'The Ghazi Attack' Movie Review: भारत-पाक युद्ध की एक अनसुनी दास्तां

Dilip chaturvedi

Publish: Feb, 17 2017 03:56:00 (IST)

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'The Ghazi Attack' Movie Review: भारत-पाक युद्ध की एक अनसुनी दास्तां

कलाकार: अतुल कुलकर्णी, के के मेनन, राणा दुग्गुबाती, तापसी पन्नू, ओम पुरी, राहुल सिंह, रेटिंग: 3.5 स्टार

फिल्म: 'द गाजी अटैक',  डायरेक्टर: संकल्प रेड्डी 

मुंबई। बंटवारे के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच कई युद्ध हुए हैं, जिनके बारे में शायद ही कोई ऐसा शख्स हो, जो नहीं जानता हो...दरअसल, हर युद्ध पर फिल्में भी बनी हैं, जो देशभक्ति का जज्बा जगाती हैं, लेकिन भारत-पाक ने एक ऐसा युद्ध भी लड़ा था, जिसके बारे में किसी को कुछ भी पता नहीं है। जी हां, यह वाकया 1971 का है, जब यह लड़ाई समंदर के भीतर लड़ी गई थी। इसी अनुसनी दास्तां पर बेस्ड है- द गाजी अटैक। राणा दुग्गुबाती, तापसी पन्नु, के.के.मेनन और अतुल कुलकर्णी जैसे बेहतरीन सितारों से सजी यह फिल्म एक ऐसी ही कहानी कहती है, जिसे आजतक भारत के लोगों ने कभी नहीं सुना था।

कहानी...
द गाजी अटैक की कहानी एक सच्ची घटना पर आधारित है, जो कि 1971 की भारत-पाकिस्तान वॉर से पहले हुई थी। पाकिस्तान की तरफ से पी.एन.एस. गाजी नाम की एक सबमरीन भारत की तरफ  भेजी गई थी, जिसका मिशन भारत के आई.एन.एस. विक्रांत को तबाह करना था। जब इस बात की जानकारी भारतीय नेवी को मिली, तो वो पी.एन.एस. गाजी को रोकने के लिए अपनी एक दूसरी सबमरीन एस-21 भेजते हैं। यह एक क्लासीफाइड मिशन था, जिसकी जानकारी कुछ ही लोगों को थी। भारतीय सबमरीन एस-21 न केवल पी.एन.एस.गाजी को रोकने में कामयाब रहती है, बल्कि उसे खत्म भी करती है। जब इस बात की घोषणा भारतीय नेवी द्वारा की जाती है कि उन्होंने पी.एन.एस. गाजी को तबाह किया है, तब पाकिस्तान नेवी पी.एन.एस. गाजी के तबाह होने की वजह उसके अंदर हुई गड़बड़ी को बताता है। अब यह बात कोई नहीं जानता कि पी.एन.एस. गाजी कैसे तबाह हुई थी, यह राज समुंदर के नीचे पी.एन.एस. गाजी के साथ ही दफन हो गए थे, लेकिन इसके लिए डायरेक्टर संकल्प रेड्डी को दाद देनी होगी कि उन्होंने इस अनसुनी दास्तां को रुपहले पर्दे पर बड़ी ही खूबसूरती के साथ दर्शाया है।

क्यों देखें...
-यह फिल्म उस अनसुनी कहानी को दर्शाती है जो शायद बहुत ही कम लोगों को पता है और डायरेक्टर राइटर संकल्प रेड्डी ने बड़े ही अनोखे अंदाज में पूरी कहानी दिखाई है। जिसमें कभी आप इमोशनल होते हैं, तो कभी कुर्सी पकड़ के बैठ जाते हैं, तो कभी राष्ट्र प्रेम की भावना भी जागृत होती है।

- फिल्म की सिनेमेटोग्राफी कमाल की है, जिसकी वजह से आप सच में पनडुब्बी के भीतर और बाहर होने वाली घटनाओं को महसूस कर पाते हैं।

- अतुल कुलकर्णी, के के मेनन जैसे उम्दा अभिनेताओं की मौजूदगी इस फिल्म को और भी ज्यादा आकर्षक बनाती है। वहीं राणा दुग्गुबाती और राहुल सिंह का काम भी सराहनीय है। ओम पुरी ने भी हमेशा की तरह सहज अभिनय करते नजर आए। हालांकि वो इस फिल्म को देख पाने से पहले ही दुनिया से हमेशा के लिए रुखसत हो गए। तापसी पन्नू का रोल छोटा है, जितना है, उसमें वो प्रभावित करती हैं।

- फिल्म का वीएफएक्स और बैकग्राउंड स्कोर भी काबिल ए तारीफ है। वहीं डायलॉग्स भी सटीक हैं। कुल मिलाकर यह  एक ऐसी फिल्म है, जिसे हर हिंदुस्तानी को एक बार जरूर देखनी चाहिए।

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