Movie Review: 'नाम शबाना' देखने जाने से पहले इसे जरूर पढ़ें

Dilip chaturvedi

Publish: Mar, 31 2017 04:20:00 (IST)

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Movie Review: 'नाम शबाना' देखने जाने से पहले इसे जरूर पढ़ें

जबरदस्त एक्शन...शानदार संवाद अदाएगी...रोंगटे खड़े कर देने वाला थ्रिलर...कुछ कमजोरी भी...

निर्माता: नीरज पांडे
निर्देशक:  शिवम नायर
कलाकार: तापसी पन्नू, अक्षय कुमार, मनोज बाजपेयी, अनुपम खेर, पृथ्वीराज सुकुमारन
रेटिंग: 3/5

मुंबई। वैसे तो बॉलीवुड में सीक्वल का दौर है, लेकिन इसी बीच एक प्रीक्वल की चर्चा होना भी लाजिमी है। जी हां, ये है नाम शबाना। फिल्म रिलीज हो गई है और रिलीज से पहले फिल्म की काफी चर्चा हुई है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या बेबी की तरह नाम शबाना भी दर्शकों की कसौटी पर उतरती है। दरअसल, बेबी का प्रीक्वल है नाम शबाना। बेबी बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही है। जहां तक नाम शबाना की बात है, तो यह पूरी तरह से तापसी पन्नू की फिल्म है। यहां जानते हैं नाम शबाना से जुड़ी खास बातें, जो उसे बेहतर सिनेमा की श्रेणी में खड़ी करती है, साथ ही उन पहलुओं पर भी नजर डालेंगे, जो फिल्म को कमजोर बनाती हैं।

कहानी
फिल्म की कहानी साल 2011 से शुरू होती। शबाना (तपसी पन्नू) एक मध्यम वर्गीय लड़की है। जो एक कुडो चैंपियन है और जिसका जय नाम का एक बेहद प्यारा बॉयफ्रेंड भी है। दोनों एक-दूसरे से बेइंतहा प्यार करते हैं। एक छेड़छाड़ की वारदात में शबाना के बॉयफ्रेंड की हत्या हो जाती है। महीनों गुजर जाते हैं, लेकिन शबाना को इंसाफ  नहीं मिलता। एकदिन शबाना को अचानक एक कॉल आता है और कॉलर कहता है कि वो कातिलों के बारे मे सब जानता है। यहां स्पेशल एजेंट रणवीर सिंह (मनोज बाजपाई) की एंट्री होती है और फिर शुरू होता शबाना के जीवन का आगे का सफर।

अपने मकसद को पूरा कर शबाना देश की सीक्रे एजेंट बन जाती है।  बेहद खतरनाक ख़ुफिया ऑपरेशन की जिम्मेदारी  शबाना को मिलती है। इसमें उसे स्पेशल एजेंट अजय (अक्षय कुमार) और शुक्लाजी (अनुपम खेर) की मदद मिलती है। इसी तरह फिल्म आगे बढ़ती है, जिसमें रोचकता होती है और थ्रिल भी, जो दर्शकों को बांधे रखता है।

अभिनय...
पूरी फिल्म तापसी के कंधों पर चलती है। फिल्म देखने के बाद ऐसी बिल्कुल भी नहीं लगता कि तापसी ने कहीं भी अपने अभिनय के साथ समझौता किया हो। अपने किरदार को बखूबी निभाया है और वाहवाही बटोरी है। अक्षय की एंट्री जोरदार तरीके से होती है...और उनका स्वागत सीटियों से होता है। अक्षय की एंट्री होते ही फिल्म की कहानी का पक्ष और मजबूत हो जाता है। खलनायक की भूमिका निभा रहे पृथ्वीराज सुकुमारण अपनी छाप छोडऩे में कामयाब हुए हैं। अनुपम खेर छोटे से रोल में हैं लेकिन मनोज बाजपेयी हमेशा की तरह अपने चिरपरिचित अंदाज में आते हैं और छा जाते हैं।

निर्देशन...
नीरज पांडे द्वारा निर्मित इस फिल्म के निर्देशक शिवम नायर हैं। शिवम का निर्देशन काबिले तारीफ है। खासकर जब फिल्म प्रेडिक्टेबल हो जाती है, तब दर्शकों को बांधे रखने के लिए रोमांचक दृश्यों की जरूरत होती है। इस मामले में शिवम सौ प्रतिशत खरे उतरे हैं।

मजबूत कड़ी...
-तापसी पन्नू, अक्षय कुमार की अदाकारी और काबिले तारीफ एक्शन।
-फिल्म का निर्देशन गजब का है। 
- फैमिली के साथ बैठकर इस फिल्म को देखा जा सकता है। 

कमज़ोर कड़ी
पटकथा के लिहाज से बेबी की तुलना में नाम शबाना थोड़ा कमजोर है। शुरआत स्लो होती है, लेकिन जल्द ही फिल्म ट्रैक पर आ जाती है। बतौर एजेंट शबाना के किरदार को और विस्तार दिया जाता, तो फिल्म में जान आ जाती।

क्यों देखें?
बेशक, यह फिल्म बेबी जैसी नहीं है, लेकिन तापसी और अक्षय की बेहतरीन अदाकारी के लिए फिल्म को एकबार देखा जा सकता है। खास बात यह है कि पूरे परिवार के लिए बनाई गई है यह फिल्म, जो मनोरंजन से भरपूर है।

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