
जोनर : एक्शन, थ्रिलर 

रोहित के. तिवारी/मुंबई ब्यूरो। 'देल्ही बेली' के निर्देशन की कमान संभाल चुके बॉलीवुड डायरेक्टर अभिनय देव में इस बार 'फोर्स 2' लेकर हाजिर हुए हैं। उन्होंने इसमें धमाकेदार एक्शन समेत थ्रिलर का तड़का लगाने का पूरा प्रयास किया है। साथ ही उन्हें इस फिल्म से काफी उम्मीदें भी हैं। 

कहानी... 
126:48 मिनट की पूरी कहानी चाइना के संघाई से शुरू होती है, जहां भारतीय रॉ एजेंट के 20 में से तीन एजेंट को मार दिया जाता है। इनमें एक हरीश चतुर्वेदी भी मारा जाता है और वह मुंबई पुलिस के इंस्पेक्टर यशवर्धन (जॉन अब्राहम) का घनिष्ठ मित्र होता है। फिर एक दिन हरीश की ओर से भेजी की एक पुस्तक यशवर्धन को मिलती है, जिसमें उसके मरने का कारण कोडिंग व्यवस्था में होता है। इस को लेकर दिल्ली स्थित रॉ हेड क्वार्टर में बैठक होती है, जहां यशवर्धन उस पुस्तक को लेकर पहुंचता है। अब मुंबई पुलिस का इंस्पेक्टर यशवर्धन और रॉ एजेंट केके (सोनाक्षी सिन्हा) दोनों चाइना के लिए रवाना होते हैं कि आखिर रॉ की टीम में रहकर उनकी जानकारी दूसरों तक पहुंचा रहा है, जिसकी वजह से चाइना में आए दिन रॉ एजेंट मारे जा रहे हैं। वहां पहुंचते ही उन्हें शिव शर्मा (ताहिर राज भसीन) नाम के एजेंट पर शक होता है और उसे पकडऩे के लिए वे उसके घर जाते हैं, लेकिन वह वहां से भाग निकलता है। फिर जैसे-तैसे वह पकड़ में आता है, फिर उसे दिल्ली लाने के लिए एयरपोर्ट तक यशवर्धन और केके पहुंचने की कोशिश करते हैं, लेकिन शिव के आदमियों को उनकी हर एक मूवमेंट की खबर पहले से ही हो जाती थी। दरअसल, शिव ने केके की घड़ी में एक चिप लगा दी थी, जिसकी वजह से वह एक बार फिर भागने में सफल हो जाता है। इसी के साथ फिल्म दिलचस्प मोड़ लेते हुए आगे बढ़ती है। 

अभिनय : 
जॉन अब्राहम अपने पुराने ही अंदाज में लोगों से लड़ते-भिड़ते दिखाई दिए और उन्होंने वाकई में इस बार भी कुछ अलग करने की पूरी कोशिश की है। साथ ही सोनाक्षी सिन्हा ने अपने अभिनय में शत-प्रतिशत देने का गजब प्रयास किया, जिसमें वे काफी हद तक सफल भी रहींं। विलेन के रूप में ताहिर राज भसीन भी अपने अभिनय में कुछ अलग करते दिखाई दिए। जेनेलिया डीसूजा, पारस अरोड़ा और नरेंद्र झा ने भी अपने-अपने अभिनय को जीवंत करने के लिए सभी ने अपनी पूरी लगन के साथ मेहनत की है। 

निर्देशन : 
निर्देशक अभिनय देव में इसमें एक्शन और थ्रिलर की कमान संभालने में हर संभव प्रयास किया है। उन्होंने इसमें हर तरह के प्रयोग तो किए ही हैं और इस सिरीज को आगे बढ़ाने वे कई मायनों में काफी हद तक सफल भी रहे। हालांकि उन्होंने फिल्म में एक्शन का धमाकेदार तड़का तो जरूर लगाया, लेकिन कहीं-कहीं थ्रिलर जैसा ओवर डोज लोगों को खला भी है। एक्शन में कुछ अलग करने का भरपूर प्रयास किया है, इसीलिए वे ऑडियंस की वाहवाही लूटने में कई मायनों में थोड़ा सफल भी रहे। हालांकि इसकी कहानी फस्र्ट हाफ  में तो ऑडियंस को बांधे रखती है, लेकिन सैकंड हाफ  में दर्शकों को इसकी कहानी इधर-उधर जाती-सी महसूस हुई। बहरहाल, 'अपना घर बेच दे और बिना खिड़की वाले घर में रहने की आदत डाल...' और 'कभी न कभी तो मिनिस्टरों को भी देश के काम आना चाहिए...' जैसे कुछ एक डायलॉग्स की तारीफ  की जा सकती है।

क्यों देखें? 
जॉन अब्राहम के फैंस और सोनाक्षी को रॉ एजेंट के तौर पर देखने की चाहत रखने वाले बेझिझक सिनेमाघरों में जा सकते हैं। इसके अलावा फुल एंटरटेनमेंट के प्रेमियों को थोड़ा सोचना पड़ सकता है। हां, हम यहां इतना कह सकते हैं कि जो बात फोर्स में थी, फोर्स 2 में नजर नहीं आती।

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