Movie Review: कंगना के कंधों पर झूलती विशाल की 'RANGOON'

Dilip chaturvedi

Publish: Feb, 24 2017 02:58:00 (IST)

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Movie Review: कंगना के कंधों पर झूलती विशाल की 'RANGOON'

डायरेक्टर: विशाल भारद्वाज, स्टार कास्ट: कंगना रनोट, शाहिद कपूर और सैफ  अली खान, रेटिंग: 3/5

मुंबई। बहुप्रतीक्षत फिल्म 'रंगून' शुक्रवार को रिलीज हुई। बता दें कि यह फिल्म जब से बननी शुरू हुई थी, तब से लेकर रिलीज तक किसी न किसी वजह से चर्चा में रही है। यह विशाल भारद्वाज की फिल्म है, जो दुखभरी फिल्में बनाने में माहिर हैं और पर्दे पर कुछ करिश्मा करने में यकीन रखते हैं। उनकी फिल्मों की सिनेमैटोग्राफी कमाल की होती है...उनकी फिल्मों में तीन चीजें अहम होती है- डार्क फैक्टर...प्रेम...और तीसरा कोण। 'रंगून' में भी आपको कुछ ऐसी ही चीजें नजर आएंगी। इस फिल्म की कहानी को यदि एक लाइन में कहें, तो यह सैकंड वल्र्ड वॉर की पृष्ठभूमि पर आधरित एक प्रेम त्रिकोण है। इसमें देशभक्ति का तड़का भी है, जिसे विशाल ने अपने ही अंदाज में दर्शाया है। 


'रंगून' के केंद्र में कंगना हैं और उनके अगल-बगल में शाहिद-सैफ...। कंगना का फिल्म में एक अभिनेत्री का किरदार है, जिसे उन्होंने बड़ी खूबसूरती से जीया है, जबकि सैफ अली खान निर्माता के रोल में जमते हैं, तो वहीं सिपाही के किरदार में शाहिद कपूर छाप छोड़ते हैं। कंगना सैफ से प्यार करती हैं। उधर दूसरा विश्व युद्ध चल रहा है और सुभाष चंद्र बोस की आईएनए भारत को अंग्रेजों से आजाद कराने में जुटी है। इसी बीच एक मिशन शुरू होता है और कंगना की मुलाकात शाहिद कपूर से होती है और फिर यहीं से शुरू होता है- प्रेम त्रिकोण...प्रेम और देशभक्ति के साथ फिल्म आगे बढ़ती है, लेकिन फिल्म का अंत क्या होगा, इसका अहसास होने लगता है...फिल्म की यही कमजोर कड़ी है। कुछ सीन जबरन खींचे हुए लगते हैं...विशाल प्रेम और देशभक्ति के बीच फंसे नजर जाते हैं...दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ते हैं, लेकिन न प्रेम के साथ न्याय कर पाते ,ना ही देशभक्ति के साथ...। यह कहने में जरा भी संदेह नहीं  कि विशाल की इस फिल्म को 'ओमकारा' और 'मकबूल' की श्रेणी में नहीं खड़ा किया जा सकता है।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि 'रंगून' क्यों देखें, तो इस बारे में हम आपको बता दें कि यदि आप कंगना, शाहिद और सैफ के फैन हैं, तो आप बिल्कुल भी निराश नहीं होंगे। कंगना ने तो कमाल ही कर दिया...दो बड़े हीरो की मौजूदगी में कंगना अपने कंधों के दम पर फिल्म को आगे बढ़ाती हैं, यही इस फिल्म की यूएसपी है। हम फिल्म को तीन स्टार देते हैं। फिल्म का संगीत मधुर है और गुलजार के लिखे गीत आकर्षित करते हैं। ऐसे में 'रंगून' एक बार जरूर देखी जा सकती है। 

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