Movie Review : हरामखोर

Bhup Singh

Publish: Jan, 14 2017 12:52:00 (IST)

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Movie Review : हरामखोर

नवाजुद्दीन सिद्दीकी और श्वेता त्रिपाठी अभिनीत डायरेक्टर श्लोक शर्मा की बॉलीवुड मूवी हरामखोर को ऑडियंस का पोजिटिव रिव्यू मिल रहा है...

फिल्म का नाम : हरामखोर 
डायरेक्टर : श्लोक शर्मा 
स्टार कास्ट : नवाजुद्दीन सिद्दीकी , श्वेता त्रिपाठी, त्रिमाला अधिकारी, मोहम्मद इरफान
रेटिंग : 3 स्टार

अपनी पिछली फिल्म 'देव डी' और 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' से दर्शकों की दिलों में एक खास जगह बना चुके डायरेक्टर श्लोक शर्मा की यह फिल्म करीब 3 साल पहले रिलीज होनी थी। पिछले तीन साल से तैयार इस फिल्म की प्रॉडक्शन कंपनी ने भारत में इस फिल्म को रिलीज करने से पहले इसे कुछ नामी फिल्म फेस्टिवल्स में दिखाने का फैसला किया। जिसका कंपनी को फायदा भी हुआ।

इस फिल्म ने 'लॉस ऐंजिलिस फिल्म फेस्टिवल इंडिया कैटेगिरी' में अवॉर्ड हासिल करने के साथ कई और फेस्टिवल में अवॉर्ड जीते। न्यूयॉर्क इंडियन फिल्म फेस्टिवल में नवाजुद्दीन सिद्दीकी को बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला तो श्वेता त्रिपाठी को बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला। फिल्म रिलीज हो गई है, आइए समीक्षा देखते हैं फिल्म समीक्षा...

कहानी
नवाजुद्दीन सिद्दीकी और श्वेता त्रिपाठी अभिनीत डायरेक्टर श्लोक शर्मा की बॉलीवुड मूवी हरामखोर को ऑडियंस का पोजिटिव रिव्यू मिल रहा है। यह कहानी मध्य प्रदेश के छोटे से गांव में बेस्ड है। जहां स्कूल टीचर श्याम टेकचंद (नवाजुद्दीन सिद्दीकी) बच्चों को गणित पढ़ाता है। उसकी क्लास में संध्या (श्वेता त्रिपाठी) नाम की 15 साल की लड़की भी पढ़ती है जिस पर श्याम की खास नजर है। स्कूल के बाद कमल (इरफान खान), शक्तिमान के साथ-साथ संध्या भी श्याम के घर ट्यूशन पढऩे जाती है। घर में बीवी के होने के बावजूद श्याम का संबंध नाबालिग संध्या के साथ होता है, वहीं संध्या के घर में भी कुछ भी सही नहीं चलता। और संध्या का सहपाठी कमल भी संध्या को प्यार करने लगता है और उसे प्यार का इजहार करने के लिए कई प्रयास करता है। इसके लिए वह अपने दोस्त मिन्टू (मोहम्मद समद) की मदद लेता हैं। ऑडियंस का कहना है कि हरामखोर एक सब्जेक्ट पर बनी हैं। जो सोसायटी को एक बहुत अच्छा संदेश देती है। डायरेक्टर श्लोक शर्मा ने यंगस्टर्स की विचारधारा को प्रस्तुत करने की कोशिश की है। इस कहानी को एक अलग अंजाम मिलता है जिसे जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी

एक्टिंग
ऑडियंस का कहना है कि गांव के एक छोटे से स्कूल के टीचर के किरदार में नवाजुद्दीन ने एक बार फिर साबित किया कि उनमें हर किरदार को बेहतरीन तरीके से निभाने की क्षमता है। वहीं श्वेता त्रिपाठी ने एक स्टूडेंट के किरदार के साथ पूरा-पूरा न्याय किया है। साथ ही तारीफ करनी होगी फिल्म में कमल और मिंटू का किरदार निभाने वाले दो बाल कलाकारों मास्टर इरफान खान और मोहम्मद समद की। दोनों जब भी स्क्रीन पर आते है, तभी दर्शक सुस्त रफ्तार से आगे खिसकती इस डार्क फिल्म में रिलैक्स महसूस करते है।

निर्देशन : यह फिल्म बहतरीन एडिटिंग और स्क्रीनप्ले के चलते आपको स्क्रीन से नजर हटाने नहीं देती है। साथ ही श्लोक का निर्देशन काबिले तारीफ है।

संगीत : बैकग्राउंड में सिर्फ एक गाना है जिसका कहानी से कहीं दूर-दूर तक कोई सरोकार नहीं है।

क्यों देखें: अगर आपको कुछ अलग और लीक से हटकर बनी फिल्म देखना पसंद है जो विदेशी फेस्टिवल में अवॉर्ड जीतकर आती है, तो इस फिल्म को देखने जरूर जाएं।

क्यों न देखें: दरअसल इस फिल्म का प्रचार यह कहकर किया गया कि यह फिल्म बाल शोषण पर है। लेकिन फिल्म देखकर लगता है कि फिल्म में बाल शोषण तो हैं लेकिन स्वेच्छा से है और फिल्ममेकर ने उसे मुद्दा बनाकर प्रचार का हथियार बनाया है।

बॉक्स ऑफिस 
फिल्म ऐसे टाइम पर रिलीज हो रही है जहां एक तरफ दंगल पहले से ही हर दिन कम से कम 3-4 करोड़ का औसत बिजनेस कर रही है वहीं दूसरी तरफ 'ओके जानू' और हॉलीवुड फिल्म 'ट्रिपल' भी साथ-साथ रिलीज हो रही है जिसकी वजह से 'हरामखोर' फिल्म का बिजनेस और फुटफाल काफी प्रभावित हो सकता है।

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